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दशहरा पर दिल्ली-एनसीआर वालों घूम आइए रावण के गांव, यहां रावण दहन नहीं बल्कि होती है पूजा

Dussehra 2026: दशहरे पर दिल्ली-NCR के पास स्थित बिसरख गांव घूमने का प्लान बना सकते हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इसे रावण की जन्मस्थली माना जाता है. यहां दशहरे पर रावण दहन नहीं, बल्कि पूजा-पाठ और हवन किया जाता है.

दशहरा पर दिल्ली-एनसीआर वालों घूम आइए रावण के गांव, यहां रावण दहन नहीं बल्कि होती है पूजा
दशहरे पर दिल्ली-NCR के पास स्थित बिसरख गांव
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दशहरे पर आपने जगह-जगह रावण के पुतले जलते देखे होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली-NCR के पास एक ऐसा गांव भी है जहां दशहरे पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है. दशहरे पर इस गांव में पूजा और हवन किया जाता है. उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्थित बिसरख गांव को स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रावण की जन्मस्थली माना जाता है. यहां का प्राचीन शिव मंदिर और दशहरे से जुड़ी अनोखी परंपरा इसे एक अलग तरह की ट्रिप के लिए खास बनाती है. अगर इस बार त्योहार पर कुछ अलग देखना चाहते हैं तो इस जगह को अपनी घूमने की लिस्ट में शामिल कर सकते हैं.

क्या है बिसरख गांव का इतिहास

इस्टाग्राम इफ्लूंसर रेनू भाटी ने अपनी एक वीडियो में बताया कि बिसरख का नाम ऋषि विश्रवा के नाम पर पड़ा, जिन्हें रावण का पिता माना जाता है. गांव के प्राचीन शिव मंदिर को भी इस मान्यता से जोड़ा जाता है. यहां के लोगों का विश्वास है कि ऋषि विश्रवा इसी शिवलिंग की पूजा करते थे और रावण का जन्म भी इसी स्थान पर हुआ था. हालांकि, रावण की जन्मस्थली से जुड़ी इन बातों को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य के बजाय स्थानीय धार्मिक मान्यता के तौर पर देखनाा चाहिए. रेनू भाटी ने आगे बताया कि स्थानीय मान्यता है कि रावण का जन्म बिसरख गांव में हुआ था और बाद में वह श्रीलंका गए थे. मान्यता के अनुसार, भगवान शिव की कठोर तपस्या के बाद उन्हें लंका प्राप्त हुई थी. रेनू ने मंदिर परिसर दिखाते हुए बतााया कि यहां शिवलिंग के साथ ऋषि और रावण के माता-पिता से जुड़ी मूर्तियां भी मौजूद हैं. उनके मुताबिक, आमतौर पर रावण को दशहरे पर जलाए जाने वाले पुतले के रूप में देखा जाता है, लेकिन बिसरख में उनसे जुड़ी अलग धार्मिक मान्यता है. उन्होंने मंदिर परिसर को सुंदर और शांत बतााते हुए कहा कि वहां उन्हें ज्यादा भीड़ नजर नहीं आई.

दशहरे पर क्यों नहीं जलाया जाता रावण का पुतला?

बिसरख की सबसे खास बात यहां दशहरे पर निभाई जाने वाली परंपरा है. देश के कई हिस्सों में जहां रावण दहन होता है, वहीं गांव में पूजा-पाठ और हवन किए जाते हैं. स्थानीय लोगों के लिए रावण केवल रामायण का एक पात्र नहीं, बल्कि पूर्वज के समाान हैं. इसी मान्यता के चलते यहां रावण का पुतला जलाने की परंपरा नहीं है. यह अनोखी परंपरा भारत की विविध धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं को करीब से समझने का मौकाा देती है.

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बिसरख में घूमने लायक क्या है?

यहां आने वाले लोग प्राचीन शिव मंदिर के दर्शन कर सकते हैं और गांव की दशहरा परंपरा के बारे में जान सकते हैं. मंदिर परिसर में शिवलिंग और अन्य धार्मिक प्रतीक देखने को मिलते हैं. स्थानीय लोगों से बातचीत करके इस जगह से जुड़ी मान्यतााओं और परंपराओं को समझना भी यात्रा का दिलचस्प हिस्सा हो सकता है. हालांकि, किसी भी बंद हिस्से या गुफा में जााने से पहले स्थानीय प्रशासन या मंदिर प्रबंधन से अनुमति और सुरक्षा संबंधी जानकारी जरूर लें.

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दिल्ली से बिसरख गांव कैसे पहुंचें

बिसरख गांव ग्रेटर नोएडा वेस्ट उत्तर प्रदेश में स्थित है. दिल्ली-NCR से यहां सड़क मार्ग के जरिए पहुंचा जा सकता है. निकलने से पहले मैप पर मंदिर की सही लोकेशन और ट्रैफिक की स्थिति जांच लें. दशहरे के दिन जााने की योजना है, तो मंदिर में दर्शन और पूजा के समय की जानकारी पहले ले लें.

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