हाई कोर्ट चीफ जस्टिस की नियुक्ति प्रक्रिया बदली, जानें अब कैसे होगा जजों का चयन

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए एक बयान में कहा गया है, ‘‘कॉलेजियम ने एक नीतिगत निर्णय लिया है कि न्याय प्रशासन की दक्षता और गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण करने के लिए प्रस्तावित न्यायाधीश का तबादला रिक्ति उत्पन्न होने से करीब दो महीने पहले किया जाए.’’

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  • SC के कॉलेजियम ने मुख्य न्यायाधीश के तबादले को पद रिक्त होने से लगभग 2 महीने पहले करने का नीतिगत निर्णय लिया.
  • इस निर्णय का उद्देश्य न्यायाधीश को नए उच्च न्यायालय के कामकाज से परिचित कराना और सुचारु कार्यभार संभालना है.
  • पंजाब और हरियाणा HC की न्यायाधीश लीसा गिल को आंध्र प्रदेश HC का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई.
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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने ‘नीतिगत निर्णय' लिया है जिसके मुताबिक, जिस न्यायाधीश को किसी हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का प्रस्ताव हो, उसका तबादला पद रिक्त होने से काफी पहले, बेहतर होगा कि रिक्ति उत्पन्न होने से लगभग दो महीने पूर्व ही कर दिया जाए. CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने कहा कि यह निर्णय इसलिए लिया गया है, ताकि न्यायाधीश इस बीच उस उच्च न्यायालय के कामकाज से अच्छी तरह परिचित हो जाएं और वर्तमान मुख्य न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति पर मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभाल सकें.

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए एक बयान में कहा गया है, ‘‘कॉलेजियम ने एक नीतिगत निर्णय लिया है कि न्याय प्रशासन की दक्षता और गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण करने के लिए प्रस्तावित न्यायाधीश का तबादला रिक्ति उत्पन्न होने से करीब दो महीने पहले किया जाए.''

बयान में कहा गया है, ‘‘ इस नीतिगत निर्णय के बाद, कॉलेजियम ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की न्यायाधीश, न्यायमूर्ति लीसा गिल के तबादले की सिफारिश करने और उन्हें आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में रिक्ति उत्पन्न होने की तिथि से नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया है.''

शीर्ष अदालत के कॉलेजियम की बैठक 26 फरवरी को हुई थी. कॉलेजियम ने केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी को मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की भी सिफारिश की, क्योंकि उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पांच मार्च, 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

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एक अलग बयान में कॉलेजियम ने नौ अधिवक्ताओं - मोहम्मद नदीम सेराज, रंजन कुमार झा, कुमार मनीष, संजीव कुमार, गिरिजीश कुमार, आलोक कुमार, राज कुमार, राणा विक्रम सिंह और विकास कुमार को पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी.

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