भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों का मुआवजा बढ़ेगा ? SC ने सुरक्षित रखा फैसला

Bhopal Gas Tragedy: भोपाल गैस पीड़ितों को 7400 करोड़ रुपए का अतिरिक्त मुआवजा दिलवाने के लिए केंद्र सरकार ने क्यूरेटिव याचिका दाखिल की थी.

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सरकार चाहती है कि यूनियन कार्बाइड गैस कांड पीड़ितों को और पैसे दे. 
नई दिल्ली:

1984 भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए मुआवजे की राशि बढ़ाने के लिए केंद्र की क्यूरेटिव याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने दोनों पक्षों की बातों को सुनते हुए फैसला सुरक्षित रखा. पांच जजों के संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा है. 

यूनियन कार्बाइड के साथ अपने समझौते को फिर से खोलने के लिए केंद्र ने पूरे मामले में क्यूरेटिव याचिका दाखिल की है. तीन दिनों तक लगातार सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है.

बता दें कि भोपाल गैस पीड़ितों को 7400 करोड़ रुपए का अतिरिक्त मुआवजा दिलवाने के लिए केंद्र सरकार ने क्यूरेटिव याचिका दाखिल की थी. सरकार चाहती है कि यूनियन कार्बाइड गैस कांड पीड़ितों को ये पैसा दे. 

वहीं, यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वो 1989 में हुए समझौते के अलावा भोपाल गैस पीड़ितों को एक भी पैसा नहीं देगा. इस मामले में 20 सितंबर, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार से पूछा था कि पीड़ितों का मुआवजा बढ़ाने को लेकर दाखिल क्यूरेटिव याचिका पर उसका स्टैंड क्या है? 

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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि केंद्र का 2010 में तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार द्वारा दाखिल याचिका पर क्या रुख है? केंद्र का डाउ केमिकल्स से गैस आपदा के खिलाफ 1.2 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त मुआवजे के लिए दायर क्यूरेटिव याचिका पर क्या विचार है?

बेंच में जस्टिस एस के कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस एएस ओक, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जेके माहेश्वरी शामिल हैं. दरअसल, केंद्र सरकार ने 2011 में सुप्रीम कोर्ट में भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों के लिए अतिरिक्त मुआवजे के लिए क्यूरेटिव याचिका दाखिल की थी.

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केंद्र ने कहा है कि अमेरिका की यूनियन कार्बाइड कंपनी, जो अब डॉव केमिकल्स के स्वामित्व में है को 7413 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने के निर्देश दिए जाए. दिसंबर 2010 में दायर याचिका में शीर्ष अदालत के 14 फरवरी, 1989 के फैसले की फिर से जांच करने की मांग की गई है, जिसमें 470 मिलियन अमेरिकी डॉलर (750 करोड़ रुपये) का मुआवजा तय किया गया था. 

केंद्र सरकार के अनुसार, पहले का समझौता मृत्यु, चोटों और नुकसान की संख्या पर गलत धारणाओं पर आधारित था, और इसके बाद के पर्यावरणीय नुकसान को ध्यान में नहीं रखा गया. ये मुआवजा 3,000 मौतों और 70,000 घायलों के मामलों के पहले के आंकड़े पर आधारित थाय क्यूरेटिव पिटीशन में मौतों की संख्या 5,295 और घायलों का आंकड़ा 527,894 बताया गया है.

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