Banarasi And Kanjeevaram Saree Border Significance: शादी से लेकर त्योहार तक में अक्सर बनारसी, कांजीपुरम या पैठणी साड़ी देखने को मिलती है. क्योंकि हमारा ध्यान उस पर बनी खूबसूरत डिज़ाइनों पर सबसे पहले जाता है. कहीं आम की सुंदर आकृति (कैरी) बनी होती है, तो कहीं अंगूर की बेल, फूल और पत्तियां नजर आती हैं. अक्सर लोग सोचते हैं कि ये सिर्फ साड़ी को सुंदर दिखाने के लिए बनाए गए हैं. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है! भारत के पारंपरिक कपड़ों पर बने ये फल, फूल और बेल सिर्फ एक डिज़ाइन नहीं हैं. इनके पीछे सदियों पुराना इतिहास, हमारी संस्कृति छिपी होती हैं. तो चलिए जानते हैं इन डिज़ाइनों का असली मतलब क्या है.
डिज़ाइनों के पीछे छिपा है ये खास मतलब- (Traditional Indian Textile Symbols)
1. आम-
साड़ियों के बॉर्डर या पल्लू पर आपने काजू या आम जैसी शेप वाली डिज़ाइन सबसे ज्यादा देखी होगी. इसे फैशन की दुनिया में 'पैस्ले' (Paisley) और आम बोलचाल में 'कैरी' कहा जाता है.
इसका मतलब- भारतीय संस्कृति में आम को फलों का राजा माना जाता है. कपड़ों पर इसकी आकृति का होना जीवन, समृद्धि (Prosperity), खुशहाली और संतान प्राप्ति (Fertility) का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि शादी के जोड़ों में कैरी की डिज़ाइन जरूर बनाई जाती है.

2. अंगूर और बेल-
पुरानी बनारसी साड़ियों में अंगूर के गुच्छे और उनकी घुमावदार बेलें बहुत ज्यादा देखने को मिलती हैं.
इसका मतलब- अंगूर की बेलें आपस में जुड़ी होती हैं और लगातार आगे बढ़ती हैं. कपड़ों पर यह डिज़ाइन 'अमरता' और 'निरंतरता' को दिखाती है. इसका मतलब है कि परिवार का वंश और आपस का प्यार हमेशा इसी तरह बढ़ता रहे.
3. कमल का फूल-
कांजीपुरम और गढ़वाल जैसी दक्षिण भारतीय साड़ियों में कमल के फूल की डिज़ाइन बहुत आम है.
इसका मतलब- कमल का फूल कीचड़ में खिलने के बाद भी बिल्कुल साफ और सुंदर रहता है. इसे पवित्रता, ज्ञान और धन की देवी मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. ऐसी साड़ी पहनना शुभ और सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला माना जाता है.
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