- CM सुखविंदर सिंह ने मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों की सैलरी में 6 महीने तक कटौती का आदेश दिया.
- राज्य सरकार ने वित्तीय संकट के कारण इस वर्ष के बजट को घटाकर कुल पचपन हजार नौ सौ अठाईस करोड़ रुपये किया है.
- मंत्रियों की सैलरी में 30 %, विधायकों की 20% प्रतिशत और अधिकारियों की तनख्वाह में 30% तक की कटौती लागू होगी.
Himachal Budget 2026: हिमाचल प्रदेश में खर्च कम करने के लिए CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने घोषणा की कि मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों की सैलरी से 6 महीनों तक कटौती की जाएगी. इसके अलावा सरकार ने वित्तीय संकट को देखते हुए कुल बजट में 3,586 करोड़ रुपये की कमी करने का फैसला भी किया है. विधानसभा में 2026-27 का बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी वर्गों से 6 महीने तक सहयोग की अपील की और कहा कि राज्य अब आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा.
सरकार ने इस साल का बजट 2025-26 के 58,514 करोड़ रुपये से घटाकर 54,928 करोड़ रुपये किया है क्योंकि, मुख्यमंत्री के अनुसार, केंद्र ने राजस्व घाटा अनुदान (RDG) देना बंद कर दिया है, जिससे राज्य पर भारी वित्तीय दबाव पड़ा है.
CM की सैलरी में 50% की कटौती
सुक्खू ने बताया कि उनकी अपनी सैलरी का 50%, मंत्रियों की सैलरी का 30% और विधायकों की सैलरी का 20% अगले छह महीनों तक रोका जाएगा. मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, सचिव और DGP जैसे वरिष्ठ अफसरों की तनख्वाह में 30% कटौती होगी, जबकि अन्य अधिकारियों की सैलरी में 20% की कटौती की जाएगी. ADGP से DIG रैंक तक के पुलिस अधिकारियों की सैलरी में भी 30% की कटौती होगी, जबकि SP और अन्य कर्मचारियों से 20% वेतन रोका जाएगा. कर्मचारियों को मिलने वाली 3% वेतन वृद्धि भी छह महीने के लिए टाल दी गई है और इस अवधि में Group D कर्मचारियों को यह वृद्धि नहीं मिलेगी. सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि न्यायपालिका से भी इसी तरह के स्वैच्छिक वेतन स्थगन की अपील की जा सकती है.
25,000 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान
मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने बजट भाषण में हिमाचल प्रदेश के सामने मौजूद बड़े वित्तीय संकटों का ज़िक्र करते हुए कहा कि राज्य को BBMB और GST मुआवज़े के लगभग 7,000 करोड़ रुपये अब तक नहीं मिले हैं. साथ ही GST युक्तिकरण की वजह से राज्य को करीब 25,000 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ है.
बढ़ते कर्ज के बोझ को देखते हुए उन्होंने कहा कि अब सरकार लोकलुभावन फैसलों से दूर रहेगी और वित्तीय स्थिति सुधारने पर ध्यान देगी. इन चुनौतियों के बावजूद सरकार ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं. चुनावी वादों को धीरे-धीरे पूरा करने की बात दोहराते हुए उन्होंने ग्रामीण इलाकों में 300 से अधिक रुके हुए विकास कार्यों के लिए 500 करोड़ रुपये जारी किए. एक लाख गरीब परिवारों को राहत देने के लिए “मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार योजना” शुरू की जाएगी, जिसमें 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली और चरणबद्ध आर्थिक सहायता दी जाएगी. सामाजिक सुरक्षा में भी बढ़ोतरी की गई है, जैसे—दृष्टिबाधित लोगों की पेंशन बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह करना, और महिलाओं, बच्चों व समाज कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए 1,544 करोड़ रुपये का बजट तय करना.
कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों के लिए भी बड़ा प्रावधान किया गया है. प्रमुख फसलों का MSP बढ़ाने, पशुपालन के लिए 734 करोड़ रुपये देने, राज्य किसान आयोग बनाने और खानाबदोश समुदायों के लिए 300 करोड़ रुपये की नई योजना शामिल है. कुक्कुट विकास के लिए 62 करोड़ रुपये और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए “राजीव गांधी प्राकृतिक कृषि योजना” का भी विस्तार किया जाएगा.
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