बाहरी ताकतों से मिलती है PIL को फंडिंग.. CJI की सख्त टिप्पणी के साथ 40 साल पुराना 'एम.सी. मेहता' केस बंद

सुप्रीम कोर्ट ने 40 साल पुराने ऐतिहासिक 'एम.सी. मेहता' प्रदूषण मामले को औपचारिक रूप से बंद कर इसे Suo Motu केस का नया नाम दिया है. इस दौरान चीफ जस्टिस ने जनहित याचिकाओं के दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया.

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  • सुप्रीम कोर्ट ने 40 साल पुराने एम.सी. मेहता पर्यावरण मामले को बंद करने का आदेश दिया है
  • लंबित अंतरिम आवेदनों को नए मामले के तहत अलग-अलग रिट याचिकाओं के रूप में दर्ज करने निर्देश दिए
  • जनहित याचिकाओं के दुरुपयोग को लेकर कहा कि कुछ याचिकाएं तो देश के बाहर से आती हैं
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सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण कानून के मील के पत्थर माने जाने वाले 40 साल पुराने 'एम.सी. मेहता' मामले को बंद करने का आदेश दिया है. चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक याचिका का अब निस्तारण किया जाता है और इसमें अब कोई नया आवेदन स्वीकार नहीं होगा. कोर्ट  ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस पुराने केस में लंबित सभी अंतरिम आवेदनों को अब अलग-अलग स्वतंत्र रिट याचिकाओं के रूप में दर्ज किया जाए. कोर्ट ने जनहित याचिकाओं के दुरुपयोग को लेकर कहा कि कुछ याचिकाएं तो देश के बाहर से आती हैं.

अब नए शीर्षक के नाम से जानी जाएंगी सुनवाई

पुरानी याचिका को बंद करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण के मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए एक नया स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है. अब प्रदूषण से जुड़ी सुनवाई नए शीर्षक 'In Re: Issues of Air Pollution in the National Capital Region' के नाम से जानी जाएगी. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश देते हुए कहा कि पुराने मामले में लंबित सभी अंतरिम आवेदनों को अब नए मामले के तहत अलग-अलग रिट याचिकाओं के रूप में दर्ज किया जाएगा.

'बाहरी ताकतों से मिलता है फंड'

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने जनहित याचिकाओं के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए एक बड़ी टिप्पणी की. उन्होंने कहा, कुछ PIL देश के बाहर से आती हैं, जिन्हें बाहरी ताकतों से फंड मिलता है. वायु प्रदूषण जैसे संवेदनशील मामलों में कोर्ट की अनुमति के बिना कोई भी नई याचिका स्वीकार नहीं की जानी चाहिए.' कोर्ट ने रजिस्ट्री को सख्त आदेश दिया कि भविष्य में बिना पूर्व अनुमति के इस श्रेणी में किसी भी नए आवेदन या मिसलेनियस एप्लीकेशन पर विचार न किया जाए.

सुनवाई को प्रभावी बनाने के लिए नए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की निगरानी कर रही संस्था CAQM और संबंधित राज्यों को कड़े निर्देश जारी किए हैं. CAQM को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी सभी रिपोर्ट सुनवाई से पहले सभी पक्षकारों को उपलब्ध कराई जाएं. इसके साथ ही दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों को अपनी कम्प्लायंस रिपोर्ट समय से पहले फाइल और सर्कुलेट करनी होगी.

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