- दिल्ली HC ने कहा कि विदेशी अदालती आदेश भारत में चल रहे कस्टडी विवादों में एकमात्र निर्णायक आधार नहीं हो सकते.
- दिल्ली हाई कोर्ट ने अमेरिका में जन्मी बच्ची की कस्टडी को लेकर माता-पिता की प्रतिपक्षी याचिकाओं पर सुनवाई की.
- बच्ची के माता-पिता के बीच 2017 में विवाद शुरू हुआ. जब मां ने पिता पर बच्ची के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.
अमेरिका में जन्मी लेकिन अब भारत में रह रही 11 साल की बच्ची के कस्टडी मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने साफ कहा है कि विदेशी अदालतों के आदेश भले ही सम्मान के योग्य हों, लेकिन वे भारत में चल रहे कस्टडी विवादों में अंतिम और एकमात्र निर्णायक आधार नहीं हो सकते. ऐसे मामलों में सबसे बड़ी कसौटी बच्चे का कल्याण और उसकी मौजूदा परिस्थितियां होती हैं, खासकर तब जब बच्चे का भारत से गहरा जुड़ाव बन चुका हो. दिल्ली हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी उस वक्त की, जब वह अमेरिका में जन्मी एक नाबालिग बच्ची की अभिरक्षा को लेकर अलग रह रहे माता-पिता की प्रतिपक्षी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था.
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुदेजा की पीठ ने अपने 1 अप्रैल के आदेश में कहा कि केवल इस आधार पर कि बच्ची जन्म से अमेरिकी नागरिक है या उसने अपने शुरुआती वर्ष अमेरिका में बिताए हैं, उसके वेलफेयर का निर्धारण नहीं किया जा सकता.
अमेरिका में जन्म, 4 साल से भारत में रह रही बच्ची
अदालत ने यह भी कहा कि 11 वर्षीय बच्ची पिछले करीब चार वर्षों से अपनी मां के साथ भारत में रह रही है और यहीं पढ़ाई कर रही है. मां को वर्ष 2022 में अमेरिका के न्यू हेवन की अदालत से तलाक की अनुमति मिल चुकी है.
अमेरिका में रहने वाले ये दोनों भारतीय नागरिक अगस्त 2011 में शादी के बंधन में बंधे थे. उनकी बेटी का जन्म 2015 में अमेरिका में हुआ था, जिससे वह जन्म से अमेरिकी नागरिक बन गई.
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पति-पत्नी के बीच इस तरह से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद वर्ष 2017 में तब शुरू हुआ, जब मां ने पिता पर बच्ची के यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए. इसके बाद पिता की गिरफ्तारी हुई और 2022 में एक प्रोटेक्शन ऑर्डर जारी किया गया. हालांकि, बाद में अमेरिकी अदालत ने इन आरोपों को निराधार पाया. साथ ही अदालत ने तलाक को मंजूरी दे दी थी और और संयुक्त पालन-पोषण का आदेश दिया गया. अदालत ने पाया कि बच्ची को पिता के खिलाफ भड़का रही थी.
जून 2022 में मां बच्ची को भारत लेकर आई, जिसे दिल्ली हाई कोर्ट ने सद्भावनापूर्ण कदम नहीं माना. फिर भी अदालत ने यह कहते हुए बच्ची को अमेरिका वापस भेजने से इनकार कर दिया कि ऐसा करने से मां को भी अनिश्चित परिस्थितियों में वहां रहना पड़ेगा.
बच्ची के भारत में बस जाने और उसकी वर्तमान स्थिति को देखते हुए हाई कोर्ट ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं और माता-पिता को गार्डियनशिप व कस्टडी के लिए वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की छूट दी.














