सुप्रीम कोर्ट से वंतारा को राहत, हाथियों के ट्रांसफर पर मिली क्‍लीन चिट

सुप्रीम कोर्ट ने स्‍पष्‍ट किया कि यदि सभी कानूनी प्रावधान पूरे किए जाते हैं तो इस पर आपत्ति की कोई वजह नहीं है. कोर्ट ने यह भी बताया कि उसकी ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) ने पूरी प्रक्रिया से संतुष्टि जताई है और सभी नियामकीय उपायों को सही पाया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रिलायंस फाउंडेशन की वाइल्‍डलाइफ इनिशिएटिव 'वंतारा' राहत दी है. अदालत ने कहा कि वन विभाग से मंदिर के हाथियों का वंतारा में ट्रांसफर गलत नहीं है, बशर्ते तय प्रक्रिया का पालन किया जाए. ये टिप्पणी उस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिसमें हाथियों को गुजरात स्थित वाइल्डलाइफ फैसिलिटी में ले जाने पर सवाल उठाए गए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने स्‍पष्‍ट किया कि यदि सभी कानूनी प्रावधान पूरे किए जाते हैं तो इस पर आपत्ति की कोई वजह नहीं है. कोर्ट ने यह भी बताया कि उसकी ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) ने पूरी प्रक्रिया से संतुष्टि जताई है और सभी नियामकीय उपायों को सही पाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि वंतारा में जानवरों की देखभाल और संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम, जैसे चीता का प्रजनन, हाथियों का रेस्क्यू और स्पिक्स मकाउ की पुनर्स्थापना वैध है. कोर्ट ने कहा कि सभी पशु अधिग्रहण, चाहे वे इंपोर्ट से जुड़े हों या अन्य प्रक्रियाओं से, मान्य परमिट और बहु-स्तरीय जांच के बाद ही होते हैं.

रिलायंस फाउंडेशन को फैसले से राहत 

रिलायंस फाउंडेशन पहले ही कह चुका है कि वह जांच का स्वागत करता है और पारदर्शिता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है. अदालत का यह फैसला वंतारा के लिए बड़ा संबल माना जा रहा है, जिसे हाल के महीनों में हाथियों की तस्करी और संसाधनों के दुरुपयोग जैसी आरोपों का सामना करना पड़ा था.

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बता दें कि रिलायंस के जामनगर स्थित रिफाइनरी परिसर के भीतर हजारों एकड़ में फैला वंतारा आज दुनिया के सबसे बड़े निजी तौर पर संचालित एनिमल केयर सेंटरों में शुमार है, जहां हाथियों समेत कई प्रजातियों का बचाव और संरक्षण किया जा रहा है.

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