20 दिन अमेरिकी कब्जे में रहने के बाद लौटा हिमाचल का लाल, स्‍कॉटलैंड से सीधे घर पहुंचे रक्षित चौहान

रूसी कंपनी के ऑयल टैंकर मैरिनेरा में कुल 28 लोग सवार थे. ऑयल टैंकर को अमेरिका ने कब्जे में लिया था. टैंकर पर सवार 28 लोगों सहित रक्षित चौहान को करीब 20 दिनों तक स्कॉटलैंड में रखा गया. हालांकि अब रक्षित हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में अपने घर लौट आए हैं.

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रक्षित की सुरक्षित वापसी के बाद परिवार में खुशी का माहौल है.
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  • हिमाचल प्रदेश के पालमपुर निवासी रक्षित चौहान अमेरिका के कब्जे में 20 दिन रहने के बाद सुरक्षित घर लौटे हैं.
  • अमेरिका ने 7 जनवरी को रूसी कंपनी के ऑयल टैंकर मैरिनेरा को उत्तरी अटलांटिक महासागर में कब्जे में लिया था.
  • टैंकर में सवार 28 लोगों में तीन भारतीय थे, जिनमें रक्षित चौहान मर्चेंट नेवी कैडेट के रूप में सेवा दे रहे थे.
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हिमाचल प्रदेश के पालमपुर निवासी रक्षित चौहान 20 दिन अमेरिका के कब्जे में रहने के बाद सुरक्षित अपने घर पहुंच गए हैं. अमेरिका ने सात जनवरी को वेनेजुएला भेजे गए रूसी कंपनी के ऑयल टैंकर मैरिनेरा को उत्तरी अटलांटिक महासागर में अपने कब्‍जे में ले लिया था. टैंकर पर सवार तीन भारतीयों में एक रक्षित चौहान भी शामिल थे. उनके घर लौटते ही परिवार में खुशी का माहौल है. माता-पिता ने मिठाई खिलाकर उनका स्वागत किया. 

रूसी कंपनी के ऑयल टैंकर मैरिनेरा में कुल 28 लोग सवार थे और इनमें से तीन भारतीय भी थे. इस ऑयल टैंकर को अमेरिका ने अपने कब्जे में लिया था. रक्षित चौहान इस टैंकर पर मर्चेंट नेवी कैडेट के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे. अमेरिकी कब्‍जे के बाद चौहान को करीब 20 दिनों तक स्कॉटलैंड में रखा गया. 

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19 फरवरी को है भाई की शादी

परिवार के मुताबिक, जब रक्षित अमेरिका के कब्जे में थे, तब घर में चिंता और उदासी का माहौल बना हुआ था. इसी बीच 19 फरवरी को होने वाली रक्षित के बड़े भाई की शादी की तैयारियां भी धीमी पड़ गई थीं. रक्षित की सुरक्षित वापसी के बाद अब घर में फिर से शादी जैसा माहौल बन गया है. 

रक्षित की रिहाई के लिए सांसद और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विदेश मंत्री से आग्रह किया था, जिसके बाद केंद्र सरकार के प्रयासों से उनकी सुरक्षित घर वापसी संभव हो सकी. रक्षित चौहान और उनके माता-पिता ने भारत सरकार और प्रदेश सरकार का आभार जताया है. 

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दुर्व्‍यवहार नहीं किया गया: रक्षित

रक्षित ने बताया कि अमेरिका के कब्जे में रहने के दौरान उनके साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार नहीं किया गया और न ही गिरफ्तार किया गया था. हालांकि अमेरिकी सेना ने उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया था, जिसके चलते परिवार से संपर्क टूट गया था. अब सुरक्षित घर लौटने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है. 

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