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बिहार में 5 हजार कॉलेज टीटर्स की बहाली पर कानूनी संकट: 211 डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई शुरू होने में हो सकती है देरी

बिहार के 211 डिग्री कॉलेजों में 5 हजार शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही कानूनी विवादों में घिरती नजर आ रही है. नई नियमावली से नाराज अभ्यर्थी हाई कोर्ट जाने की तैयारी में हैं, जिससे नए सत्र की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है.

बिहार में 5 हजार कॉलेज टीटर्स की बहाली पर कानूनी संकट: 211 डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई शुरू होने में हो सकती है देरी
अगर मामला अदालत पहुंचता है, तो बहाली की प्रक्रिया में देरी हो सकती है.

Bihar Teacher Recruitment 2026 : बिहार सरकार राज्य के 211 डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कराने की तैयारी कर रही है. इसके लिए करीब 5 हजार असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है. लेकिन बहाली शुरू होने से पहले ही इस पर कानूनी संकट के बादल मंडराने लगे हैं. नई बहाली नियमावली से नखुश कई अभ्यर्थी अब हाई कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं. अगर मामला अदालत पहुंचता है और वहां से किसी तरह की रोक लगती है, तो पूरी नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.

डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की कमी

बिहार में पिछले कई सालों से सरकारी डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी है. बड़ी संख्या में पद खाली हैं. कई कॉलेजों में नियमित शिक्षक नहीं होने के कारण पढ़ाई प्रभावित होती रही है. कई जगह अतिथि शिक्षकों के भरोसे कक्षाएं चल रही हैं. इसी कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने 211 नए डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति का फैसला लिया था.

कम से कम एक डिग्री कॉलेज हो

सरकार का उद्देश्य है कि हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक डिग्री कॉलेज हो, ताकि छात्रों, खासकर ग्रामीण इलाकों के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों में न जाना पड़े. पिछले कुछ सालों में सरकार ने कई नए कॉलेजों के भवन भी तैयार कराए हैं. लेकिन टीचर्स की नियुक्ति नहीं होने के कारण इनमें नियमित पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी.

इसी को देखते हुए सरकार ने करीब 5 हजार असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए नई नियमावली बनाई. इस नियमावली के आधार पर बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से बहाली की तैयारी चल रही है. लेकिन नियमावली जारी होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने इस पर सवाल उठाए हैं.

क्यों नाराज हैं अभ्यर्थी

अभ्यर्थियों का कहना है कि नई नियमावली के कुछ प्रावधान उनके हित में नहीं हैं. उनका आरोप है कि इससे कई योग्य उम्मीदवारों को नुकसान होगा. इसी वजह से कई अभ्यर्थी अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं. उनका कहना है कि पहले नियमावली की खामियों को दूर किया जाए, उसके बाद ही नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए.

अगर मामला अदालत पहुंचता है, तो बहाली की प्रक्रिया में देरी हो सकती है. इसका सीधा असर 211 डिग्री कॉलेजों पर पड़ेगा. जिन कॉलेजों में इस शैक्षणिक सत्र से पढ़ाई शुरू कराने की योजना है, वहां समय पर शिक्षक नहीं मिल पाएंगे. ऐसे में छात्रों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

शिक्षा के जानकारों का कहना है कि बिहार में पहले भी कई बड़ी बहालियां अदालत में चुनौती मिलने के कारण देर से पूरी हुई हैं. इसलिए सरकार इस बार चाहती है कि नियुक्ति प्रक्रिया बिना किसी कानूनी रुकावट के पूरी हो. वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर नियमावली में गड़बड़ी है, तो उसे पहले ठीक किया जाना चाहिए.

विपक्ष उठा रही है सवाल

राजनीतिक रूप से भी यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विपक्ष लगातार सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाता रहा है. अगर यह बहाली अदालत में फंसती है, तो विपक्ष इसे सरकार की तैयारी में कमी बताएगा. वहीं सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति कर कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कराना है.

अगर ये मामला कानूनी विवाद में फास्ट है, तो 5 हजार शिक्षकों की बहाली के साथ-साथ 211 डिग्री कॉलेजों में नियमित पढ़ाई शुरू होने का सपना भी कुछ समय के लिए टल सकता है. इससे सबसे ज्यादा असर उन हजारों छात्रों पर पड़ेगा, जो इन कॉलेजों के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं.

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