75 साल में हम यहां तक पहुंच गए... एंजेल चकमा केस पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, जानिए क्या-क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने देहरादून में एंजेल चकमा की मौत को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए नस्लीय हिंसा पर सख्त रोक की जरूरत पर जोर दिया. अदालत ने गाइडलाइन जारी करने से इनकार किया, लेकिन याचिका की प्रति अटॉर्नी जनरल को भेजने का निर्देश दिया है.

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  • SC ने देहरादून में त्रिपुरा के युवक एंजेल चकमा की मौत को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और सख्त रोक की जरूरत जताई
  • SC ने कहा कि समाज की सोच बदलना आवश्यक है, नस्ल या क्षेत्रीय आधार पर अलग पहचान वाली गाइडलाइन बनाना सही नहीं
  • याचिका में पूर्वोत्तर के नागरिकों के खिलाफ नस्लीय हमलों को हेट क्राइम घोषित करने की मांग की गयी
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नई दिल्ली:

देहरादून में त्रिपुरा के युवक एंजेल चकमा की मौत से जुड़ी जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. अदालत ने इस घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया और कहा कि ऐसे मामलों पर “सख्त हाथों से” रोक लगनी चाहिए. हालांकि अदालत ने साफ किया कि वह इस मुद्दे पर नए दिशानिर्देश (Guidelines) जारी नहीं करेगी. सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत का उद्देश्य समाज के व्यवहार को सुधारना नहीं, बल्कि कानून के दायरे में न्याय सुनिश्चित करना है. 

उन्होंने टिप्पणी की कि नस्ल, भाषा या क्षेत्र के आधार पर लोगों को अलग पहचान देने वाली गाइडलाइन बनाना नई समस्याएं खड़ी कर सकता है. CJI ने सवाल उठाया “75 साल बाद हम यहां तक पहुंच गए हैं?” उन्होंने कहा कि वास्तविक जरूरत समाज की सोच बदलने और भाईचारे को मजबूत करने की है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्वोत्तर के छात्रों को नस्लीय भेदभाव, हेट स्पीच और हिंसा से बचाने के लिए दाखिल याचिका को पूरी तरह खारिज नहीं किया. अदालत ने इस याचिका की एक प्रति भारत के अटॉर्नी जनरल को सौंपने का निर्देश दिया, ताकि वे इस मामले को उचित प्राधिकरणों के सामने उठा सकें. याचिका में मांग की गई थी कि उत्तर‑पूर्वी नागरिकों के खिलाफ नस्लीय हमलों को ‘हेट क्राइम' घोषित किया जाए और केंद्र व राज्य स्तर पर इसके लिए विशेष पुलिस इकाइयाँ, नोडल एजेंसियां और जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए जाएं.

क्या था पूरा मामला?

गौरतलब है कि यह याचिका उस घटना से जुड़ी है जिसमें देहरादून में एमबीए छात्र एंजेल चकमा पर नस्लीय हमला हुआ था और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इस घटना ने पूर्वोत्तर के छात्रों की सुरक्षा को लेकर देशभर में चिंता बढ़ा दी थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि ऐसे मामलों में पुलिस और संस्थानों द्वारा पर्याप्त कदम नहीं उठाए जाते. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने गाइडलाइन जारी करने से इनकार किया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर सरकार को उपयुक्त कदम उठाने होंगे. 

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