भारत के इतिहास का सबसे बड़ा ट्रेड डील फाइनल हो गया है! मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (India-EU Free Trade Agreement) की घोषणा की.भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ ये समझौता दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए आज की सबसे बड़ी खबर है. इसे भारत के वैश्विक व्यापार संबंधों में बड़ी रणनीतिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है.
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक भारत और यूरोपीय संघ चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के 25 प्रतिशत के बराबर हैं और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई हिस्सा हैं. इस प्रकार, दो बड़ी, अर्थव्यवस्थाओं के एक साथ जुड़ने से व्यापार और निवेश के अभूतपूर्व अवसर पैदा होंगे.
भारत के 90.7% निर्यात को कवर करने वाली 70.4% टैरिफ लाइनों से कपड़ा, चमड़ा और जूते, चाय, कॉफी, मसाले, खेल के सामान, खिलौने, रत्न और आभूषण और कुछ समुद्री उत्पाद जैसे महत्वपूर्ण श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए तत्काल शुल्क हटा दिया जाएगा.कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पादों, रत्न और आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में 33 बिलियन अमरीकी डालर के निर्यात को एफटीए के अंतर्गत प्राथमिकता वाली पहुंच से फायदा होगा. भारत के निर्यात के 2.9% हिस्से को कवर करने वाली 20.3% टैरिफ लाइनों पर कुछ समुद्री उत्पादों, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, हथियारों और गोला-बारूद आदि के लिए 3 और 5 वर्षों के लिए शून्य शुल्क की सुविधा होगी.
प्रमुख श्रम-प्रधान क्षेत्र ( labour-intensive sectors) जैसे वस्त्र, परिधान, समुद्री उत्पाद, चमड़ा, जूते, रसायन, प्लास्टिक/रबर, खेल सामग्री, खिलौने, रत्न और आभूषण, जिनका कुल निर्यात 2.87 लाख करोड़ रुपये (33 अरब अमेरिकी डॉलर) से अधिक है, पर वर्तमान में यूरोपीय संघ में 4% से 26% तक आयात शुल्क लगता है. मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होने के साथ ही इन क्षेत्रों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा और इस प्रकार यूरोपीय संघ के बाजार में इनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी.
- ऑटोमोबाइल क्षेत्र में मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाने के लिए पारस्परिक बाजार पहुंच के साथ यथोचित उदारीकरण
- अनुकूल बाजार पहुंच से भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात के लिए दरवाजे खुलेंगे
- भारत में संवेदनशील कृषि उत्पादों और डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित रहेगी
- भविष्य के लिए तैयार मोबिलिटी फ्रेमवर्क से कुशल और अर्ध-कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार होगा
भारत द्वारा यूरोपीय संघ को दिया गया प्रस्ताव
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने EU को जो ऑफर दिया है उसके मुताबिक 49.6% टैरिफ लाइनों पर तत्काल शुल्क समाप्त कर दिया जाएगा; जबकि 39.5% टैरिफ लाइनों पर 5, 7 और 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से शुल्क समाप्त किया जाएगा.सरकारी आकड़ों के मुताबिक, यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है जिसमें वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ रहा है.
2024-25 में यूरोपीय संघ के साथ वस्तुओं में भारत का द्विपक्षीय व्यापार 11.5 लाख करोड़ रुपये (136.54 बिलियन अमेरिकी डॉलर) था जिसमें 6.4 लाख करोड़ रुपये (75.85 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का निर्यात और 5.1 लाख करोड़ रुपये (60.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का आयात किया जा रहा था. सेवा क्षेत्र में भारत-यूरोपीय संघ का व्यापार 2024 में 7.2 लाख करोड़ रुपये (83.10 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया.
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का संपन्न होना भारत के आर्थिक क्रियाकलापों और वैश्विक दृष्टिकोण के संबंध में निर्णायक उपलब्धि का प्रतीक है. यह विश्वसनीय, पारस्परिक रूप से लाभप्रद और संतुलित साझेदारी को सुरक्षित करने के लिए भारत के दृष्टिकोण का समर्थन करता है.
भारत ने 99 प्रतिशत से अधिक भारतीय निर्यात के लिए यूरोपीय संघ के व्यापारिक मूल्य के अनुसार अभूतपूर्व बाजार पहुंच सुनिश्चित किया है जो 'मेक इन इंडिया' पहल को भी बढ़ावा देता है. वस्तुओं के अतिरिक्त यह आवागमन के व्यापक ढांचे की सहायता से अति-महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताओं के लिए कुशल भारतीय पेशेवरों की निर्बाध आवाजाही को सक्षम करेगा. भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते में वस्तुओं, सेवाओं, व्यापार संबंधी समाधानों, उत्पत्ति संबंधी नियमों, सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा के साथ-साथ एसएमई और डिजिटल व्यापार जैसे उभरते क्षेत्र भी शामिल हैं.
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक ऑटोमोबाइल क्षेत्र में यथोचित और सावधानी से तैयार कोटा आधारित ऑटो उदारीकरण पैकेज न केवल यूरोपीय संघ के वाहन निर्माताओं को भारत में अपने मॉडल को उच्च मूल्य बैंड में पेश करने की अनुमति देगा बल्कि भविष्य में मेक इन इंडिया और भारत से निर्यात की संभावनाओं के द्वार भी खोलेगा. भारतीय उपभोक्ताओं को उच्च तकनीक वाले उत्पादों और अधिक प्रतिस्पर्धा से लाभ होगा. यूरोपीय संघ के बाजार में पारस्परिक बाजार पहुंच भारत में निर्मित ऑटोमोबाइल के लिए यूरोपीय संघ के बाजार तक पहुंचने के अवसर भी खोलेगी. भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र को भारत-यूरोपीय संघ FTA के अंतर्गत बढ़ावा मिलेगा जिससे भारतीय किसानों और कृषि उद्यमों के लिए एक समान अवसर तैयार होगा.
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