कौन हैं IPAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन? IIT के बाद इस कंपनी में की पहली नौकरी

प्रतीक जैन ने 2015 में विनेश चंदेल और ऋषि राज सिंह के साथ मिलकर I-PAC की स्थापना की है. ये एक बिज़नेस कंसल्टिंग और सर्विसेज कंपनी है.  इस कंपनी के साथ 201-500 कर्मचारी जुड़े हुए हैं.

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प्रतीक जैन ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, बॉम्बे (IIT-B) से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और मैटेरियल्स साइंस में इंजीनियरिंग की है.

पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के कोलकाता ऑफिस और इसके डायरेक्टर और को-फाउंडर प्रतीक जैन के घर पर प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को छापेमारी की. इसके अलावा ईडी ने आई-पैक के सॉल्ट लेक सेक्टर 5 ऑफिस में तलाशी अभियान चलाया. बता दें आई-पैक साल 2019 से तृणमूल कांग्रेस के लिए एक राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म के रूप में काम कर रहा है. प्रतीक जैन आई-पैक के सह-संस्थापक और निदेशक हैं. ED के एक्शन के बाद से ही प्रतीक जैन सुर्खियों में आ रहे हैं.

प्रतीक जैन कौन हैं?

प्रतीक जैन (Prateek Jain Education Qualification) ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, बॉम्बे (IIT-B) से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और मैटेरियल्स साइंस में इंजीनियरिंग की है. इस दौरान उन्होंने एक्सिस म्यूचुअल फंड में इंटर्नशिप भी की. लिंक्डइन से मिली जानकारी के अनुसार इंजीनियरिंग पूरा करने के बाद जैन ने डेलॉइट में एनालिस्ट के तौर पर काम किया. फिर ‘सिटिज़न्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस' के फाउंडिंग मेंबर बन गए. इसके बाद उन्होंने I-PAC की स्थापना की.

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प्रतीक जैन ने 2015 में विनेश चंदेल और ऋषि राज सिंह के साथ मिलकर I-PAC की स्थापना की है. ये एक बिज़नेस कंसल्टिंग और सर्विसेज कंपनी है.  इस कंपनी के साथ 201-500 कर्मचारी जुड़े हुए हैं. इस कंपनी का  हेडक्वार्टर हैदराबाद, तेलंगाना में है.  ये कंपनी कैंपेन मैनेजमेंट, पॉलिटिकल कंसल्टिंग, डिजिटल कम्युनिकेशन, मीडिया रिलेशन, सप्लाई और प्रोक्योरमेंट, स्ट्रेटेजिक रिसर्च, सोशल मीडिया मार्केटिंग, पब्लिक रिलेशन, पब्लिक पॉलिसी, फील्ड ऑपरेशन, टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिटिक्स और ऑपरेशन से जुडे काम करती है.

प्रतीक जैन के साथ जुड़े विवाद

गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने कोयला ‘घोटाला' से जुड़े धन शोधन मामले के सिलसिले में जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित घर और उनके साल्ट लेक कार्यालय की तलाशी ली थी. जिसके विरोध ममत बनर्जी ने किया और खुले तौर पर प्रतीक जैन के समर्थन पर उतर आईं.

काफी कम लोग जानते हैं कि साल 2013 में, जब बीजेपी मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की तैयारी कर रही थी, तब जैन, प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली मुख्य टीम का हिस्सा थे. बाद में ये प्रशांत किशोर से अलग हो गए थे. I-PACको आगे बढ़ाने के कार्य में जुट गए.

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