आईआईटी में पढ़ने का सपना हर साल लाखों स्टूडेंट देखते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनकी मंजिल रास्ते में बदल जाती है. ओडिशा के एक छोटे शहर से आने वाले रितेश अग्रवाल की कहानी कुछ ऐसी ही है. उन्होंने आईआईटी की तैयारी की, कॉलेज में दाखिला भी लिया, लेकिन जल्द ही समझ गए कि उनकी दिलचस्पी किसी नौकरी से ज्यादा कुछ नया बनाने में है. यही सोच आगे चलकर OYO Rooms जैसे बड़े स्टार्टअप की वजह बनी. आज उनका नाम भारत के सबसे पॉपुलर यंग बिजनेसमैन में लिया जाता है और उनकी सफलता की कहानी लाखों युवाओं को बड़ा सोचने का हौसला देती है.
ओडिशा के छोटे शहर से शुरू हुआ सफर
रितेश अग्रवाल का जन्म ओडिशा के बिसम कट्टक में हुआ था. उनका परिवार साधारण था और बचपन से ही उन्हें बिजनेस और नए आइडियाज में दिलचस्पी थी. जहां ज्यादातर बच्चे सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देते हैं, वहीं रितेश कम उम्र में ही कारोबार की दुनिया को समझने की कोशिश करने लगे थे. यही क्यूरियोसिटी आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी.
IIT की तैयारी के दौरान बदला सपना
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद रितेश राजस्थान के कोटा पहुंचे, जहां उन्होंने आईआईटी की तैयारी शुरू की. लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ उनका झुकाव स्टार्टअप और बिजनेस की तरफ बढ़ने लगा. वे अलग-अलग फाउंडर्स से मिलते, बिजनेस मॉडल समझते और नए आइडियाज पर काम करते थे. कुछ समय बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनका असली इंट्रेस्ट अपना कुछ बनाने में है. इसके बाद उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ दी और स्टार्टअप पर पूरा ध्यान लगाया.
एक परेशानी से मिला बड़ा बिजनेस आइडिया
यात्रा के दौरान रितेश ने देखा कि कम बजट वाले होटलों में भरोसे की बड़ी समस्या है. कहीं कमरे साफ नहीं होते थे तो कहीं ऑनलाइन दिखाई गई तस्वीरें और असली होटल में बड़ा अंतर होता था. इसी समस्या ने उनके मन में सवाल पैदा किया कि कम कीमत में भरोसेमंद होटल क्यों नहीं मिल सकते. यही सवाल आगे चलकर OYO की नींव बना.
Oravel Stays से OYO Rooms तक
साल 2012 में रितेश ने Oravel Stays नाम का प्लेटफॉर्म शुरू किया. शुरुआत में यह बजट होटलों की लिस्टिंग करता था. बाद में उन्होंने बिजनेस मॉडल बदला और 2013 में इसे OYO Rooms के रूप में आगे बढ़ाया. कंपनी ने छोटे होटल्स के साथ साझेदारी कर उनकी सुविधाओं और सेवाओं को बेहतर बनाया. इस मॉडल को लोगों ने खूब पसंद किया और OYO तेजी से बढ़ने लगी.
चुनौतियों के बीच मिली बड़ी पहचान
रितेश को थियल फेलोशिप भी मिली, जिसके जरिए उन्हें अपना स्टार्टअप आगे बढ़ाने का मौका मिला. बाद में कई बड़े इन्वेस्टर्स ने कंपनी में इन्वेस्ट किया. OYO भारत से निकलकर दूसरे देशों तक पहुंची. हालांकि कंपनी को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन रितेश ने हार नहीं मानी. आज वे Shark Tank India में नए स्टार्टअप्स को गाइड करते भी नजर आते हैं.
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