29 साल जेल में रहने वाले अब्दुल हमीद को राहत; 1996 बस बम ब्लास्ट केस में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की फांसी की सजा

29 साल जेल में बिताने के बाद अब्दुल हमीद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. 14 लोगों की मौत वाले 1996 के समलेटी बस बम विस्फोट मामले में कोर्ट ने फांसी की सजा और दोषसिद्धि दोनों रद्द कर नए ट्रायल का आदेश दिया है. आखिर अदालत ने ऐसा क्यों किया?

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Samleti Bus Bomb Blast Case: 29 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की फांसी की सजा, फिर से होगा ट्रायल
दिल्ली:

Samleti Bus Bomb Blast Case: सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के राजस्थान समलेटी बस बम विस्फोट मामले में दोषी ठहराए गए अब्दुल हमीद की दोषसिद्धि और फांसी की सजा रद्द कर दी है. अदालत ने पाया कि ट्रायल के दौरान आरोपी को प्रभावी कानूनी सहायता नहीं मिली थी. कोर्ट ने जयपुर में विशेष अदालत गठित कर मामले में नए सिरे से ट्रायल कराने का आदेश दिया है. 14 लोगों की मौत वाले इस मामले में अब्दुल हमीद पिछले 29 वर्षों से जेल में बंद है और ट्रायल पूरा होने तक न्यायिक हिरासत में रहेगा.

कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के राजस्थान के समलेटी बस बम विस्फोट मामले में दोषी ठहराए गए अब्दुल हमीद की दोषसिद्धि और फांसी की सजा रद्द करते हुए मामले में नए सिरे से (डी-नोवो) ट्रायल कराने का आदेश दिया है. अदालत ने कहा कि किसी भी न्यायिक फैसले की वैधता सजा की कठोरता से नहीं, बल्कि दोष तय करने की निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया से तय होती है.

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने पाया कि ट्रायल के दौरान अब्दुल हमीद को प्रभावी कानूनी सहायता नहीं मिली और वह कई महत्वपूर्ण चरणों में बिना उचित वकील के मुकदमे का सामना करता रहा.

इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए अदालत ने जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरोपी से बातचीत की और ट्रायल कोर्ट के आदेश का भी परीक्षण किया.

न्याय दिखना भी चाहिए : कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि प्रभावी कानूनी प्रतिनिधित्व का अधिकार, निर्दोष माने जाने का सिद्धांत, अभियोजन पर संदेह से परे अपराध साबित करने का दायित्व और साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच केवल औपचारिकताएं नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार हैं. न्याय केवल किया ही नहीं जाना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए.

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आतंक और हिंसा के गंभीर मामलों में भी संवैधानिक अधिकार सर्वोपरि: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आतंक या हिंसा जैसे गंभीर मामलों में भी अदालतों को संवैधानिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए. अपराध की गंभीरता या जनाक्रोश के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया के स्थापित सिद्धांतों से विचलन नहीं किया जा सकता. अदालत ने कहा कि जितना बड़ा अपराध और जनदबाव होगा, उतनी ही अधिक जिम्मेदारी अदालत की होगी कि दोषसिद्धि केवल कानून और साक्ष्यों के आधार पर ही हो.

बेंच ने राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से जयपुर में एक विशेष अदालत गठित करने का अनुरोध किया है. यह अदालत राजस्थान उच्च न्यायिक सेवा के ऐसे अधिकारी की अध्यक्षता में होगी, जिसे सत्र मामलों की सुनवाई का कम से कम सात वर्ष का अनुभव हो. अदालत को निर्देश दिया गया है कि वह एक साल के भीतर ट्रायल पूरा करने का प्रयास करे.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि अब्दुल हमीद निजी वकील नियुक्त करने में सक्षम नहीं है तो राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण उसके लिए कम से कम 10 वर्ष के अनुभव वाले वरिष्ठ वकील को मुख्य बचाव पक्ष का वकील तथा सात साल के अनुभव वाले एक अन्य वकील को सहायक वकील के रूप में नियुक्त करे, ताकि उसे ट्रायल के दौरान प्रभावी और सार्थक कानूनी सहायता मिल सके.

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29 साल से जेल में बंद आरोपी को मिला नया मौका

अब्दुल हमीद पिछले 29 वर्षों से जेल में है और इस मामले में अब वही एकमात्र आरोपी बचा है. सह-आरोपी सलीम को सुप्रीम कोर्ट पहले ही साक्ष्यों के आधार पर बरी कर चुका है.  हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि नए सिरे से ट्रायल पूरा होने तक अब्दुल हमीद न्यायिक हिरासत में ही रहेगा. गौरतलब है कि 1996 में राजस्थान के समलेटी में हुए बस बम विस्फोट में 14 लोगों की मौत हो गई थी.

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Topics mentioned in this article
Supreme Court
Death Sentence
Bus Blast
Bomb Blast Case
Abdul Hamid