चूहों की आबादी बढ़ जाएगी, आवारा कुत्ते मामले की सुनवाई के दौरान SC में दिलचस्प दलीलें

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों मामले में सुनवाई फिर शुरू हुई.. कोर्ट में कल भी इस मामले की सुनवाई होगी.

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स्ट्रे डॉग मामले में सुनवाई
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले में फिर से सुनवाई शुरू हो गई है. जस्टिस विक्रमनाथ ,जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच कर रही है सुनवाई. कुत्तों पर सुनवाई के दौरान आज भी दिलचस्प दलीलें सामने आईं. वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने कहा कि जब कुत्तों को अचानक हटाया जाता है तो चूहों की आबादी बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि वो तो बीमारी फैलाने वाले होते हैं. उन्होंने दावा किया कि कुत्ते संतुलन बनाए रखते हैं. शीर्ष अदालत में आज इस मामले की सुनवाई खत्म हो गई अब कल फिर से होगी सुनवाई. 

कोर्ट इस मामले में सभी पक्षकारों- डाग लवर्स, कुत्तो काटने के शिकार लोगों , एनिमल राइट एक्टिविस्ट की ओर से पेश वकीलो की दलीलें विस्तार से सुन रहा है.

डीयू ने बताया कैसे किया कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण 

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ फैकल्टी (CLC) में आवारा कुत्तों के प्रबंधन के तरीके पर विस्तार से विचार किया. कॉलेज की ओर से बताया गया कि संस्थान के 8 छात्रों ने एक एनिमल लॉ सेल बनाकर 2024 में यह पहल शुरू की थी. छात्रों ने क्षेत्र में कुल 49 कुत्तों की पहचान की, जिनमें से अब तक 28 कुत्तों की नसबंदी (स्टरलाइज़ेशन) कराई जा चुकी है और शेष को इसी वर्ष नसबंदी कराने की प्रक्रिया जारी है. कॉलेज ने अदालत को बताया कि, इस पहल के बाद कुत्तों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. केवल एक कुत्ते के काटने की घटना सामने आई है. पिछले 10 वर्षों में CLC में डॉग बाइट की कोई घटना नहीं हुई. पूरे अभियान का खर्च कॉलेज/छात्र स्वयं उठा रहे हैं. कॉलेज की ओर से कहा गया कि नगर निगम और स्थानीय प्रशासन ने अदालत के कई निर्देशों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसके चलते कॉलेज को अपने स्तर पर कुत्तों को कैंपस से बाहर ले जाकर टीकाकरण, नसबंदी कराकर वापस लाना पड़ा.

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा सवाल 

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया, एक साल में इस प्रक्रिया के बाद क्या कुत्तों की आबादी बढ़ी है? इस पर वकील ने जवाब दिया कि नहीं, संख्या स्थिर बनी हुई है। हमने स्थिति को नियंत्रित कर लिया है. अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि देश में सरकारी स्वामित्व वाले केवल 5 डॉग शेल्टर हैं. ये शेल्टर केवल बीमार और घायल कुत्तों के लिए हैं. प्रत्येक शेल्टर की क्षमता लगभग 100 कुत्तों की है. कॉलेज की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के सार्वजनिक स्थानों और शैक्षणिक संस्थानों से कुत्तों को हटाने के निर्देशों को लागू करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा फिलहाल मौजूद नहीं है.

कुत्ता सूंघ कर पता कर लेता है कौन डरा है?

कोर्ट ने कहा कि कुत्ता उस इंसान को सूंघ कर पता लगा सकता है कि वो उससे डर रहा है. जब उसे ऐसा महसूस होता है तो वह हमला करता है. हम अपने पर्सनल अनुभव से बता रहे हैं. अगर उसे पता चलता है कि आप डरे हुए हैं, तो इस बात का ज्यादा चांस है कि वे आप पर हमला करेंगा. आपका पालतू कुत्ता भी ऐसा करेगा.

कुत्तों के काटने पर ऐसे लगी है रोक 

MCD के साथ काम करने वाली एनिमल वेलफेयर NGO की वकील करूणा नंदी ने कहा कि IIT दिल्ली में कुत्तों को लेकर समस्या थी. वे हॉस्टल और लैब के अंदर पहुंच जाते थे. हमारे NGO ने स्टाफ और स्टूडेंट्स के साथ मिलकर काम किया, वहां युद्ध स्तर पर ABC प्रोग्राम लागू किया गया. नतीजा यह हुआ कि पिछले 3 सालों में वहां रेबीज का कोई मामला सामने नहीं आया, कुत्तों को बिना कहीं और भेजे या परमानेंट डिटेंशन फैसिलिटी बनाए बिना उनके काटने की शिकायतें खत्म हो गईं. कुत्तों की माइक्रोचिपिंग और जियोटैगिंग की गई। जिससे उनका व्यवहार का पता चलता है. एडवोकेट करूणा नंदी ने फीडिंग ज़ोन से जुड़े दिल्ली हाई कोर्ट के एक फैसले का ज़िक्र करते हुए कहा कि फीडिंग ज़ोन लोकल RWA के साथ सलाह करके तय किए जाने चाहिए. इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई पूरी हुई कल फिर होगी सुनवाई.

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एमिकस सीनियर एडवोकेट गौरव अग्रवाल
- बाकी 4 राज्यों ने अब अपने एफिडेविट फाइल कर दिए हैं. 16 राज्यों का काम हो गया है, 7 बाकी हैं
- मैं रिवाइज्ड नोट सबमिट करूंगा 

सीनियर एडवोकेट सीयू सिंह: एनिमल वेलफेयर बोर्ड के SOP के संबंध में, 4 बड़े राज्यों ने औपचारिक आपत्तियां दर्ज की हैं
- यह प्रासंगिक हो सकता है
- एमिकस पुष्टि कर सकते हैं
- दिल्ली में चूहे और बंदरों का भी खतरा है
- जब कुत्तों को अचानक हटाया जाता है तो क्या होता है 
- चूहों की आबादी बढ़ जाती है
-  वे बीमारी फैलाने वाले होते हैं
- कुत्ते संतुलन बनाए रखते हैं 

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- जस्टिस मेहता: क्या कोई संबंध है? 
-हल्के-फुल्के अंदाज़ में, कुत्ते और बिल्लियां दुश्मन होते हैं
- हमें ज्यादा बिल्लियों को बढ़ावा देना चाहिए क्योंकि वे चूहों की दुश्मन हैं
- हमने हर कुत्ते को सड़क से हटाने का निर्देश नहीं दिया है
- उनके साथ नियमों के अनुसार व्यवहार किया जाना चाहिए 

सिंह: कुत्तों को उस तरीके से रेगुलेट किया जाए जो प्रभावी साबित हुआ है
-  नसबंदी और उसी इलाके में दोबारा छोड़ना 

जस्टिस मेहता: हर अस्पताल में कितने कुत्ते होने चाहिए, हमें बताएं? 
हर बेड के बगल में?

सिंह: JNU 1000 एकड़ में है. DU लगभग 70-80 एकड़ में है
-रेलवे क्षेत्रों की सीमाएं खुली हैं
-कुत्ते अंदर आ जाएंगे
-वहां बंदर भी हैं
-जो काम किया है वह है - ABC नियम - जब उन्हें ठीक से लागू किया जाता है
-हमने बताया है कि जब कुत्तों को बड़ी संख्या में शेल्टर में, भीड़भाड़ वाले माहौल में रखा जाता है, तो इससे दूसरी बीमारियाँ फैलती हैं
-इस कोर्ट ने नोट किया कि ABC नियमों और कोर्ट के आदेशों के बावजूद, बड़ी संख्या में राज्यों में उल्लंघन हुआ
-यह तथ्य कि राज्यों ने नियमों या आदेशों का उल्लंघन किया है, इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि नियमों को ही खत्म कर दिया जाए
-हम आदेश में बदलाव की मांग कर रहे हैं

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सीनियर एडवोकेट कृष्णन वेणुगोपाल (देश के पशु अधिकारों के अग्रणी विशेषज्ञ के लिए, जो 4 राज्यों के साथ काम कर रहे हैं): 
-मैं सहमत हूं कि अस्पताल के वार्ड में कुत्ते नहीं हो सकते
- मैं कह रहा हूं कि अब तक, वैधानिक नियमों को लागू करने की कोई इच्छाशक्ति नहीं रही है
- AWBI का SOP उनके अपने नियमों का उल्लंघन है
- प्रस्तावित तरीके का अनुमानित खर्च 26,800 करोड़ रुपये तक जा सकता है
-91,800 नए शेल्टर बनाने होंगे 

वेणुगोपाल: सुझाव - (1) नियमों को लागू करने के लिए कोई बजटीय आवंटन नहीं है
अगर हर जिले में एक AB सेंटर हो, तो इसकी लागत 1600 करोड़ रुपये होगी
 केंद्र सरकार के 5 मंत्रालयों को इसमें शामिल किया जाना चाहिए
हम एक सिंगल नोडल एजेंसी बनाने का सुझाव दे रहे हैं.

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परफॉर्मेंस लिंक ट्रिगर्स..
. कैपेसिटी बिल्डिंग में डिस्ट्रिक्ट लेवल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक मैंडेट
- अभी सिर्फ 66 AB सेंटर को ही मान्यता मिली है
- पूरे देश में 5.2 करोड़ कुत्ते हैं
- आबादी कंट्रोल करने के लिए, हमें इसे कई गुना बढ़ाना होगा
-  मैनपावर की भी समस्या है
- हमें एक स्पेशलाइज्ड फोर्स को ट्रेनिंग देनी होगी
- अगर मैं अपने कुत्ते की नसबंदी करवाना चाहता हूँ, तो इसका खर्च 10000 रुपये से ज्यादा आता है
- अगर हर सेंटर में बड़े पैमाने पर यह काम करना है, तो वेट्स को ट्रेनिंग देनी होगी
- हमारे पास ट्रेनिंग देने के लिए कोई सेंटर नहीं है! 
- लखनऊ में जो एक सेंटर है, वह 15 दिन के कोर्स में दूसरों को ट्रेनिंग दे सकता है
- कोविड के दौरान, सरकारों ने मिलकर स्थिति को संभाला था
- यही काम इसके लिए भी किया जा सकता है
 

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