AC Ki Aadat Kaise Chore: गर्मी आज के समय में कितनी ज्यादा बढ़ गई है कि एसी के बिना सोना और रहने के बारे में सोच ही नहीं पाते हैं. वहीं बचपन के दिनों को याद करती हूं तो पंखे और खुली छत के नीचे सोने से लेकर, घर में लगे एक कूलर से एसी तक का सफर याद आ जाता है. यहीं सोचचे हैं कि कभी बिना पंखे के सो जाते थे और आज एसी के बगैर सोने का सोच कर भी मन घबरा जाता है. क्योंकि आज के समय में ऑफिस में AC, घर में AC और कार में भी AC…और धीरे-धीरे ये हमारी आदत बन जाती है. मुझे भी ये आदत लगा गई और हाल ऐसा हो गया कि एसी AC के बंद होते ही घबराहट होने लगती है, चिड़चिड़ापन, पसीना और बेचैनी शुरू हो जाती थी. एसी के बाहर निकलना तो सजा जैसा लगने लगा था.

खुद को हुआ एहसास
अगर कोई मुझे नीचे वाली मार्केट जाने के लिए भी कहता था तो मेरे हाथ-पांव फूलने लगते थे. कि इतनी गरमी में कैसे नीचे जा पाउंगी. मेरी इस आदत से मेरे दोस्त भी बहुत परेशान हो गए थे. क्योंकि मैं उनके साथ कोई प्लान ही नहीं बनाती थी. लेकिन एक दिन मुझे एहसास हुआ कि मेरी ये आदत बिल्कुल भी सही नहीं है. इस तरह से एसी AC पर डिपेंड हो जाना मेरी हेल्थ के लिए भी ठीक नहीं है. बल्कि गर्मी को सहन करने की बॉडी की नैचुरल सहनशक्ति को भी कम कर देता है. इसके बाद मैनें सोच लिया और खुद को बदलने का फैसला किया.
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एसी का टेंपरेचर
अपनी इस आदत को बदलने के लिए सबसे पहले मैंने AC का टेम्परेचर को 16-18 डिग्री से कम रखना शुरू किया. AC के टेंपरेचर को बढ़ाकर मैनें 24-26 डिग्री कर दिया. इसके बाद से मेरे शरीर को थोड़ा-थोड़ा गर्मी झेलने की आदत पड़ने लगी.
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हर वक्त एसी में नहीं बैठना
इसके बाद मैनें अपनी दूसरी आदत बदली वो थी घर आने के बाद भी हर वक्त एसी (AC) में बैठने के बजाय फैन पर बैठना शुरू किया और बॉलकनी में भी बैठने लगी. हालांकि शुरुआत में मुझे थोड़ी दिक्कत हुई लेकिन बाद में मेरी बॉडी ने खुद को इस तरह से एडजस्ट करना सीख लिया.
डाइट
इसके साथ ही मैंने अपनी डाइट पर भी ध्यान देना शुरू किया. अब मैं उन चीजों को खाने की ज्यादा कोशिश की जो मेरे शरीर को अंदर से ठंडा रखें. अब मैं छाछ,नींबू पानी और नारियल पानी पीने लगी.
बाहर निकलना शुरू किया
इसके साथ ही मैनें सुबह और शाम का समय बाहर निकलना शुरू किया. वॉक पर जाना, बालकनी में बैठनी इस तरह से मेरी बॉडी बाहर का टेंपरेचर के हिसाब से खुद को ढालने लगी.
कपड़े
इसके साथ ही मैनें हल्के और ढीले कपड़े पहनना शुरू किया. कॉटन के कपड़े पहनने से पसीना कम लगता है और गर्मी भी ज्यादा परेशान नहीं करती.
15 दिनों में दिखने लगा फर्क
अपनी ये सभी आदतें बदलने के बाद मुझे 2-3 हफ्तों में ही फर्क दिखने लगा था. अब मैं बिना एसी (AC)भी आराम से रह लेती हूं. अब बाहर जाने से पहले मुझे डर नहीं लगता था.
अगर आप भी बिना एसी (AC) के नहीं रह पाते हैं तो इसे एकदम से छोड़ने की कोशिश ना करें. बल्कि अपनी आदतों को धीरे-धीरे बदलें. इसके बाद आपका शरीर इस हिसाब से एडजस्ट हो जाएगा.
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