Ajit Pawar Plane Crash: प्लेन में कौन सी होती है सबसे सुरक्षित सीट, क्रैश में जिंदा बचने के होते हैं चांस

Ajit Pawar Plane Crash: अजीत पवार से जुड़े विमान हादसे ने देश को झकझोर दिया है. इस दर्दनाक घटना के बाद लोगों के मन में एक सवाल तेजी से उठ रहा है कि प्लेन में कौन सी सीट सबसे सुरक्षित होती है और क्रैश के दौरान जिंदा बचने के चांस कितने होते हैं.

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अजित पवार प्लेन क्रैश

Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजीत पवार की विमान हादसे में मौत की खबर ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक अजीत पवार का ये विमान पुणे से बारामती जा रहा था. बुधवार को लैंडिंग के वक्त विमान में तकनीकी खराबी आई, जिसके बाद बारामती एयरस्ट्रिप के पास ये हादसे का शिकार हो गया. सूत्रों के अनुसार विमान में सवार 6 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिसमें अजीत पवार भी शामिल हैं. हादसा इतना गंभीर था कि विमान का पिछला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. इस दर्दनाक घटना के बाद एक बार फिर लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर प्लेन में कौन सी सीट सबसे सुरक्षित होती है और क्रैश में जिंदा बचने के चांस कितने होते हैं.

प्लेन क्रैश में जिंदा बचने के कितने होते हैं चांस

एविएशन एक्सपर्ट्स और पुराने हादसों के डेटा बताते हैं कि प्लेन क्रैश हमेशा जानलेवा नहीं होते. कई इंटरनेशनल रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 90 प्रतिशत विमान हादसों में यात्री किसी न किसी रूप में बच जाते हैं. इसका मतलब ये है कि हादसे की स्थिति, टक्कर की तीव्रता और समय पर रेस्क्यू बहुत मायने रखता है. टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान होने वाले हादसों में सर्वाइवल चांस कम्पेरेटिवली ज्यादा होते हैं.

प्लेन में कौन सी सीट मानी जाती है सबसे सुरक्षित

स्टडीज के अनुसार प्लेन का पिछला हिस्सा यानी रियर सेक्शन सबसे सुरक्षित माना जाता है. खासतौर पर विंग्स के पीछे की सीटों पर बैठने वाले यात्रियों के बचने की संभावना ज्यादा पाई गई है. इसका कारण ये है कि विमान का ये हिस्सा स्ट्रक्चर के लिहाज से ज्यादा मजबूत होता है और टक्कर का असर यहां दूसरे जगहों की तुलना में कम पड़ता है.

इमरजेंसी एग्जिट वाली सीट का क्या है फायदा

इमरजेंसी एग्जिट के पास बैठने वाले यात्रियों को क्रैश या आग लगने की स्थिति में जल्दी बाहर निकलने का मौका मिल जाता है. इससे जिंदा बचने के चांस काफी हद तक बढ़ जाते हैं. हालांकि इन सीटों पर बैठने के लिए फिजिकली फिट होना जरूरी माना जाता है.

आगे की सीटों पर बैठना कितना सुरक्षित

प्लेन का फ्रंट सेक्शन यानी कॉकपिट के पास की सीटें आमतौर पर ज्यादा जोखिम वाली मानी जाती हैं. ज्यादातर हादसों में सबसे पहला झटका इसी हिस्से को लगता है. ऐसे में यहां बैठे यात्रियों को गंभीर चोट लगने की संभावना ज्यादा होती है.

सिर्फ सीट नहीं, सतर्कता भी है जरूरी

एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर्फ सही सीट चुनना ही काफी नहीं होता. सीट बेल्ट लगाए रखना, सेफ्टी इंस्ट्रक्शन ध्यान से सुनना और इमरजेंसी में घबराए बिना सही फैसला लेना भी जिंदा बचने के चांस को काफी बढ़ा देता है. अजीत पवार के विमान हादसे ने एक बार फिर हवाई सफर की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

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