3 नए क्रिमिनल कानूनों के खिलाफ नहीं होगी 'सुप्रीम' सुनवाई, SC ने हाईकोर्ट को दिया ये निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह संवैधानिक वैधता का मामला है. हमें हाईकोर्ट की राय का लाभ मिलेगा. मद्रास हाईकोर्ट उनमें से है, जहां हमें आमतौर पर उनकी राय का इंतजार रहता है.

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  • SC ने 3 नए आपराधिक कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया है.
  • कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट से इन याचिकाओं पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करने के लिए कहा है.
  • सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस मामले को डिवीजन बेंच के सामने रखें.
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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने तीन नए आपराधिक कानूनों - भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को अपने पास ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया है और मद्रास हाईकोर्ट से इन पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करने को कहा है. 

जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह निर्देश फेडरेशन ऑफ बार एसोसिएशन्स ऑफ तमिलनाडु एवं पुडुचेरी की याचिका पर दिया. एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में  लंबित तीन आपराधिक कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को शीर्ष अदालत में ट्रांसफर करके सुनवाई की मांग की थी. 

अदालत ने आदेश में कहा कि इस मुद्दे के महत्व और रिट याचिकाओं की प्रभावी सुनवाई के इंतजार को देखते हुए हम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करते हैं कि वे मामले को एक डिवीजन बेंच के सामने रखें. हमारा आग्रह है कि इन मामलों की शीघ्र सुनवाई की जाए.

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि उच्च न्यायालय के समक्ष याचिकाओं पर सितंबर 2024 को नोटिस जारी किया गया था. उसके बाद जुलाई 2025 में उन्हें सूचीबद्ध किया गया. हालांकि अभी तक सुनवाई की कोई तारीख तय नहीं की गई है. वकील ने कहा कि मुश्किल यह है कि वे इन कानूनों का नाम भी नहीं बोल सकते. 

याचिकाकर्ताओं ने मामले को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग करते हुए दलील दी कि इसी तरह की याचिकाएं शीर्ष अदालत में पहले से लंबित हैं. लेकिन पीठ ने कहा कि वह उच्च न्यायालय की राय का लाभ उठाना चाहेगी. 

अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह संवैधानिक वैधता का मामला है. हमें हाईकोर्ट की राय का लाभ मिलेगा. यह उन उच्च न्यायालयों में से एक है, जहां हम आमतौर पर उनकी राय का इंतजार करते हैं. 

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दिलचस्प यह है कि हाईकोर्ट ने पिछले साल टिप्पणी की थी कि तीन नए आपराधिक कानूनों के नामकरण ने अराजकता पैदा कर दी है, भले ही इन कानूनों को बनाने का उद्देश्य अच्छा रहा हो. 

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