भारत-US ट्रेड डील से किसान बर्बाद हो जाएगा! शिवराज सिंह ने साफ कर दिया, विपक्ष को धो डाला

क्या भारत-अमेरिका ट्रेड डील से किसान बर्बाद हो जाएगा! विपक्ष के आरोपों पर आज केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला है. ऐसे आरोप लगाते हुए विपक्ष को शर्म आनी चाहिए.

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  • केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अमेरिका के साथ समझौते में किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं
  • केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अमेरिका से मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, दूध, पनीर आदि आयात नहीं होंगे
  • समझौते से बासमती चावल, मसाले, टेक्सटाइल, और अन्य क्षेत्र के निर्यातकों को नए अवसर मिलेंगे
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नई दिल्ली/सीहोर(एमपी):

भारत–अमेरिका समझौते को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष को कठोर शब्दों में घेरा.उन्होंने कहा कि हमारा विपक्ष हाय–तौबा मचा रहा था कि अमेरिका के साथ ऐसा समझौता हो जाएगा जिसमें भारत का किसान तबाह हो जाएगा,बर्बाद हो जाएगा,लुट जाएगा.शिवराज सिंह ने कहा कि ऐसे आरोप लगाए गए कि कहते हुए शर्म आती है. उन्होंने याद दिलाया कि यह वही नरेंद्र मोदी हैं,जिन्होंने कहा था देश नहीं झुकने दूंगा और यह भी कहा था कि चाहे कितनी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े,किसानों के हितों की रक्षा करेंगे.अभी जो USA के साथ समझौता हुआ है,इसके पहले 27 देशों के साथ यूरोपियन यूनियन के और उसके पहले जो FTA हुए हैं, आज के समझौते ने तो बता दिया है कि देश के और किसानों के हित पूरी तरह से सुरक्षित रखे गए हैं.

कृषि और डेयरी पर स्पष्ट सुरक्षा:ये उत्पाद अमेरिका से नहीं आएंगे

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) आए थे.किसानों की मुख्य चिंता पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि वह केवल किसानों के पक्ष की चर्चा करेंगे.हमारे प्रमुख अनाज मक्का,बड़ा हल्ला मचाया जा रहा था कि आ जाएगा,बिल्कुल नहीं आएगा। मक्का,गेहूं,चावल,सोयाबीन,पोल्ट्री,दूध,पनीर,इथेनॉल, तंबाकू,कई सब्जियां और उसके अलावा कृषि और डेयरी उत्पाद कई तरह के पूरी तरह से सुरक्षित रखे गए हैं.उन्होंने कहा कि इन उत्पादों पर भारत का बाजार भारत के किसानों के लिए सुरक्षित है.अमेरिका से न तो मक्का आएगा,न गेहूं,न चावल,न सोया,न पोल्ट्री उत्पाद,न दूध,न पनीर,न इथेनॉल,न तंबाकू और न ही कई संवेदनशील सब्जियां। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका से नहीं आएंगे,भारत के हितों का पूरी तरह से संरक्षण किया गया है.

निर्यात के नए अवसर:बासमती,मसाले और टेक्सटाइल को बढ़त

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस समझौते से देश के अन्य क्षेत्रों को भी लाभ होगा,विशेष रूप से हमारे निर्यातकों,MSME और युवाओं को.उन्होंने कहा कि भारतीय सामानों पर जो परंपरागत शुल्क था,वह घटकर लगभग 18 प्रतिशत हो जाएगा,जिससे टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर उत्पाद,ऑर्गेनिक केमिकल,होम डेकोर,हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी जैसे क्षेत्रों में विशाल बाजार और अवसर मिलेंगे.उन्होंने बताया कि जेनेरिक दवाओं,रत्नों, हीरों, विमान के पुर्जों और कई तरह के सामान पर शुल्क घटकर शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा और ‘Make in India' को मजबूती मिलेगी.

कृषि के संदर्भ में उन्होंने कहा कि बासमती चावल और मसालों को विशेष लाभ होगा.हरियाणा,पश्चिम उत्तर प्रदेश और पंजाब में बासमती उगाने वाले किसानों के लिए 18% टैरिफ वाले बाजार में नए अवसर खुलेंगे. उन्होंने उल्लेख किया कि पहले लगभग 63,000 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था,जो इस समझौते से और बढ़ने की संभावना है और टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास उत्पादक किसानों को भी फायदा होगा.

सीहोर के कार्यक्रम में बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान के अलावा  केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, ओडिशा के उपमुख्यमंत्री,कई राज्यों के कृषि मंत्री,शीर्ष वैज्ञानिक,ICAR–ICARDA के प्रतिनिधि,प्रगतिशील किसान,FPO,बीज और दाल मिल प्रतिनिधि जुटे थे.

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भारत की दलहन नीति और किसान हितों के मोर्चे पर एक साथ दो बड़ी घोषणाएं

एक तरफ अमलाहा (सीहोर) में खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' का रोडमैप तय हुआ,तो दूसरी तरफ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि दालें आयात करना हमारे लिए शर्म की बात है.अब भारत दालों का निर्यातक बनेगा और हालिया अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बावजूद भारत के किसान के हितों पर जरा सी भी आंच नहीं आने दी जाएगी.

केंद्र–राज्य साझेदारी का भरोसा

शिवराज सिंह चौहान ने म.प्र. के मुख्यमंत्री को इस वर्ष को कृषक कल्याण वर्ष घोषित करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि भारत सरकार, मध्य प्रदेश सरकार के इस निर्णय में पूरी तरह से कदम से कदम,कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करेगी,ताकि प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाई जा सके,फसलों का उत्पादन बढ़े और वैल्यू एडिशन के नए अवसर तैयार हों उन्होंने यह भी कहा कि सभी राज्यों के कृषि मंत्री अपने–अपने राज्यों में भी हम सब मिलकर अलग–अलग रोडमैप बनाएंगे,ताकि प्रत्येक राज्य की ज़रूरतों के अनुरूप दलहन मिशन को आगे बढ़ाया जा सके.

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उन्होंने म.प्र.के किसानों को बधाई देते हुए कहा कि आज भी दलहन के उत्पादन में म.प्र.नंबर वन है देश में,लेकिन साथ ही चेताया कि दलहन का क्षेत्र घट रहा है,जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने माना कि किसान वही फसल बोता है,जिसमें अधिक फायदा हो,गेहूं में होगा तो गेहूं बोएंगे और चना में होने लगे तो चना बोएंगे,इसलिए दलहन फसलों की उत्पादकता और लाभ दोनों बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

किसान को उचित मूल्य मिले,यह हम सुनिश्चित करेंगे

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीज से लेकर बाजार तक की पूरी व्यवस्था पर सरकार का फोकस है.अच्छा उत्पादन होने पर किसान को उचित मूल्य मिले,यह हम सुनिश्चित करेंगे.उन्होंने बताया कि क्लस्टर स्तर पर दाल मिल लगाने को प्रोत्साहन दिया जाएगा और दाल मिल स्थापित करने पर भारत सरकार ₹25 लाख तक की सब्सिडी देगी,ताकि जहां दाल का उत्पादन होगा,वहीं उसकी प्रोसेसिंग और बिक्री हो और किसानों को वैल्यू एडिशन का सीधा लाभ मिल सके.चौहान ने कहा कि इस मिशन के तहत देशभर में 1,000 दाल मिलें खोली जाएंगी,जिनमें से 55 दाल मिलें मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्लस्टरों में स्थापित की जाएंगी,जिससे प्रदेश के किसानों को विशेष लाभ मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

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कोई भी बीज अब दिल्ली में रिलीज नहीं होगा

बीज सुधार और वितरण की नई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हम एक फैसला कर रहे हैं.कोई भी बीज अब दिल्ली में रिलीज नहीं होगा,अलग-अलग प्रदेशों में जाकर किसान के बीच बीज रिलीज करेंगे.उन्होंने बताया कि क्लस्टर मॉडल के जरिए खेती को मजबूती दी जाएगी,किसानों को जोड़कर संगठित रूप से उत्पादन बढ़ाया जाएगा और हर किसान को पूरा सहयोग मिलेगा.क्लस्टर में आने वाले किसानों को बीज किट दी जाएगी और आदर्श खेती के लिए एक हेक्टेयर पर ₹10,000 की सहायता दी जाएगी,ताकि अच्छे बीज, बेहतर तकनीक और पर्याप्त वित्तीय सहयोग के साथ दलहन उत्पादन को नई ऊंचाई तक पहुंचाया जा सके.

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उन्होंने अमलाहा स्थित संस्थान, ICARDA और ICAR के शोध कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि मसूर,चना,उड़द,बटरा,मूंग आदि की उत्पादकता बढ़ाने,जल्दी पकने वाली किस्में विकसित करने,उन्नत बीज तैयार करने और रोग–मुक्त फसलें उगाने पर काम युद्धस्तर पर चल रहा है,ताकि किसान को दलहन बोने पर ज्यादा फायदा हो.

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