- सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों मामले पर आज सुनवाई की, अदालत ने सभी पक्षों की दलीले सुनी
- कोर्ट ने कहा कि कुत्ते सड़कों पर दौड़ते हैं और सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं
- बहस के दौरान कपिल सिब्बल के एक बयान पर शीर्ष अदालत ने नाराजगी भी जताई
आवारा कुत्तों पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आज वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को लताड़ भी लगाई. दरअसल, बहस के दौरान सिब्बल ने कहा कि कुत्ते सड़कों पर नहीं होते हैं बल्कि परिसरों में रहते हैं. इसी दलील पर शीर्ष अदालत ने सिब्बल पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने सिब्बल से पूछा कि क्या आप सच कह रहे हैं? आपकी जानकारी पुरानी लगती है. बचाव हमेशा इलाज से बेहतर होता है. सड़कों को कुत्तों से साफ और खाली रखना होगा. हो सकता है वे काटें नहीं, लेकिन फिर भी वे हादसों की वजह बनते हैं.
सिब्बल पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मुद्दा सिर्फ काटने का नहीं है. कुत्ते पीछा करते हैं, दौड़ते हैं और इससे सड़क दुर्घटनाएं होती हैं. चलती गाड़ियों वाली सड़कों पर यह एक बड़ी समस्या है. जब सिब्बल ने कहा कि कुत्ते सड़कों पर नहीं, बल्कि परिसरों में होते हैं, तो कोर्ट ने सख्त प्रतिक्रिया दी. कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि क्या आप गंभीर हैं? आपकी जानकारी पुरानी लगती है.
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आखिर संस्थागत परिसरों में कुत्तों की जरूरत ही क्यों?
बेंच ने सवाल उठाया कि हमें सड़कों, स्कूलों और संस्थागत परिसरों में कुत्तों की जरूरत ही क्यों है? इस पर सिब्बल ने दलील दी कि यदि कोई कुत्ता उग्र है या काटने की आशंका है, तो उसे सेंटर बुलाकर पकड़ा जाता है, नसबंदी की जाती है और फिर उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अब बस कुत्तों को काउंसलिंग देना ही बाकी रह गया है, ताकि वापस छोड़े जाने के बाद वह काटे नहीं. सिब्बल ने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में कही गई बात बताया, लेकिन कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई.
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सिब्बल ने दिया बाघ वाला उदाहरण
कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश में आवारा कुत्तों की आबादी को सफलतापूर्वक कैसे कम किया गया है, क्योंकि राज्य ने CSVR मॉडल लागू किया गया है. उन्होंने कहा कि अगर एक बाघ आदमखोर है तो हम सभी बाघों को मारा नहीं जाता है. उन्होंने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि नसबंदी हो, प्रदूषण कम हो.
..तो सबको रेबीज हो जाएगा
सिब्बल ने कहा कि इसके लिए एक प्रक्रिया है. इसे सीएसवीआर मॉडल कहा जाता है, जो विश्व स्तर पर स्वीकृत है. इसे पकड़ो, नसबंदी करो, टीका लगाओ, छोड़ दो कहते हैं. इसने उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में कुत्तों की आबादी को लगभग शून्य तक कम कर दिया है. सिब्बल ने कहा कि अगर हमारे पास रेबीज से संक्रमित और संक्रमित कुत्ते एक ही आश्रय में हों, तो सभी को रेबीज हो जाएगा.














