13 मई 2026 को यहां “वर्ल्ड मेडिटेट्स विद गुरुदेव” कार्यक्रम होगा, जिसमें गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के साथ दुनिया के 182 देशों से लोग जुड़ेंगे। लाखों लोग इस ध्यान सत्र में सीधे और लाइवस्ट्रीम के जरिए हिस्सा लेंगे - इसे अब तक के सबसे बड़े सामूहिक ध्यान कार्यक्रमों में गिना जा रहा है।
क्यों खास है यह आयोजन?
आज के समय में जब युवा वर्ग तनाव, अनिश्चितता और डिजिटल ओवरलोड से जूझ रहा है, ऐसे में ध्यान और मानसिक शांति की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यही बात कही कि आज के युवाओं के लिए मानसिक संतुलन और आंतरिक शांति बेहद जरूरी है
सामाजिक रूप से जिम्मेदार और संवेदनशील युवा ही विकसित भारत की नींव हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि विज्ञान और तकनीक में आगे बढ़ते भारत की असली ताकत उसकी युवा शक्ति ही है- और ऐसे में ध्यान, योग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रयासों की भूमिका अहम हो जाती है.
सिर्फ मेडिटेशन नहीं, एक ग्लोबल मूवमेंट
यह कार्यक्रम आर्ट ऑफ लिविंग के 45 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित हो रहा है. पिछले कुछ हफ्तों में देश-विदेश से कई बड़े नेता, उद्योगपति और कलाकार इस जश्न का हिस्सा बने.
- अब 13 मई को होने वाला यह ध्यान सत्र
- अलग-अलग टाइम जोन में बैठे लोगों को
- एक साथ शांति और आत्मचिंतन से जोड़ेगा
गुरुदेव का संदेश
इस आयोजन के जरिए एक सरल लेकिन गहरा संदेश दिया जा रहा है:
“अंदर की शांति ही बाहर की शांति का रास्ता बनाती है.”
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