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सिपाही को मिली IPS अंशिका वर्मा को सलामी नहीं ठोकने की सजा, जानें क्या होते हैं इसके नियम

Police Salute Rules: बरेली में एसपी साउथ अंशिका वर्मा को सलामी न देने पर एक नए सिपाही को 15 दिन की अतिरिक्त ड्रिल ट्रेनिंग के लिए पुलिस लाइन भेजा गया. इसके बाद पुलिस में सलामी देने के नियम और ट्रेनिंग चर्चा में आ गए हैं.

सिपाही को मिली IPS अंशिका वर्मा को सलामी नहीं ठोकने की सजा, जानें क्या होते हैं इसके नियम
सलामी देने के नियम क्या होते हैं?

Police Salute Rules: यूपी के बरेली में इन दिनों एक मामला काफी चर्चा में है. साउथ एसपी अंशिका वर्मा के निरीक्षण के दौरान एक नए सिपाही ने उन्हें सलामी नहीं दी. इसके बाद उस कॉन्स्टेबल को 15 दिन की अतिरिक्त ड्रिल और सलामी ट्रेनिंग के लिए पुलिस लाइन भेज दिया गया. सोशल मीडिया पर इसे सजा बताया जा रहा है, लेकिन पुलिस विभाग का कहना है कि यह अनुशासन और ट्रेनिंग का हिस्सा है. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर पुलिस में सलामी देना कितना जरूरी होता है. किसे सलामी देनी होती है और इसे लेकर ट्रेनिंग में जवानों को क्या सिखाया जाता है. आइए पुलिस मैनुअल के अनुसार इस नियम को समझते हैं.

क्या है पूरा मामला

9 मई को एसपी साउथ अंशिका वर्मा आंवला थाने के निरीक्षण पर पहुंचीं. बताया जा रहा है कि उस समय वे वर्दी में नहीं थीं, लेकिन सरकारी गाड़ी और स्टाफ उनके साथ मौजूद था. थाने के गेट पर नए सिपाही परम सिंह की ड्यूटी लगी थी. आरोप है कि उन्होंने एसपी को सलामी नहीं दी. इस पर नाराजगी जताई गई और बाद में सिपाही को 15 दिन की अतिरिक्त ट्रेनिंग के लिए पुलिस लाइन भेजने का आदेश हुआ. सिपाही ने सफाई में कहा कि सादे कपड़ों में होने की वजह से वह अधिकारी को पहचान नहीं पाया. हालांकि विभाग ने इसे ट्रेनिंग की कमी मान रहा है.

पुलिस में सलामी क्यों दी जाती है

पुलिस या सेना में सलामी सिर्फ हाथ उठाने की प्रक्रिया नहीं होती. यह सम्मान, अनुशासन और ड्यूटी के प्रति सम्मान दिखाने का तरीका माना जाता है. सलामी यह भी दिखाती है कि सामने वाला व्यक्ति सम्मान की भावना से खड़ा है और उसके हाथ में कोई खतरा या हथियार नहीं है. यही वजह है कि पुलिस ट्रेनिंग में इसे बहुत गंभीरता से सिखाया जाता है.

पुलिस ट्रेनिंग में सैल्यूट को लेकर क्या सिखाया जाता है

पुलिस ट्रेनिंग में 'ड्रिल' सबसे अहम हिस्सों में से एक होती है. नए सिपाहियों को शुरुआत से ही सिखाया जाता है कि सामने से सलामी कैसे देनी है, दाएं और बाएं तरफ देखकर सलामी कैसे करनी है, सावधान और विश्राम की सही पोजिशन क्या होती है, हाथ का एंगल कितना होना चाहिए और सीनियर ऑफिसर के सामने कैसे खड़ा होना है. ट्रेनिंग के दौरान बार-बार इसकी प्रैक्टिस कराई जाती है, ताकि गलती की गुंजाइश कम रहे.

पुलिस में सलामी देने का सही तरीका क्या है

1. पुलिस मैन्युअल के मुताबिक, सलामी आमतौर पर दाहिने हाथ से दी जाती है.

2. तर्जनी उंगली वाला हिस्सा दाहिनी भौंह या टोपी के किनारे तक लाया जाता है.

3. उंगलियां सीधी रहती हैं.

4. हथेली बाहर की ओर रहती है.

5. बांह और कलाई सीधी लाइन में होनी चाहिए.

6. अगर कोई जवान दाहिने हाथ से सलामी नहीं दे सकता, तो कुछ खास स्थिति में बाएं हाथ का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.

किन अधिकारियों को सलामी देनी होती है

पुलिस फोर्स में अपने से सीनियर अधिकारियों को सलामी देना नियम का हिस्सा है. इसमें डीजीपी, एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसपी, एएसपी और सीओ शामिल हैं. इसके अलावा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, न्यायाधीश और कई VVIP को भी प्रोटोकॉल के तहत सलामी दी जाती है.

क्या बिना वर्दी के भी सलामी जरूरी होती है

यह स्थिति पर निर्भर करता है. आमतौर पर सलामी वर्दी और कैप के साथ दी जाती है, लेकिन अगर अधिकारी ड्यूटी पर हों और पहचान साफ हो, तो सम्मान दिखाना जरूरी माना जाता है. हालांकि, कई बार नए जवान पहचान नहीं कर पाते, इसलिए ऐसे मामलों में अतिरिक्त ट्रेनिंग दी जाती है.

क्या ट्रैफिक पुलिस को भी सलामी देनी पड़ती है

ट्रैफिक ड्यूटी के दौरान नियम थोड़े अलग होते हैं. सड़क पर ट्रैफिक संभालते समय जवानों को हर वक्त सलामी देने की जरूरत नहीं होती है. ऐसे समय वे 'सावधान' की मुद्रा में सम्मान दिखा सकते हैं.

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