Bengal Elections 2026: हिंदू अस्मिता और SIR बीजेपी का एजेंडा! पीएम मोदी से पहले अमित शाह करेंगे दौरा

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से पहले भाजपा ने आक्रामक रुख अपनाया है. पीएम मोदी के दौरे से पहले अमित शाह तीन दिवसीय बंगाल प्रवास पर हैं. शाह संगठनात्मक बैठकों में चुनावी रणनीति तैयार करेंगे. भाजपा ‘हिंदू अस्मिता’, बांग्लादेश के हालात और मतुआ वोट बैंक को साधने के लिए CAA पर जोर दे रही है.

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Bengal Elections 2026: 2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का बिगुल अभी से बजता दिखाई दे रहा है. राज्य में सियासी पारा उस वक्त और चढ़ गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे की सुगबुगाहट के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कमान संभाल ली. शाह सोमवार से बंगाल के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंच रहे हैं, जहां वे पार्टी की जमीनी हकीकत परखेंगे और रणनीति को धार देंगे.

भाजपा इस बार 'हिंदू अस्मिता' और बांग्लादेश के ताजा हालातों को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है, वहीं इलेक्टोरल रोल के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) को लेकर भी पार्टी बेहद सतर्क है. गृह मंत्री का यह दौरा बंगाल की राजनीति में भाजपा के आक्रामक रुख का साफ संकेत दे रहा है.

अमित शाह का मिशन बंगाल

पश्चिम बंगाल चुनाव में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है, ऐसे में गृह मंत्री अमित शाह का तीन दिन का कोलकाता प्रवास बेहद अहम माना जा रहा है. 2025 के आखिरी दिनों में हो रहा यह दौरा मुख्य रूप से संगठनात्मक मजबूती पर केंद्रित है. शाह इस बार रैलियों के बजाय बंद कमरों की बैठकों (स्ट्रेटेजी मीटिंग्स) को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं. 

साल्ट लेक के सेक्टर पांच में भाजपा ने एक नई बिल्डिंग किराए पर ली है, जिसे चुनाव का मुख्य मुख्यालय बनाया गया है. सोमवार शाम को अमित शाह इसी नए ठिकाने से बंगाल के पार्टी दिग्गजों के साथ जीत का खाका तैयार करेंगे.

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बांग्लादेश के हालात और भाजपा का आक्रामक रुख

बंगाल भाजपा की फायरब्रांड नेता और आसनसोल से विधायक अग्निमित्रा पॉल ने शाह के दौरे को लेकर ममता सरकार पर तीखा हमला बोला है. पॉल का कहना है कि बांग्लादेश में जो स्थितियां बनी हैं, वैसी ही कोशिश ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में कर रही हैं. 

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अब अपना 'हिंदुत्व' साबित करने के लिए 'दुर्गाआंगन' जैसे प्रोजेक्ट ला रही हैं, लेकिन जनता सब जानती है. भाजपा नेताओं का मानना है कि अगर बंगाल सुरक्षित नहीं रहा तो पूरे देश की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी.  

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मतदाता सूची (SIR) और मतुआ समुदाय पर फोकस

इस दौरे का एक बड़ा हिस्सा इलेक्टोरल रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया से जुड़ा है. भाजपा को आशंका है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी हो सकती है, इसलिए शाह खुद इसकी समीक्षा करेंगे. विशेष रूप से 'मतुआ' वोट बैंक को साधे रखने के लिए नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का मुद्दा फिर से चर्चा में है. 

अग्निमित्रा पॉल ने स्पष्ट किया कि गृह मंत्री ने भरोसा दिया है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम लिस्ट से नहीं हटने दिया जाएगा. भाजपा का तर्क है कि मतुआ समुदाय को नागरिकता और सुरक्षा दिलाना उनकी प्राथमिकता है, जबकि टीएमसी इसका विरोध कर रही है.

टीएमसी का पलटवार: 'डेली पैसेंजर' और फंड का मुद्दा

अमित शाह के दौरे पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी कड़ा रुख अख्तियार किया है. टीएमसी प्रवक्ता तौसीफुर रहमान ने शाह को 'डेली पैसेंजर' और 'चुनावी नेता' करार देते हुए कहा कि उनके आने से राज्य की राजनीति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. 

टीएमसी का कहना है कि अगर शाह वाकई गृह मंत्री के तौर पर आ रहे हैं, तो उन्हें बंगाल का बकाया 2 लाख करोड़ रुपये का फंड जारी करना चाहिए. उन्होंने भाजपा पर 'बांग्ला विरोधी' होने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा केवल ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है, जबकि ममता बनर्जी विकास और सद्भाव के रास्ते पर चल रही हैं.

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बैठकों का दौर और भविष्य की राह

अमित शाह 31 तारीख को साइंस सिटी ऑडिटोरियम में कोलकाता के कार्यकर्ताओं के साथ एक विशेष बैठक करेंगे. इसके अलावा सांसदों और विधायकों के साथ भी अलग से मंत्रणा होगी. इस तीन दिवसीय दौरे का मकसद केवल चुनाव की तैयारी ही नहीं, बल्कि राज्य के फीडबैक के आधार पर आउटरीच प्रोग्राम को और असरदार बनाना है.  

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