बॉडी बिल्डिंग का शौक रखने वालों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने सरकारी और अर्ध-सरकारी नौकरियों में खेल कोटे (Sports Quota) के तहत बॉडीबिल्डिंग को शामिल करने का आदेश दिया है. अदालत ने निर्देश दिया है कि खेल कोटे के 5 प्रतिशत आरक्षण के लिए बॉडीबिल्डिंग को एक पात्र खेल माना जाए. जस्टिस मुकुलिका जवलकर और जस्टिस नंदेश देशपांडे की बेंच ने याचिकाकर्ता दीपक पवार की याचिका पर यह फैसला सुनाया.
चार हफ्ते का दिया वक्त
कोर्ट ने कहा कि 2016 की राज्य नीति से बॉडीबिल्डिंग को हटाना मनमाना और संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन था. कोर्ट का स्पष्ट मत है कि बॉडीबिल्डिंग मूल रूप से जिम्नास्टिक्स की एक उपशाखा है, इसलिए यह खेल कोटे के लिए पूरी तरह पात्र है. अदालत ने सरकार को 1 जुलाई 2016 के शासन निर्णय GR में सुधार करने और चार सप्ताह के भीतर इसमें बॉडीबिल्डिंग को शामिल करने का आदेश दिया है.
बॉडीबिल्डिंग को हटाया गया
सुनवाई के दौरान दलील दी गई कि 2005 की नीति में बॉडीबिल्डिंग शामिल था, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि पात्रता के मानदंडों को केवल ओलंपिक, एशियाई या राष्ट्रमंडल खेलों तक सीमित रखना सही नहीं है. अदालत ने गौर किया कि केंद्र सरकार की तरफ से बॉडीबिल्डर्स को 'अर्जुन पुरस्कार' दिया जाता है, जो इस खेल की राष्ट्रीय मान्यता को सिद्ध करता है.
कोर्ट ने बॉडीबिल्डिंग को आरक्षण से बाहर रखने को भेदभावपूर्ण बताते हुए 24 अक्टूबर 2018 और 21 मार्च 2023 के सरकारी पत्रों को रद्द करने का निर्देश दिया है. ये फैसला उन लोगों के लिए काफी मायने रखता है, जो बॉडीबिल्डिंग में अपना करियर देखना चाहते हैं.
पिछले लंबे वक्त से इस पेशे में काम करने वाले लोग इसकी मांग कर रहे थे. उनका कहना था कि बाकी खेलों की तरह बॉडीबिल्डिंग को भी स्पोर्ट्स कोटे में शामिल किया जाना चाहिए, जिससे इस काम में आने से पहले किसी को बार-बार सोचना न पड़े.
(इनपुट- प्रवीण मुधोलकर)
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