How Many Indian Labour In Burj Khalifa Construction : हाल ही में बुर्ज खलीफा बनाने वाली कंपनी एमार (Emaar) के सर्वेसर्वा मोहम्मद अलाब्बर ने भारतीयों के जज्बे को सलाम किया है. उन्होंने एक समिट के दौरान बताया कि भारतीयों का वर्क एथिक्स और समर्पण दुनिया में बेमिसाल है. अलाब्बर बताते हैं कि अगर आप रात के 1 बजे भी किसी हिंदुस्तानी को काम के लिए फोन करेंगे, तो वह पूरी ऊर्जा के साथ तैयार मिलता है. टैलेंट पूरी दुनिया में होगा, लेकिन भारतीयों जैसा अनुशासन और हार्ड वर्क मिलना नामुमकिन है." आपको बता दें कि दुनिया की सबसे बड़ी इमारत बुर्ज खलीफा का इनॉगरेशन 2010 में हुआ था. 828 मीटर ऊंची जिस इमारत को देखकर दुनिया दांतों तले उंगलियां दबा लेती है, क्या आप जानते हैं कि इस कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा हाथ भारतीय मजदूरों और पेशेवरों का है? अगर आपको जवाब ''ना'' है तो आइए जानते हैं बुर्ज खलीफा में कितने मजदूर शामिल हुए थे.
कितने भारतीय मजदूर शामिल थे?
बुर्ज खलीफा का निर्माण साल 2004 में शुरू हुआ था. उस समय के आधिकारिक आंकड़ों और निर्माण अधिकारियों के अनुसार, इस मेगा-प्रोजेक्ट के चरम पर लगभग 12,000 से 14,000 मजदूर रोजाना काम कर रहे थे. चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 50 प्रतिशत से अधिक यानी आधे से ज्यादा मजदूर भारत से थे.
सिर्फ मजदूर ही नहीं, बल्कि भारत के इंजीनियरों और आर्किटेक्ट्स ने भी इसके डिजाइन और स्ट्रक्चर को मजबूत बनाने में दिन-रात एक कर दिया था. यूएई की कुल वर्कफोर्स में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 40% है, और बुर्ज खलीफा इसका सबसे चमकता हुआ उदाहरण है.
भारत के इन गुमनाम नायकों ने तपती धूप और मुश्किल हालातों में काम करके यह साबित कर दिया कि जब बात मेहनत और भरोसे की आती है, तो दुनिया भारत की तरफ देखती है. 4 जनवरी 2010 को जब इसका उद्घाटन हुआ, तो वह सिर्फ दुबई की जीत नहीं थी, बल्कि उन हजारों भारतीय हाथों की भी जीत थी जिन्होंने इसे मुमकिन कर दिखाया था.
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