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6 बार फेल होने पर भी नहीं मानी हार, 40 की उम्र में बनीं IAS अफसर, निसा की कहानी देगी जोरदार मोटिवेशन

केरल की निसा उन्नीराजन ने UPSC में 6 बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी. मां, नौकरी और सेहत की चुनौतियों के बीच उन्होंने 40 साल की उम्र में IAS बनकर दिखाया.

6 बार फेल होने पर भी नहीं मानी हार, 40 की उम्र में बनीं IAS अफसर, निसा की कहानी देगी जोरदार मोटिवेशन
निसा को सुनने में गंभीर दिक्कत थी. आमतौर पर लोग इसे बड़ी रुकावट मानते, लेकिन उन्होंने इसे अपनी पहचान नहीं बनने दिया.

Motivational story : जिंदगी में एक बार फेल होना ही लोगों का हौसला तोड़ देता है, लेकिन केरल की निसा उन्नीराजन ने असफलता को अपनी ताकत बना लिया. UPSC जैसी कठिन परीक्षा में उन्हें एक-दो नहीं, पूरे 6 बार नाकामी मिली. हर रिजल्ट के बाद निराशा हाथ लगी, लेकिन उन्होंने अपने-सपने को मरने नहीं दिया. उम्र बढ़ रही थी, जिम्मेदारियां भी थीं, फिर भी उन्होंने खुद से एक वादा किया कि मंजिल मिले बिना रुकना नहीं है. यही जिद उन्हें भीड़ से अलग बनाती है.

मां भी, नौकरी भी और रातों की पढ़ाई भी

निसा की जिंदगी आसान नहीं थी. वो दो बेटियों की मां थीं, घर की जिम्मेदार सदस्य थीं और एक प्रोफेशनल नौकरी भी करती थीं. उनकी सुबह घर के काम और बच्चों की तैयारी से शुरू होती थी, फिर पूरा दिन ऑफिस में निकल जाता था. थकान के बावजूद जब-सब सो जाते, तब उनकी असली मेहनत शुरू होती. रात की खामोशी में वो किताबों के साथ बैठतीं और अपने सपने को थोड़ा और करीब लातीं. ये सिलसिला सालों तक चलता रहा.

सेहत ने रोका, हौसले ने आगे बढ़ाया

निसा को सुनने में गंभीर दिक्कत थी. आमतौर पर लोग इसे बड़ी रुकावट मानते, लेकिन उन्होंने इसे अपनी पहचान नहीं बनने दिया. उन्होंने उन अफसरों की कहानियां पढ़ीं, जिन्होंने मुश्किल हालात में सफलता पाई थी. उन्हें यकीन हो गया कि अगर दूसरे कर सकते हैं तो वो भी कर सकती हैं. ये सोच उनका सबसे बड़ा सहारा बनी.

परिवार बना मजबूत ढाल

इस सफर में निसा अकेली नहीं थीं. उनके पति अरुण और परिवार ने हर कदम पर साथ दिया. घर की जिम्मेदारियां बांटी गईं, ताकि वो बिना तनाव पढ़ाई कर सकें. उनका हौसला बढ़ाया गया, गिरने पर संभाला गया. निसा खुद मानती हैं कि ये सफलता सिर्फ उनकी नहीं, पूरे परिवार की है.

सातवां प्रयास बना सुनहरा मोड़

लगातार 6 असफलताओं के बाद भी निसा नहीं रुकीं. आखिरकार सातवें प्रयास में साल 2024 में उन्होंने UPSC सिविल सर्विस परीक्षा पास कर ली. उन्हें ऑल इंडिया रैंक 1000 मिली. 40 साल की उम्र में उन्होंने साबित कर दिया कि सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती. आज वो एक IAS अफसर हैं और हजारों लोगों के लिए उम्मीद की मिसाल बन चुकी हैं.

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