गेहूं और धान से आगे बढ़ने का समय.. सुप्रीम कोर्ट ने किसान संगठनों से कर दी बड़ी अपील

सुप्रीम कोर्ट ने आज एक अहम सुनवाई के दौरान कहा कि अब गेहूं और धान की पैदावार से आगे भी सोचने की जरूरत है.

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सुप्रीम कोर्ट का किसान संगठनों को सुझाव
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  • सुप्रीम कोर्ट ने आज एक अहम सुनवाई में किसान संगठनों से बड़ी अपील की है
  • शीर्ष अदालत ने कहा कि किसान संगठन अब गेहूं और धान की पारंपरिक फसलों से आगे सोचें
  • किसान महापंचायत की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने ये टिप्पणी की
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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने किसान संगठनों को अब गेंहू और धान की पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ने की बात कही है. कोर्ट ने किसान महापंचायत की उस जनहित याचिका पर सुनवाई दौरान ये टिप्पणी की जिसमें पीली मटर के ड्यूटी फ्री आयात को चुनौती दी गई है. शीर्ष अदालत ने कहा कि हमें ये देखना होगा कि क्या हमें उतना ही धान और गेहूं चाहिए जितना हम पैदा कर रहे हैं. अब गेहूं ही एकमात्र विकल्प नहीं है. 

गेहूं और दान से आगे बढ़ने का समय

किसानों के संगठन किसान महापंचायत ने अपनी याचिका में कहा है कि 2026 तक आयात शुल्क हटाने के फैसले से घरेलू दालों की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चली जाती हैं. इससे किसानों को नुकसान होता है. इसी दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि अब गेहूं और धान से आगे बढ़ने का समय है. 

केंद्र सरकार को भी दिया निर्देश 

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फसलों में विविधता पर केंद्र सरकार से नया नीति ढांचा मांगा है. अदालत ने केंद्र से कहा कि देश में कृषि नीति की समीक्षा कर गेहूं और धान के बजाय दालों जैसी वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए नया नीतिगत ढांचा तैयार किया जाए. अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि संबंधित मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय और समझ होनी चाहिए. 

दालों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन दिया जाए

कोर्ट ने कहा कि दालों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहन दिया जाए. कोर्ट ने कहा कि छोटे किसानों को दालें उगाने के लिए प्रोत्साहित MSP दिया जाए और उनकी उपज की समय पर खरीद सुनिश्चित की जाए. अदालत ने कहा कि पीली मटर की कीमत तय करते समय इस बात का ध्यान रखा जाए कि इससे देश में उगाई जाने वाली दालों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़े. 

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अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वे सभी हितधारकों की बैठक बुलाकर मौजूदा नीति की समीक्षा करें और एक बेहतर नीति ढांचा तैयार करें. पीठ ने अपने आदेश में कहा कि विचार-विमर्श का पूरा विवरण अदालत के समक्ष रिकॉर्ड पर रखा जाए. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत  की पीठ ने कहा कि यह समय है जब यह देखा जाए कि क्या देश को उतनी मात्रा में गेहूं और धान की जरूरत है जितना उत्पादन किया जा रहा है.

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