नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आज संसद में अपने भाषण की शुरुआत पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की 2020 में भारत और चीन के बीच लद्दाख गतिरोध पर एक अप्रकाशित किताब से की. राहुल गांधी ने डोकलाम से जुड़े मुद्दे पर नरवणे की किताब का हवाला देते हुए बोलना शुरू ही किया था कि इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तुरंत खड़े हो गए. उन्होंने सवाल किया कि जिस किताब का जिक्र किया जा रहा है, क्या वह प्रकाशित हुई है या नहीं? राजनाथ सिंह ने साथ ही कहा कि किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है, इसलिए उसके आधार पर बयान देना ठीक नहीं है.
इतना ही नहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदन के नियम 349 का जिक्र किया. स्पीकर ओम बिरला ने इस दौरान कहा अखबार की कटिंग या अप्रकाशित किताबों पर चर्चा करने की परंपरा नहीं है. सदन की कार्यवाही नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार चलती है. आइए समझते हैं कि आखिर नियम 349 क्या है, जो अक्सर चर्चाओं में रहता है.
क्या हैं लोकसभा का नियम 349?
लोकसभा की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए कई तरह के नियम बनाए गए हैं. हर सांसद को इन नियमों का पालन करना होता है. इन्हीं नियमों में से एक नियम 349 है. नियम 349 "सदन में सदस्यों द्वारा पालन किए जाने वाले नियमों" ("Rules to be observed by members in House") से संबंधित है. इस नियम के तहत सदन में किसी भी चित्र, अप्रकाशित पुस्तक या अखबार का प्रदर्शन करने पर रोक है. सदन के काम के अलावा कोई भी किताब, अखबार या चिट्ठी नहीं पढ़ी जा सकती.
लोकसभा के 349 नियम में और भी कई चीजों का जिक्र किया गया है, जैसे
- किसी भी सदस्य के बोलते समय गलत तरीके से या शोर मचाकर बीच में बोले से नहीं रोका जा सकता है.
- बोलने वाले किसी सदस्य के बीच से नहीं गुजरा जा सकता है.
- जब कोई दूसरा सदस्य बोल रहा हो, तो कार्यवाही में रुकावट नहीं डाल सकते हैं. सीटी बजाना या कमेंट्री नहीं कर सकते हैं.
- हाउस में नारे नहीं लगा सकते हैं.
- संसद भवन परिसर में कोई भी ऐसा साहित्य, सवाल-जवाब, पैम्फलेट, प्रेस नोट, लीफलेट वगैरह नहीं बांटे जा सकते हैं. जो काम से जुड़ा न हो.














