खनन माफिया को खत्म करने के लिए SC ने MP-UP-Rajasthan को दिया अलेटीमेटम, वन रक्षक की हत्या पर जताई कड़ी नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध रेत खनन पर सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने तीन राज्यों MP-UP-Rajasthan को मिलकर कार्रवाई करने, निगरानी बढ़ाने और माफिया के खिलाफ कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने अवैध रेत खनन पर सख्त रुख अपनाया है.

Supreme Court Action: मध्य प्रदेश में अवैध रेत खनन ने एक बार फिर खतरनाक रूप ले लिया है. मुरैना जिले में 8 अप्रैल 2026 को एक वन रक्षक हरिकेश गुर्जर को रेत से भरे ट्रैक्टर से कुचलकर मार दिया गया. इस घटना ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं और कानून व्यवस्था की गंभीर स्थिति को उजागर किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने लिया कड़ा संज्ञान

इस मामले पर Supreme Court ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त टिप्पणी की है. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि यह केवल एक अपराध नहीं बल्कि संगठित और हिंसक माफिया नेटवर्क का संकेत है, जिसे तत्काल खत्म करना जरूरी है.

तीन राज्यों को मिलकर करना होगा काम

कोर्ट ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सीमा क्षेत्रों में अवैध खनन रोकने के लिए मिलकर काम करें. इसके लिए एक समान SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू करने को कहा गया है ताकि कार्रवाई में कोई ढिलाई न रहे.

संयुक्त गश्त और सुरक्षा बढ़ाने के आदेश

न्यायालय ने संयुक्त गश्ती दल बनाने का निर्देश दिया है. इन टीमों को आधुनिक निगरानी उपकरण, संचार साधन और जरूरत पड़ने पर हथियारबंद सुरक्षा भी दी जाएगी ताकि माफिया से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके.

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हर वाहन पर नजर रखने की तैयारी

अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए कोर्ट ने सभी खनन वाहनों में GPS ट्रैकिंग अनिवार्य करने को कहा है. साथ ही हाई क्वालिटी CCTV कैमरों से निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे रियल टाइम में गतिविधियों पर नजर रखी जा सके.

सख्त कार्रवाई और संपत्ति जब्ती

कोर्ट ने साफ कहा है कि अवैध खनन में शामिल वाहनों को तुरंत जब्त किया जाए. दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और उनकी संपत्तियों को भी जब्त किया जाए ताकि इस नेटवर्क को आर्थिक रूप से तोड़ा जा सके. तीनों राज्यों को केंद्रीकृत कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश दिए गए हैं. ये कंट्रोल रूम रियल टाइम डेटा के आधार पर निगरानी करेंगे और तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे.

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पर्यावरण को लेकर भी सख्त संदेश

कोर्ट ने कहा कि अवैध रेत खनन केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि गंभीर पर्यावरणीय संकट है. इससे नदियों का संतुलन बिगड़ रहा है और राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में रहने वाले घड़ियाल जैसे वन्यजीवों पर भी खतरा बढ़ रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि आदेशों का पालन नहीं हुआ तो अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जा सकती है. जरूरत पड़ी तो रेत खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा और राज्य सरकारों पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

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