खेत में हल चलाने वाले किसान को मिला करीब 15 करोड़ का इनकम टैक्स नोटिस, देखकर उड़ गए होश

यूपी के एक किसान को इनकम टैक्स और जीएसटी विभाग ने करीब 15 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस भेज दिया. इसकी पीछे की कहानी भी हैरान कर देगी.

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यूपी के किसान को मिला करोड़ों का नोटिस
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  • यूपी में एक किसान को गलत तरीके से पैन कार्ड इस्तेमाल होने के कारण करीब 15 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस मिला
  • किसान के नाम पर दिल्ली के नारायणा में एक फर्जी फर्म का टैक्स और जीएसटी बकाया दिखाया गया
  • डीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो सदस्यीय जांच टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं
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यूपी के बदायूं से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक किसान को इनकम टैक्स का करीब 15 करोड़ रुपये का नोटिस आ गया. करोड़ो रुपये के नोटिस को देखकर किसान हैरान रह गया. टैक्स के नोटिस की शिकायत लेकर बदायूं के जिलाधिकारी के पास पहुंचा. इस मामले में डीएम ने जांच के आदेश दिए हैं. शुरुआती जांच में पता चला है कि किसान के पैन कार्ड का किसी ने गलत तरीके से इस्तेमाल किया था.

खेती करके परिवार पालता है किसान

जानकारी के अनुसार, किसान के पास 12 बीघा जमीन है. जहां वो खेती करके अपने परिवार को पालता है. उसे इनकम टैक्स और जीएसटी विभाग के कुल 14.66 करोड़ रुपये से अधिक का कर नोटिस मिला. बदायूं के जिलाधिकारी अवनीश राय ने बताया, ‘किसान द्वारा औपचारिक आवेदन दिए जाने के बाद मामले की जांच के लिए अपर जिलाधिकारी (वित्त) और उपायुक्त (जीएसटी) सहित दो सदस्यीय टीम का गठन किया गया.'

दिल्ली में चल रही है किसान के नाम से फर्म

किसान भोला सिंह ने बताया, "विभागीय अधिकारियों से इस मामले की पूछताछ करने पर उन्होंने बताया कि दिल्ली के नारायणा औद्योगिक क्षेत्र (चरण-1) में उनके नाम से ‘राम स्टोर' नामक एक फर्म संचालित की जा रही है, जिस पर 1.02 करोड़ रुपये का आयकर बकाया है.'' उन्होंने बताया कि इस बीच जीएसटी कार्यालय ने सिंह को 13.63 करोड़ रुपये की जीएसटी टैक्स देनदारी का हवाला देते हुए एक नोटिस भी जारी किया है.

'कभी दिल्ली ही नहीं गए'

वजीरगंज थाना क्षेत्र के खुर्रमपुर भमौरी निवासी सिंह ने बताया कि 29 मार्च को उन्हें बदायूं स्थित इनकम टैक्स से एक नोटिस मिला, जिसमें उन्हें 1.02 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया था. उन्होंने दावा किया कि वे कभी दिल्ली नहीं गए और न ही उन्होंने कभी कोई फर्म या कारोबार स्थापित किया था. सिंह ने बताया कि इसके बाद उन्होंने बदायूं के जिलाधिकारी के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई.

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डीएम ने दिए जांच के आदेश

मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को जांच करने और समस्या का समाधान करने के निर्देश जारी किए. अपनी प्रारंभिक जांच के दौरान जीएसटी अधिकारियों ने पाया कि जिस फर्म के खिलाफ ये कर बकाया हैं उसने किसान के आधार और पैन नंबरों का इस्तेमाल किया था. अधिकारियों ने बताया कि इससे स्पष्ट है कि एक अज्ञात व्यक्ति ने किसान के दस्तावेजों का दुरुपयोग करके एक फर्जी फर्म की स्थापना की और करोड़ों रुपये के लेनदेन किए.

किसान ने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें साइबर अपराध थाना या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी. पीड़ित किसान ने दावा किया कि जब वजीरगंज थाने और साइबर पुलिस थाने से संपर्क किया तो उसकी शिकायत वहां दर्ज नहीं की गई जिससे उसकी मुश्किलें और बढ़ गईं. 

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'जमीन बेचकर भी नहीं चुका पाएंगे इतनी रकम'

किसान ने यह भी कहा कि अगर वह अपनी सारी जमीन और संपत्ति बेच भी दे तो भी वह इतनी बड़ी रकम चुकाने में असमर्थ होगा. उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए. डीएम ने कहा कि तीन से चार दिन के अंदर जांच रिपोर्ट उनको प्राप्त हो जाएगी उसके बाद धोखाधड़ी करने वाले व्यक्ति अथवा फर्म पर कार्रवाई कर उससे बकाया आयकर एवं जीएसटी शुल्क की वसूली की जाएगी. उन्होंने बताया कि इस मामले में किसान भोला सिंह का पैन कार्ड इस्तेमाल कर धोखाधड़ी की गई है जांच के दौरान सब कुछ सामने आ जाएगा और उचित कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए.

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