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IAS Kinjal Singh Success Story: पिता का फर्जी एनकाउंटर, मां को कैंसर... UPSC में 25वीं रैंक लाने वालीं जांबाज IAS अफसर किंजल सिंह की कहानी

IAS Struggle to Success Story: IAS किंजल सिंह की कहानी संघर्ष और हिम्मत की मिसाल है. बचपन में पिता की हत्या और मां की कैंसर से मौत के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और UPSC में ऑल इंडिया 25वीं रैंक हासिल कर IAS बनीं.

IAS Kinjal Singh Success Story: पिता का फर्जी एनकाउंटर, मां को कैंसर... UPSC में 25वीं रैंक लाने वालीं जांबाज IAS अफसर किंजल सिंह की कहानी
IAS किंजल सिंह की कहानी

IAS Struggle to Success Story: जिंदगी कभी-कभी इतनी कठिन परीक्षाएं लेती है कि अच्छे-अच्छों के हौसले डगमगा जाता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो मुश्किलों को अपना रास्ता रोकने नहीं देते, बल्कि उन्हें अपनी ताकत बना लेते हैं. उत्तर प्रदेश कैडर की तेज-तर्रार IAS अधिकारी किंजल सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. किंजल के बचपन में ही पिता का साया छिन गया, कुछ सालों बाद मां की बीमारी ने जिंदगी को तोड़ दिया, लेकिन इन सबके बीच उन्होंने हार नहीं मानी और देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC में 25वीं रैंक हासिल कर दिखा दिया कि जुनून के आगे कुछ भी कठिन नहीं है. पढ़िए इस जांबांज अफसर की इंस्पायरिंग स्टोरी..

किंजल सिंह कौन हैं, कहां से हैं

किंजल सिंह उत्तर प्रदेश कैडर की एक तेज-तर्रार IAS अधिकारी हैं. उनका जन्म 5 जनवरी 1982 को बलिया जिले में हुआ था. उन्होंने BA, LLB और दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की और 2008 में UPSC में AIR 25 हासिल कर IAS बनीं. लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक अफसर की नहीं, बल्कि एक ऐसी बेटी की है जिसने जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई अकेले लड़ी.

ढाई महीने की उम्र में टूटा बचपन

किंजल सिंह की जिंदगी की शुरुआत ही बहुत दर्दनाक रही. जब वह सिर्फ कुछ महीने की थीं, तभी उनके DSP पिता की हत्या हो गई. कहा जाता है कि यह मामला एक फर्जी एनकाउंटर से जुड़ा था, जिसने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी. छोटी-सी उम्र में पिता का साया छिन जाना किसी भी बच्चे के लिए सबसे बड़ा झटका होता है, लेकिन यहीं से उनकी जिंदगी की असली लड़ाई शुरू हुई.

मां की 31 साल लंबी लड़ाई और फिर दुखद अंत

पिता की मौत के बाद उनकी मां ने इंसाफ की लड़ाई शुरू की. सालों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर चलते रहे, लेकिन न्याय नहीं मिल पाया. इस बीच साल 2004 में उनकी मां को कैंसर हो गया और लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया. इस घटना ने किनजल और उनकी बहन प्रांजल को पूरी तरह तोड़ दिया था, लेकिन यहीं से उन्होंने एक फैसला लिया. मां के जाने के बाद किंजल और उनकी बहन ने तय किया कि अब वे अपने पिता को इंसाफ दिलाएंगी और इसके लिए उन्होंने UPSC का रास्ता चुना. यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. लगातार मेहनत और हौसले के साथ उन्होंने तैयारी की और 2008 में अपने दूसरे प्रयास में किंजल ने ऑल इंडिया 25वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया. उनकी बहन प्रांजल ने भी UPSC क्रैक कर IRS अधिकारी बनकर सफलता हासिल की.

31 साल बाद मिला इंसाफ

किंजल सिंह की UPSC सफलता सिर्फ करियर की जीत नहीं थी, बल्कि एक लंबे संघर्ष का अंत भी था. साल 2013 में उनके पिता के मामले में 18 आरोपियों को सजा मिली. यह सिर्फ एक कानूनी जीत नहीं थी, बल्कि एक बेटी के जिद और संघर्ष की जीत थी, जिसने कभी हार नहीं मानी.

एक IAS अफसर से ज्यादा युवाओं के लिए मोटिवेशन

किंजल सिंह ने अपने करियर में कई अहम पदों पर काम किया है और हमेशा अपनी सख्त और एक्टिव कार्यशैली के लिए जानी जाती रही हैं. उन्होंने कई जिलों में प्रशासन संभाला और हर जगह अपने काम से पहचान बनाई. लेकिन सबसे बड़ी पहचान उनकी यही है कि वे एक ऐसी शख्सियत हैं जिसने खुद के दर्द को ताकत में बदल दिया. उनकी कहानी हर युवा को इंस्पायर करती है, क्योंकि इसमें कोई आसान रास्ता नहीं था. वह कहती हैं कि जिंदगी चाहे जितनी भी मुश्किल क्यों न हो, अगर इरादा मजबूत हो तो सफलता मिल ही जाती है.

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