अजित पवार की 'बगावत' के कुछ साल बाद चाचा शरद ने अपनी आत्मकथा में क्यों लिखा उन्हें दूसरा मौका देना एक गलती थी?

शरद पवार, अजित पवार के केवल चाचा ही नहीं थे बल्कि उनके राजनीतिक गुरु भी थे. कभी एक दूसरे की परछाईं रहे पवार चाचा-भतीजा बाद में वैचारिक मतभेद और राजनीतिक अलगाव की कहानी भी बने पर रिश्ते बरकरार रहे.

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  • 23 नवंबर 2019 को फोन पर यह खबर मिली कि अजित पवार राजभवन में डिप्टी सीएम की शपथ ले रहे हैं. यह भूकंप की तरह था.
  • अजित ने इसके बाद बातचीत में मेरी पत्नी प्रतिभा को बताया कि जो कुछ भी हुआ वह गलत था और नहीं होना चाहिए था.
  • शरद पवार ने आत्मकथा 'लोक माझे संगति' में ये लिखा, पर बाद में ये भी बताया, "उन्हें दूसरा मौका देना एक गलती थी."
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महाराष्ट्र की राजनीति में जब भी चाचा-भतीजे की चर्चा होगी, शरद पवार और अजित पवार का जिक्र उसमें सबसे पहले होगा. कभी एक दूसरे की परछाईं रहे पवार चाचा-भतीजा बाद में वैचारिक मतभेद और राजनीतिक अलगाव की कहानी भी बने पर रिश्ते बरकरार रहे. शरद पवार ने अपनी किताब 'लोक माझे संगति' में अजित पवार के बारे में बहुत कुछ बताया है. इसमें उन्होंने यह भी बताया कि कैसे अजित पवार के अलग होने की खबर भूकंप के झटके के जैसा था पर साथ ही वो यह भी कहते हैं कि अजित पवार एक भावुक इंसान हैं. शरद पवार के अपने भतीजे की बगावत पर लिखे शब्दों में कड़वाहट नहीं नजर आती है.

यह किताब जहां शरद पवार के राजनीतिक जीवन पर आधारित है वहीं इसके कई पन्ने उनके भजीते अजित पवार की कहानियों से रंगे हैं. 2017 में इस किताब का पहला संस्करण और मई 2023 में दूसरा संस्करण आया. इसी दूसरे संस्करण में उन्होंने अजित पवार के बीजेपी के साथ जाने के निर्णय के बारे में विस्तार से बताया है.

जब अजित पवार ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए बीजेपी के साथ जाने का फैसला किया और उपमुख्यमंत्री बने, तब शरद पवार को इसकी भनक तक नहीं थी. किताब में उन्होंने बताया कि, "मुझे 23 नवंबर 2019 को फोन पर यह खबर मिली कि अजित पवार और एनसीपी के कुछ विधायक शपथ ले रहे हैं. यह एक भूकंप की तरह था."

किताब के मुताबिक शरद पवार तब शिवसेना और कांग्रेस के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बनाने की जुगत में लगे थे. उन्होंने तब अजित पवार के इस कदम को आश्चर्यजनक और धोखा दोनों ही बताया. उन्होंने कहा कि यह फैसला बिना उनकी सहमति के लिया गया था और गैर बीजेपी सरकार बनाने के वादे के खिलाफ था.

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Photo Credit: Rajkamal Prakashan

शरद पवार ने बताया क्यों अलग हुए थे अजित?

तब देवेंद्र फड़णवीस की सरकार केवल तीन दिन ही चली थी. इसके बाद महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे महाविकास अघाड़ी गठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री बने, अजित पवार यहां भी उपमुख्यमंत्री बनाए गए.

पवार ने किताब में दावा किया, "जब मैंने फडणवीस और अजित पवार के शपथ ग्रहण के दौरान राजभवन में मौजूद कुछ एनसीपी विधायकों को फोन किया तो मुझे पता चला कि वहां केवल 10 विधायक मौजूद हैं, उनमें से एक ने बताया कि उन्हें बताया गया है कि मैंने इसका समर्थन किया है."
"मैंने तुरंत उद्धव ठाकरे को फोन किया और उनसे कहा कि अजित ने जो कुछ भी किया है वह गलत है और एनसीपी और मैं इसका समर्थन नहीं करते. एनसीपी विधायकों को राजभवन ले जाने के लिए मेरे नाम का इस्तेमाल किया गया था. मैंने उनसे कहा कि वह इसी मुद्दे पर सुबह 11 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मेरे साथ आएं."

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पवार ने यह भी लिखा कि अजित ने ऐसा कदम क्यों उठाया उसका भी उन्हें एहसास हुआ. यह इसलिए हुआ क्योंकि कांग्रेस केसाथ सरकार बनाने पर जो चर्चा हो रही थी उसका अनुभव सुखद नहीं था. 

पवार ने बताया, "कांग्रेस के साथ बातचीत में हमने नरम रुख अपनाया था लेकिन उनकी तरफ से प्रतिक्रिया सही नहीं आ रही थी. यहां तक कि एक बैठक में मैंने भी अपना आपा खो दिया था और यह कह बैठा था कि अब आगे कुछ भी बात करने का कोई मतलब नहीं है, इससे मेरी अपनी पार्टी के कई नेता हैरान रह गए थे."

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इसी किताब में पवार ने बताया, "मैं समझता हूं कि अजित कांग्रेस के इसी रवैये से परेशान थे, कांग्रेस के साथ उस बातचीत से मेरे बाहर जाने के तुंरत बाद मेरे भतीजे अजित पवार ने भी वो मीटिंग छोड़ दी थी." 

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अजित पवार के बगावत पर शरद पवार ने क्या किया?

जब शरद पवार को पता चला कि अजित पवार ने 10 विधायकों के साथ पार्टी तोड़ने की बगावत की है तो उन्होंने फौरन सभी विधायकों की मीटिंग बुलाई. इस किताब में उन्होंने बताया, "मैंने सभी विधायकों को वापस लाने के लिए तुरंत पहला कदम उठाया. वाईबी चव्हाण सेंटर में विधायकों की मीटिंग बुलाई. वहां 54 में से 50 विधायक मौजूद थे तो मुझे यकीन हो गया कि बगावत खत्म हो गई है."

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मतभेद, मनभेद में नहीं बदला

हालांकि किताब में यह भी बताया गया है कि कैसे इस संकट के बाद उन्होंने परिवार के अंदर इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की, जिसमें पहली बार उनकी पत्नी भी शामिल हुईं.

शरद पवार ने बताया, "अजित मेरी पत्नी प्रतिभा का बहुत सम्मान करते हैं. यह पहली बार था जब प्रतिभा राजनीति का हिस्सा बनीं. अजित प्रतिभा से मिले और उन्हें बताया कि जो कुछ भी हुआ वह गलत था और ऐसा नहीं होना चाहिए था. यह हमारे लिए इस मुद्दे को खत्म करने के लिए काफी था."
शरद पवार इसके लिए अपनी पत्नी प्रतिभा पवार के किरदार का जिक्र करते हुए लिखते हैं कि "प्रतिभा ने तनाव कम करने में अहम भूमिका निभाई और 2019 के विद्रोह के बावजूद वो अजित को वापस पार्टी में ले आईं."

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Photo Credit: ANI

भतीजे अजित के बारे में चाचा शरद ने और क्या लिखा?

इसी किताब में शरद पवार ने अजित पवार को एक भावुक इंसान बताया है. उनके बगावत की घटना का जिक्र करते हुए भी शरद पवार ने उनकी तारीफ में कोई कसर नहीं छोड़ी. शरद पवार ने किताब में बताया कि "विधानसभा में अजित पवार की बहुत इज्जत है और ऐसे कई लोग हैं जो उन्हें फॉलो करते हैं."

शरद पवार अपने भजीते अजित के काम करने के अंदाज के भी मुरीद थे. उन्होंने किताब में बताया, "उनका आक्रामक काम करने का तरीका उनका प्लस पॉइंट है." यही कारण है कि शरद पवार ने उन्हें महाविकास अघाड़ी की सरकार में भी उन्हें डिप्टी सीएम का पोस्ट दिलवाया.

किताब में शरद पवार ने बताया, "बहुत सोचने-समझने के बाद, मैंने तय किया कि अजित को डिप्टी सीएम बनाया जाए. फिर जिस तरह उन्होंने कोविड महामारी के दौरान काम किया है, वह उस फैसले के सही होने का सबूत है.”

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दूसरा मौका देना गलती

हालांकि अपनी किताब में शरद पवार ने बगावत के बाद अजित पवार की वापसी का जिक्र तो किया पर उनपर कोई आरोप नहीं लगाया बल्कि परिस्थितियों का उल्लेख किया. वहीं इसमें बाद के घटनाक्रमों का जिक्र नहीं है जिसकी वजह से 2023 में एनसीपी में बंटवारा हो गया था. हां उन्होंने इस किताब के दूसरे संस्करण में यह जरूर लिखा कि "अजित को दूसरा मौका देना एक गलती थी."

बता दें कि शरद पवार, अजित पवार के केवल चाचा ही नहीं थे बल्कि उनके राजनीतिक गुरु भी थे. इसी महीने महाराष्ट्र में हुए निकाय चुनावों में वो चाचा की एनसीपी के साथ मिलकर चुनाव में उतरे थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस विमान दुर्घटना में दुखद निधन से पहले उन्होंने अपने चाचा और राजनीतिक गुरु शरद पवार के साथ सभी पुराने गिले-शिकवे दूर कर लिए थे.

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