- सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR मामले में अब तक हुई प्रगति को संतोषजनक बताया
- कलकत्ता हाई कोर्ट ने सूचित किया कि 47 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों का समाधान हो चुका है
- चुनाव आयोग ने 19 अपीलीय न्यायों के गठन और सात इमारतों के आवंटन की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी है
पश्चिम बंगाल में SIR के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम हम अब तक हुई प्रगति से खुश हैं. सीजेआई सूर्यकांत ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा कि सभी आपत्तियां 7 अप्रैल तक सुनी जाएंगी. हमें बताया गया है कि सभी आपत्तियों पर 7 अप्रैल तक फैसला हो जाएगा, इसलिए हमने यह तारीख तय की है. सीजेआई ने आगे कहा कि हमें आंकड़ों के बारे में सुनकर खुशी हुई कि 47 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों का निपटारा किया जा चुका है.हर दिन औसतन करीब 2 लाख आपत्तियों और दावों का निपटारा किया जा रहा है.
हमें कलकत्ता हाई कोर्ट का पत्र मिला था...
पश्चिम बंगाल में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हमें कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से एक पत्र मिला है.हमें आंकड़ों के बारे में सुनकर खुशी हुई है कि 47 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों का निपटारा किया जा चुका है. शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल ने आज हमें सूचित किया कि 7 अप्रैल तक सभी आपत्तियों पर फैसला कर लिया जाएगा.पत्र में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग ने 19 अपीलीय न्यायों के गठन के बारे में अधिसूचित किया है.उनके दफ्तरों के लिए 7 इमारतों का उल्लेख किया गया है.
संदेह पैदा करने वाले बयान न दें- चीफ जस्टिस
सुनवाई के दौरान,TMC के वकील कल्याण बनर्जी ने बड़े पैमाने पर फॉर्म 6 जमा होने का मुद्दा उठाया.उन्होंने कहा कि अभी न्यायिक प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इसके बीच हजारों की संख्या में नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए फॉर्म 6 जमा हो रहे हैं. इस पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताई और कहा कि इस तरह के संदेह पैदा करने वाले बयान नहीं दिए जाने चाहिए.ECI के वकील ने कानून के मुताबिक कहा कि नामांकन की आखिरी तारीख तक मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकते हैं.
कोर्ट में चलीं ये दलीलें
जस्टिस बागची ने कहा कि जिस सॉफ्टवेयर में मतदाताओं की डिटेल रखी जा रही है उसका स्ट्रक्चर ऐसा है कि उससे यह पता चलता है कि किसी को शामिल क्यों किया गया या बाहर क्यों रखा गया? और इसलिए जब इसके खिलाफ अपील की जाती है, तो उस व्यक्ति को उसके कारण बताए जाने चाहिए.
उन्होंने कहा कि हम इस बात पर गौर कर रहे हैं कि चुनाव किस सूची के आधार पर होंगे और दूसरा वोट देने का जरूरी संवैधानिक अधिकार क्या होगा? उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर किसी व्यक्ति को सूची से बाहर कर दिया जाता है, वह इस चुनाव में वोट नहीं दे पाता है और अगर बाद में वोटर लिस्ट से बाहर किए जाने के खिलाफ ट्रिब्यूनल में अपील पर ट्रिब्यूनल यह फैसला देता है कि उस व्यक्ति को सूची में शामिल किया जाना चाहिए तो उसे वोटर लिस्ट में दोबारा शामिल किया जाए. यही नहीं यह बात उसे व्यक्ति पर भी लागू होती है जिसे पहले तो वोटर लिस्ट में शामिल किया गया था, लेकिन बाद में बाहर कर दिया गया.
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जस्टिस बागची ने आगे कहा कि सभी लोग यह याद रखें कि अगर कोई व्यक्ति इस चुनाव में वोट नहीं दे पाता है, तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसे हमेशा के लिए उसके इस अधिकार से वंचित कर दिया गया है.CJI ने कहा कि हम ECI, पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर को निर्देश देते हैं कि वे एडजुडिकेटिंग ऑफिसर, अपीलेट ट्रिब्यूनल के सदस्यों और संबंधित स्टाफ को, जरूरी पेमेंट करें.














