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“उस हादसे ने मेरी जिंदगी बदल दी, ट्रक छोड़ा, गर्लफ्रेंड भी चली गई”: उबर ड्राइवर की सच्ची कहानी

Uber Driver Real Life Story: एक दर्दनाक हादसे के बाद ट्रक छोड़ने वाले 28 साल के ड्राइवर की सच्ची कहानी, जो अब उबर कैब चलाकर जिंदगी आगे बढ़ा रहा है.

“उस हादसे ने मेरी जिंदगी बदल दी, ट्रक छोड़ा, गर्लफ्रेंड भी चली गई”: उबर ड्राइवर की सच्ची कहानी
A real‑life story of fear, survival and the unseen struggles of Indian cab drivers.

Uber Driver Real Life Story: मेरे घर से दफ्तर करीब 50 किलोमीटर दूर है. रोज़ दफ्तर पहुंचने के लिए मैं कैब का सहारा लेती हूं.  

घर और दोस्तों की तरफ से अकसर यह कहा जाता है कि रोज़ कैब लेने से बेहतर है कि खुद ड्राइव कर लिया जाए. लेकिन उन्हें कौन समझाए कि 24 घंटे में से ये वही 4 घंटे होते हैं जो पूरी तरह मेरे अपने होते हैं.

इन चार घंटों में मैं जो चाहूं, कर सकती हूं- मां से बात, दफ्तर के मेल, खबरों की सुर्खियां या बस खिड़की से बाहर देखते हुए बीती थकान उतारना. इसलिए मैंने तय किया है कि सफर कैब से ही होगा.

आज भी जब मैं ऑफिस जा रही थी, तो देखा कि एक काफ़ी जवान सा लड़का कैब चला रहा है. उत्सुकतावश मैंने पूछ लिया- कितने समय से कैब चला रहे हो. इसके बाद बातचीत का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ कि सफर कब पूरा हो गया, पता ही नहीं चला.

ड्राइवर का नाम पंकज सिंह है. उम्र 28 साल. वह जालौन, उरई के पास के एक गांव से है.

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Uber Driver Real Life Story. (image insta@chauhanpankaj124518)

“उस एक हादसे के बाद ट्रक छोड़ दिया”

पंकज ने बताया कि पहले वह ट्रक पर हेल्पर था, फिर खुद ट्रक चलाने लगा.  लेकिन साल 2016 में एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने उसकी जिंदगी की दिशा बदल दी.

“मैं ट्रक लेकर वन‑साइड सड़क से जा रहा था. आगे एक बाइक थी, जिस पर पति‑पत्नी सवार थे. अचानक पीछे बैठी महिला बाइक से कूद गई. पीछे से आ रहा ट्रक संभल नहीं पाया और टकरा गया.”

इस हादसे के बाद जो हुआ, वह पंकज आज भी भूल नहीं पाया.

“घायल लोगों को देखकर वहां जमा भीड़ गुस्से में आ गई. उन्होंने हमारे सामने ही उस ट्रक ड्राइवर की जान ले ली. हालात ऐसे थे कि हम ट्रक छोड़कर भागे.”

“उसी दिन तय कर लिया- चाहे कुछ भी हो जाए, अब ट्रक नहीं चलाऊंगा. ट्रक ड्राइवर की जिंदगी की कोई गारंटी नहीं होती.”

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ट्रक छोड़कर उबर‑ओला का सफर

उस हादसे के बाद पंकज ने टैक्सी चलाना शुरू किया. आज वह उबर और ओला के लिए कैब चलाता है.

परिवार के बारे में पूछने पर वह मुस्करा देता है- 

“अभी अकेला हूं मैडम. एक गर्लफ्रेंड थी, लेकिन उसकी शादी हो गई. अब शादी करने का मन नहीं करता.”

मैंने कहा- शादी ज़िंदगी का हिस्सा है. ..

पंकज हंसते हुए बोला- 

“मैडम, कौन पड़े शादी के चक्कर में. दोस्तों को देख लिया है- शादी के बाद बस जिम्मेदारियां और चिक‑चिक. अभी जैसा है, ठीक है.”

रिश्तों को लेकर साफ सोच

बातों‑बातों में समझ आया कि पंकज रिश्तों को लेकर बहुत साफ है.  उसने बताया कि वह और उसकी गर्लफ्रेंड शादी के बारे में कभी गंभीर नहीं थे.

“हम दोनों को पता था कि हम ऐसे ही साथ हैं. शादी करनी ही है, ऐसा कुछ नहीं था.”

यह सुनकर एहसास हुआ कि रिश्तों को लेकर जो सोच हम सिर्फ शहरों से जोड़ते हैं, वह अब छोटे कस्बों और गांवों तक भी पहुंच चुकी है.

“फिल्मों में ही ऐसा होता है”

मैंने मज़ाक में पूछा- कभी लगा कि ‘राजा हिंदुस्तानी' की तरह कोई कहानी बन जाएगी?

पंकज पहली बार गंभीर हुआ- 

“मैडम, ये सब फिल्मों में अच्छा लगता है. असल जिंदगी में लोग हमें देखते भी नहीं. सब अपने‑अपने हिसाब से बहुत तेज़ हैं.”
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real life cab driver experience.  (image insta@chauhanpankaj124518)

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क्या ट्रक ड्राइवर सच में बुरे होते हैं?

बचपन की एक बात याद आई- हमें कहा जाता था कि ट्रक ड्राइवर अच्छे नहीं होते.  

पंकज ने शांति से कहा- 

“बुरे नहीं होते मैडम. महीनों घर नहीं जाते. छह महीने का बच्चा छोड़ते हैं, तो जब मिलता है, वो साल भर का हो चुका होता है. तस्वीरें ट्रक में लगाकर चलते हैं. मजबूरी में बस थोड़ा पी लेते हैं.”

मैं हंस दी-

“बस थोड़ा…”

पंकज ने बहुत कुछ कहा- पैसे, आज़ादी, समाज और अपनी शर्तों पर जीने को लेकर.  जब हम ऑफिस पहुंचे, तो लगा जैसे एक पूरा जीवन सफर के बीच खुल गया हो.

बाकी किस्से फिर कभी... फ‍िलहाल इस द‍िलदार उबर ड्राइवर की इंस्‍टा प्रोफाइल के साथ आपको छोड़ रही हूं. पंकज ने खुद ही बताया था कि वह इंस्‍टा पर भी है. आप भी म‍िल‍िए पंकज चौहान से- 

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