पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले साउथ 24 परगना की सोनारपुर दक्षिण (147 नंबर विधानसभा सीट) एक बार फिर सियासी चर्चा के केंद्र में है. लंबे समय तक वामपंथी प्रभाव और बाद में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मजबूत गढ़ के रूप में पहचान बनाने वाली यह सीट अब धीरे-धीरे हाई-वोल्टेज मुकाबले का केंद्र बन चुकी है. इस बार यहां टीएमसी की अरुंधति लवली मैत्रा और बीजेपी की रूपा गांगुली के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है. हालांकि CPI की प्रतिमा दासगुप्ता भी जोर लगाने में पीछे नहीं हैं.
इतिहास: वामपंथ से TMC तक का सफर
सोनारपुर क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास 1962 से शुरू होता है, जब यहां पहली बार चुनाव हुआ था. उस समय कुल मतदाता करीब 2.88 लाख थे और CPI के खगेन्द्र कुमार रॉयचौधरी इस सीट से पहले विधायक बने थे. समय के साथ यह सीट वामपंथ का गढ़ रही, लेकिन 2011 के बाद राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई. TMC ने यहां अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया.
2011 से 2021: TMC की लगातार जीत
| 2011 | जीवन मुखोपाध्याय | TMC | 1,00,243 वोट | 59.37% |
| 2016 | जीवन मुखोपाध्याय | TMC | 97,455 वोट | 47.80% |
| 2021 | अरुंधति मैत्रा | TMC | 1,09,222 वोट | 46.92% |
2011 में TMC ने यहां भारी बहुमत से जीत दर्ज की, जबकि 2016 में कड़ा मुकाबला हुआ. 2021 आते-आते बीजेपी मुख्य चुनौती बनकर उभरने लगी और चुनाव पूरी तरह TMC बनाम BJP हो गया.
विपक्ष का बदलता चेहरा
2011 और 2016 में CPI मुख्य विपक्ष में रही
2021 में BJP ने 35% से ज्यादा वोट हासिल कर सीधी टक्कर दी
लेफ्ट का वोट शेयर लगातार घटा
2026 चुनाव: मैदान तैयार
2026 के विधानसभा चुनाव में सोनारपुर दक्षिण सीट से प्रमुख उम्मीदवार इस प्रकार हैं-
- TMC: अरुंधति मैत्रा
- BJP: रूपा गांगुली
- CPI: प्रतिमा दासगुप्ता
वोटरों का गणित
- कुल मतदाता: लगभग 2,98,767
- पुरुष मतदाता: करीब 1.44 लाख
- महिला मतदाता: करीब 1.46 लाख
ये आंकड़े बताते हैं कि महिला वोटर इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं.
चुनावी ट्रेंड: क्या कहते हैं आंकड़े?
- 2011: TMC की एकतरफा जीत
- 2016: मुकाबला कड़ा
- 2021: BJP की मजबूत एंट्री, अंतर घटा
- 2026: कांटे की टक्कर के संकेत
सोनारपुर दक्षिण अब सिर्फ TMC का पारंपरिक गढ़ नहीं रहा, बल्कि यह एक प्रतिष्ठा की सीट बन चुकी है. जहां एक ओर TMC लगातार चौथी जीत पाने की कोशिश में है, वहीं BJP इस सीट पर बड़ा उलटफेर करने के लिए जोर लगा रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 का चुनाव यहां बेहद करीबी और निर्णायक हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो ये दक्षिण 24 परगना के साथ-साथ बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे सकता है.
देखें- मछली पर महासंग्राम... बंगाल में दीदी के 'बैन' वाले दांव पर BJP का 'फिश' कैंपेन वाला तड़का














