तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर ‘सनातन' टिप्पणी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. विपक्ष के नेता और DMK विधायक उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान देते हुए कहा कि 'सनातनम, जो लोगों को बांटता है, उसे खत्म होना चाहिए.'
उनके इस बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है और भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. बीजेपी प्रवक्ता सीआर केसवन ने उदयनिधि पर हमला बोलते हुए इसे 'विभाजनकारी राजनीति' और 'जहरीला बयान' करार दिया. उन्होंने कहा कि ऐसी बातें आस्था और भावनाओं का अपमान हैं और जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी.
पहले भी दिए थे ऐसे बयान
उदयनिधि स्टालिन का यह बयान नया नहीं है. इससे पहले भी 2023 में उन्होंने इसी तरह की टिप्पणी की थी, जिस पर देशभर में विवाद हुआ था और मामला अदालत तक पहुंच गया था. हाल ही में मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने भी इस विवाद से जुड़े एक मामले में कहा था कि उनके बयान को ‘हेट स्पीच' के रूप में देखा जा सकता है.
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सामने बैठे सीएम विजय
हालांकि विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उदयनिधि ने राजनीतिक शालीनता की भी बात की. उन्होंने मुख्यमंत्री विजय के साथ सहयोग की इच्छा जताते हुए कहा कि सत्ता और विपक्ष को मिलकर राज्य के विकास के लिए काम करना चाहिए.
वंदे मातरम् पर जताई आपत्ति
इसके अलावा उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह में ‘वंदे मातरम्' बजाए जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि तमिलनाडु के राज्य गीत को कभी पीछे नहीं रखा जाना चाहिए.
चुनावों में DMK की हुई हार
बता दें कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में DMK को हार का सामना करना पड़ा है और विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) ने सरकार बनाई है. ऐसे में उदयनिधि अब विधानसभा में विपक्ष के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं. कुल मिलाकर, उदयनिधि स्टालिन के इस बयान ने तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर वैचारिक बहस और सियासी टकराव को तेज कर दिया है, जिसका असर आने वाले दिनों में और गहराता दिख सकता है.














