युवराज केस: "मेरे बेटे ने 2 घंटे संघर्ष किया, रेस्क्यू टीम ने भगवान भरोसे छोड़ दिया"- पिता का छलका दर्द

युवराज के पिता ने कहा कि वो कभी वापस तो नहीं आएगा. लेकिन हम चाहते हैं कि जिम्मेदार लोगों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए और ये सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में कोई दूसरा युवराज इस तरह की त्रासदी ना झेले.

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  • सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की डूबने से मौत के मामले में पिता ने दोषियों को कड़ी सजा की मांग की
  • युवराज ने गड्ढे में गिरने के बाद दो घंटे तक संघर्ष किया और बचाव दल को बचाने का काफी मौका दिया था
  • पिता राज कुमार मेहता ने बचाव दल की लापरवाही पर आरोप लगाते हुए न्याय दिलाने की अपील की है
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नोएडा (यूपी):

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की डूबकर मौत मामले में उनके पिता राज कुमार मेहता ने एक बार फिर दोषियों को उचित सजा देने की मांग की है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि लापरवाह विभागों को उचित सजा दिलाई जानी चाहिए. मेरा बेटा बहुत साहसी था, जल जमाव वाले गड्डे में गिरने के बाद भी उसने काफी संघर्ष किया. उसने 2 घंटे तक बचाव कार्य का मौका दिया.

राज कुमार मेहता ने कहा कि बचाव दल ने बहुत लापरवाही दिखाई और मेरे बेटे को भगवान भरोसे छोड़ दिया. हम युवराज को कभी न्याय नहीं दिला सकते हैं, क्योंकि वो कभी वापस नहीं आएगा. लेकिन हम चाहते हैं कि जिम्मेदार लोगों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए और ये सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में कोई दूसरा युवराज इस तरह की त्रासदी ना झेले.

उन्होंने कहा कि मैं भाई मनिंदर का धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने बिना कोई परवाह करते हुए मेरे बेटे की जान बचाने का प्रयास किया. साथ ही सरकार का शुक्रिया क्योंकि उन्होंने संज्ञान लेते हुए एसआईटी का गठन किया, किसी भी गुनहगार को ना छोड़ा जाये और उन्हें उचित सजा मिले.

गौरतलब है कि गुरुग्राम में कार्यरत 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता 16 जनवरी की रात सेक्टर 150 में अपने घर लौट रहे थे, तभी उनकी कार एक निर्माण स्थल के पास पानी से भरे गड्ढे में गिर गई और उनकी मृत्यु हो गई. युवराज मेहता के पिता की तहरीर पर नॉलेज पार्क थाने में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं-105, 106 और 125 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई.

इससे पूर्व नोएडा पुलिस ने इस मामले में ‘एमजेड विजटाउन प्लानर्स' के निदेशक अभय कुमार को गिरफ्तार किया.

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पुलिस ने इस मामले में एक अलग प्राथमिकी दर्ज की और दो रीयल एस्टेट कंपनियों के पांच अधिकारियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की, जिसमें इनके खिलाफ पर्यावरण एवं प्रदूषण नियमों के उल्लंघन के साथ निर्माण स्थल पर लापरवाही का आरोप लगाया.

इसके अलावा, डेवलपर्स और नोएडा प्राधिकरण द्वारा लापरवाही के आरोपों और जन आक्रोश के बीच प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक विशेष जांच टीम द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है.

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