मणिपुर पर चर्चा से क्यों भागा विपक्ष, राज्यसभा में बरसीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री ने कहा कि इस बार भी उन्होंने (विपक्ष) मणिपुर के लोगों की भलाई के बारे में नहीं सोचा. आज जब एक अध्यादेश को विधेयक के रूप में लाकर उसे पारित करा कानून बनाने का कदम उठाया जा रहा है, विपक्ष इसका हिस्सा बनने के लिए सदन में मौजूद नहीं है.

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  • उन्होंने कहा कि विपक्ष मणिपुर के लोगों की भलाई के बारे में सोचने के बजाय केवल राजनीतिक प्रदर्शन कर रहा है
  • विपक्ष ने चुनाव आयोग के मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के विरोध में सदन से वॉकआउट किया था और चर्चा की मांग की है
  • वित्त मंत्री ने विपक्ष पर मणिपुर के मुद्दे पर आरोपों को ड्रामा करार देते हुए उनके रवैये पर शर्म व्यक्त की
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नई दिल्ली:

मणिपुर को लेकर विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना ठहराते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज आड़े हाथों लिया. राज्य सभा में मणिपुर जीएसटी संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के गैरहाजिर रहने पर वित्त मंत्री ने सवाल पूछा.उन्होंने कहा कि पिछले पूरे साल विपक्षी दल मणिपुर को लेकर हर बात पर घड़ियाली आंसू बहा रहे थे. उन्होंने मुद्दे उठाए और घड़ियाली आंसू बहाए. यह पहली बार नहीं है. मैंने इससे पहले भी देखा कि जब हम मणिपुर के बजट के लिए बिल लाए थे तब भी विपक्ष ने चर्चा में हिस्सा नहीं लिया था. वित्त मंत्री ने कहा कि इस बार भी उन्होंने मणिपुर के लोगों की भलाई के बारे में नहीं सोचा. आज जब एक अध्यादेश को विधेयक के रूप में लाकर उसे पारित करा कानून बनाने का कदम उठाया जा रहा है, विपक्ष इसका हिस्सा बनने के लिए सदन में मौजूद नहीं है.



दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा 12 राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण अभियान के तौर-तरीकों के विरोध में विपक्ष ने विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया था. विपक्ष इस पर दोनों सदनों में चर्चा की मांग कर रहा है. हालांकि, बाद में सरकार और विपक्ष के बीच अगले सप्ताह चुनाव सुधारों पर चर्चा करने की सहमति बनी है जिसमें विपक्ष एसआईआर का मुद्दा भी उठा सकता है.वित्त मंत्री ने कहा विपक्ष की गैरमौजूदगी यह साफ तौर पर दिखा रही है कि मणिपुर के बारे में उनकी जो भी चिंताएं थीं और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री के बारे में जो उनके आरोप थे, वे सब केवल ड्रामा थे. मुझे यह कहते हुए खेद है और विपक्ष के रवैये पर शर्म आती है.

उन्होंने कहा कि विपक्ष को ज़िम्मेदाराना रवैया अपनाना चाहिए और जिस राज्य के लिए आप इतनी बात कर रहे हैं.उसकी बेहतरी के लिए जब एक कानून और बजट पारित होता है,उसकी चर्चा में विपक्ष को भाग लेना चाहिए. मणिपुर में मई 2023 से मणिपुर में जातीय हिंसा शुरू हुई थी, जिसने राज्य को गहरे संकट में डाल दिया. हालात गंभीर होने पर राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा. विपक्ष मणिपुर के बिगड़े हालात को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधता रहा है और उस पर हालात को संभालने में नाकाम रहने का आरोप लगाता आया है.

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