- संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाला संशोधित बिल अप्रैल में पेश किया जा सकता है
- सरकार 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करने का प्रावधान बिल में शामिल करने की तैयारी कर रही है
- लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या वर्तमान से पचास प्रतिशत बढ़ाकर कुल सीटें आठ सौ सोलह करने का प्रस्ताव है
संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने वाला बिल अप्रैल के तीसरे हफ्ते में लाया जा सकता है. बताया जा रहा है कि विपक्षी पार्टियों ने सरकार से मांग की थी कि महिला आरक्षण संशोधन बिल को पेश करने से पहले ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई जाए. हालांकि, उन्होंने शर्त ये रखी थी कि ऑल पार्टी मीटिंग 29 अप्रैल के बाद यानी बंगाल और बाकी राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद की जाए. लेकिन सरकार बिल को अप्रैल के तीसरे हफ्ते में ही लाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए बजट सत्र की अवधि बढ़ाई जा सकती है.
महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाला 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' 2023 में ही पास हो चुका है. अब सरकार इसमें संशोधन करने जा रही है. इस बिल को मार्च में ही लाए जाने की तैयारी थी लेकिन विपक्ष की आपत्ति के बाद इसे टाल दिया गया.
अब सूत्रों का कहना है कि इस संशोधित बिल को 15 अप्रैल के आसपास लाया जा सकता है. इसी बिल के साथ परिसीमन बिल भी पेश किए जाने की संभावना है ताकि लोकसभा और विधानसभा की सीमाओं का परिसीमन किया जा सके. सूत्रों के मुताबिक, दोनों बिल 13 अप्रैल से शुरू होने वाले हफ्ते में पेश हो सकते हैं.
यह भी पढ़ेंः 33 फीसदी के अंदर भी अलग से रिजर्वेशन; महिला आरक्षण पर क्या है मोदी सरकार का अगला प्लान?
सरकार का प्लान क्या है?
सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया था कि महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू करने के मकसद से 2023 के कानून में बदलाव किया जाना है. इसके लिए कानून में रखी गई 2026 की जनगणना और उसके आधार पर किए जाने वाले परिसीमन की अनिवार्यता को खत्म कर उसकी जगह 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन का प्रावधान किया जाएगा. सरकार का मानना है कि 2027 की जनगणना के आंकड़े आने में बहुत समय लग सकता है. इसके बाद परिसीमन में और ज्यादा समय लगेगा, जिस कारण 2029 के चुनाव में इसे लागू नहीं किया जा सकेगा.
इसके साथ ही सरकार लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर भी बिल लाने की तैयारी कर रही है. लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने पर 2002 में पारित किए गए संविधान संशोधन के जरिए 2026 तक रोक लगाई गई थी. नया बिल लाकर इस रोक को हटाया जाएगा ताकि सीटों की संख्या बढ़ाई जा सके.
सूत्रों के मुताबिक, हर राज्य में लोकसभा और विधानसभा सीटों की वर्तमान संख्या में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी. इस तरह लोकसभा में कुल सीटों की वर्तमान संख्या 543 से बढ़कर 816 हो जाएगी और बढ़ी हुई संख्या का एक तिहाई यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जाएंगी.
यह भी पढ़ेंः यूपी में 120 तो बिहार में 60 लोकसभा सीटें, 33% महिला आरक्षण देने के लिए बन गया फॉर्मूला?
बजट सत्र को बढ़ाया जाएगा?
संसद का बजट सत्र 2 अप्रैल को खत्म होने वाला है. ऐसे में महिला आरक्षण बिल के लिए नया सत्र नहीं बुलाया जाएगा. सूत्रों का कहना है कि बजट सत्र की ही अवधि को और बढ़ाया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, बजट सत्र की अवधि बढ़ाई जा सकती है और कुछ दिनों के विराम के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही बुलाई जाएगी.













