लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर पर नेवी चीफ के बयान पर क्यों मचा है बवाल? क्या है पूरा मामला जान लीजिए

सूत्रों ने बताया कि एलयूएच को लेकर कभी कोई औपचारिक नेवल ट्रायल या मूल्यांकन नहीं हुआ. जब किसी प्लेटफॉर्म की बुनियादी बनावट ही नौसेना की जरूरतों से मेल नहीं खाती, तो फिर उसके परीक्षण का कोई औचित्य नहीं होता.

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  • नौसेना प्रमुख के बयान को गलत समझा गया, क्योंकि एलयूएच हेलिकॉप्टर कभी नौसेना के लिए डिजाइन नहीं किया गया था
  • एलयूएच सिंगल-इंजन हेलिकॉप्टर है, जो नौसेना की तकनीकी आवश्यकताओं और सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरता
  • नौसेना के लिए ट्विन-इंजन यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की जरूरत है, जो समुद्र में सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित कर सके
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नई दिल्ली:

लाइट यूटीलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) को लेकर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी के बयान पर इन दिनों खासी चर्चा है . कई जगहों पर इसी बयान के आधार पर यह दावा किया गया है कि नौसेना ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड  के लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर  को खारिज कर दिया है. हालांकि जब एनडीटीवी ने इसको लेकर नौसेना से सम्पर्क किया तो पता चला कि नेवी चीफ के बयान को गलत तरीके से समझा और पेश किया गया. सूत्रों का कहना है कि एलयूएच को कभी भी नौसेना के लिए बनाया ही नहीं गया था. यह हेलिकॉप्टर तो भारतीय थल सेना और वायु सेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है . वह भी ऊंचाई वाले और पहाड़ी इलाकों में संचालन के लिए इसके विशेष तौर से बनाया गया हैं इसलिए एलयूएच के नौसेना में शामिल होने या न होने का सवाल ही नहीं उठता.

सच्चाई यह है कि नौसेना प्रमुख का यह कहना है कि जहाजों पर उपयोग होने वाले यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों की कमी को दूर करने के लिए भारतीय नौसेना एचएएल के साथ यूटिलिटी हेलीकॉप्टर मरीन  के डिजाइन और विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है. नौसेना के लिए तय तकनीकी जरूरतों को एलयूएच पूरा नहीं करता है. इसलिए इसे खरीद के लिए विचार में नहीं लिया जा रहा है. यह सही है कि नौसेना की जरूरतें इससे बिल्कुल अलग हैं. वैसे भी समुद्र के ऊपर उड़ान के दौरान सुरक्षा सबसे अहम होती है. इसी कारण नौसेना को ट्विन-इंजन यानी दो इंजन वाला हेलिकॉप्टर चाहिए. यदि समुद्र के ऊपर उड़ते समय एक इंजन में खराबी आ जाए, तो दूसरा इंजन हेलिकॉप्टर को सुरक्षित रख सकता है. वही जबकि एलयूएच एक सिंगल-इंजन हेलिकॉप्टर है, जो नौसेना की क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स पर खरा नहीं उतरता.

सूत्रों ने बताया कि एलयूएच को लेकर कभी कोई औपचारिक नेवल ट्रायल या मूल्यांकन नहीं हुआ. जब किसी प्लेटफॉर्म की बुनियादी बनावट ही नौसेना की जरूरतों से मेल नहीं खाती, तो फिर उसके परीक्षण का कोई औचित्य नहीं होता. सूत्रों का यह भी कहना है कि नेवी चीफ का बयान तकनीकी संदर्भ में था, न कि किसी औपचारिक रिजेक्शन के रूप में. फिलहाल भारतीय नौसेना में करीब 50 चेतक हेलिकॉप्टर ऑपरेट कर रही है . इनमें से ज़्यादातर अपनी तकनीकी उम्र पूरी कर चुके हैं. आज इनकी जगह नौसेना को एक ऐसे नए हेलिकॉप्टर की जरूरत है, जो पूरी तरह समुद्री अभियानों के लिए डिजाइन किया गया हो.

नौसेना की इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड  एक नए प्लेटफॉर्म  यूटिलिटी हेलिकॉप्टर मरीन को विकसित कर रहा है. अभी  यह एक डिजाइन एंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट है, जिसे खास तौर पर नौसेना के लिए बनाया जा रहा है. इसमें ट्विन-इंजन कॉन्फिगरेशन, एंटी-कोरोजन कोटिंग, मजबूत लैंडिंग गियर, फ्लोटेशन सिस्टम, नेवल सेंसर और हथियारों का इंटीग्रेशन, तथा रोटर और टेल फोल्डिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं होंगी. इससे यह हेलिकॉप्टर युद्धपोतों के छोटे हैंगर में आसानी से फिट हो सकेगा और खुले समुद्र में सुरक्षित ऑपरेशन कर पाएगा.एचएएल के मुताबिक  यूटीलिटी हेलीकॉप्टर मरीन का पहला प्रोटोटाइप तैयार हो चुका है . सब ठीक रहा तो इसकी पहली उड़ान 2025-26 वित्तीय वर्ष में होने की संभावना है. इसके बाद कई राउंड के कड़े परीक्षण होंगे . इसके बाद नौसेना  यूजर ट्रायल करेगी  ताकि यह हेलिकॉप्टर नौसेना की सभी ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा कर सके.

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