तमिलनाडु में अन्नामलाई से किनारा क्यों? उनकी कुर्बानी और BJP की जीत की कहानी, डिटेल में जानें

तमलिनाडु में बदलते राजनीति घटनाक्रम के बीच सवाल यही है कि अन्नामलाई को अध्यक्ष पद छोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी. क्या उनको किनारे किए बिना बीजेपी का AIADMK संग गठबंधन चल पाना संभव नहीं था, डिटेल में जानिए.

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बीजेपी ने तमिलनाडु की राजनीति में किया बड़ा बदलाव.
चेन्नई:

तमिलनाडु की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला. एक तरफ बीजेपी ने 2 साल बाद फिर AIADMK से हाथ मिला लिया, दूसरी तरफ राज्य बीजेपी अध्यक्ष अन्नामलाई (Annamalai) ने 4 साल बाद पद छोड़ दिया. वहीं नयनार नागेंद्रन नए अध्यक्ष बनने जा रहे हैं. बता दें कि दोनों दलों ने करीब दो साल बाद एक बार फिर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को हाथ (BJP-AIADMK Alliance) मिला लिया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रदेश में 2026 का विधानसभा चुनाव अन्नाद्रमुक अध्यक्ष पलानीस्वामी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा. अब सवाल ये कि अन्नामलाई ने पद क्यों छोड़ा. बीजेपी को तमिलनाडु में नए चेहरे की जरूरत क्यों पड़ी.

अन्नामलाई को रिप्लेस करने की जरूरत क्यों पड़ी?

ये बात किसी से छिपी नहीं है कि अन्नामलाई ने इसीलिए पद छोड़ा है, ताकि बीजेपी-AIADMK का गठबंधन राज्य में सही तरीके से चल सके. साल 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान के दौरान AIADMK नेता पलानीस्वामी ने अन्नामलाई को प्रचार का भूखा कहा था. दोनों के बीच जुबानी जंग देखी गई थी. इससे साफ पता चलता है कि दोनों के बीच संबंध कैसे हैं. और दोनों का ही एक साथ काम करना कितना मुश्किल है.

PTI फोटो.

अन्नामलाई के बारे में जानिए

  • पुलिस अधिकारी से राजनीति में आए 40 साल के अन्नामलाई को राज्य में अपनी ‘एन मन एन मक्कल' (मेरी जमीन, मेरे लोग) यात्रा के लिए जाना जाता है.
  •  पार्टी की परंपरा के मुताबिक, उनके पूर्ववर्ती और मौजूदा केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन ने ‘वेल यात्रा' और पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री पोन राधाकृष्णन ने पूरे राज्य में ‘थामराई यात्रा' निकाली थी.
  • अन्नामलाई ने 2021 के विधानसभा चुनाव में करूर जिले के अरवाकुरिची निर्वाचन क्षेत्र से चुनावी राजनीति की लेकिन असफल रहे.  उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव भी लड़ा लेकिन जीत नहीं मिली.

कौन बनेगा नया स्टेट बीजेपी अध्यक्ष?

अन्नामलाई ने राज्य बीजेपी अध्यक्ष का पद छोड़ने के बाद खुद नए चेहरे के नाम का प्रस्ताव रखा, जो उनकी जगह ये भूमिका निभाएंगा. मौजूदा उपाध्यक्ष नयनार नागेंद्रन को बीजेपी ये जिम्मेदारी दी है. वह शनिवार से ही पद संभालेंगे. हालांकि अमित शाह ने ये भी साफ कर दिया कि उनके तेजतर्रार नेता अन्नामलाई कहीं नहीं जा रहे. उनको अब राष्ट्रीय भूमिका में लाया जाएगा.

पार्टी हित में अन्नामलाई ने दी कुर्बानी!

अन्नामलाई  का पार्टी हित में चुपचाप किनारे हो जाना BJP का वह अनुशासन है, जिससे वह जीत की स्क्रिप्ट लिखती रही है. शुक्रवार को गठबंधन के ऐलान के दौरान अमित शाह से पूछा गया कि क्या बीजेपी ने AIADMK के साथ गठबंधन का ऐलान राज्य में अगला पार्टी चीफ मिलने के बाद फाइनल किया था. अमित शाह ने जवाब दिया कि ऐसा कुछ नहीं है. अन्नामलाई अभी भी तमिलनाडु बीजेपी के चीफ हैं.  यही वजह है कि वह उनके पास बैठे हैं. BJP ने अपने तेजतर्रार नेता अन्नामलाई का पूरा मान रखा. उनकी मौजूदगी में ही गठबंधन का ऐलान किया. 

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तमिलनाडु में बीजेपी का टारगेट बड़ा है

दरअसल तमिलनाडु में बीजेपी का टारगेट बड़ा है. गठबंधन सहजता से चले इसलिए लिए अन्नामलाई को राज्य की राजनीति से निकाला जा रहा है. लेकिन शाह ने राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका का इशारा देकर यह भी जता दिया कि पार्टी तमिलनाडु के अपने इस तेजतर्रार नेता की धार को और पैना करेगी और सही समय पर इस्तेमाल करेगी. 

अन्नामलाई-पलानीसामी एक साथ क्यों नहीं हो सकते?

पलानीसामी और अन्नामलाई, दोनों तमिलनाडु के गौंडर समुदाय से आते हैं, ऐसे में अन्नामलाई का बतौर पार्टी अध्यक्ष राज्य में बने रहना भी गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकता है. गठबंधन पर एक समुदाय विशेष का ठप्पा लग जाता. शायद यही वजह है कि बीजेपी ने अन्नामलाई को तमिलनाडु से निकाकर राष्ट्रीय भूमिका में लाने का इशारा दिया है. 

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