हरिवंश का फिर से उपसभापति चुना जाना लगभग तय, ऐलान कल; विपक्ष ने नहीं किया नामांकन

बतौर जदयू सांसद कार्यकाल समाप्त होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरिवंश को राज्यसभा के लिए नामित किया था. अब सरकार फिर से हरिवंश को राज्यसभा में उपसभापति बनाने जा रही है. 

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राज्यसभा सांसद हरिवंश.
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  • राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए हरिवंश का लगातार दूसरी बार निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है.
  • नामांकन की अंतिम समय सीमा तक विपक्ष की ओर से किसी सदस्य का नामांकन नहीं होने के कारण निर्विरोध चुनाव संभव है.
  • पांच सदस्यों ने हरिवंश के नाम का प्रस्ताव रखा है जिसमें जगत प्रकाश नड्डा प्रमुख प्रस्तावक हैं.
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नई दिल्ली:

राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए होने वाले चुनाव में हरिवंश का लगातार दूसरी बार चुना जाना तय माना जा रहा है. सदन के सभापति द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, इस पद के लिए चुनाव शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 को होगा. मालूम हो कि इससे पहले हरिवंश जदयू के राज्यसभा सांसद के नाते उच्च सदन में मौजूद थे. जहां उन्हें उपसभापति की जिम्मेवारी दी गई थी. बतौर जदयू सांसद कार्यकाल समाप्त होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरिवंश को राज्यसभा के लिए नामित किया था. अब सरकार फिर से हरिवंश को राज्यसभा में उपसभापति बनाने जा रही है. 

विपक्ष की ओर से कोई नामांकन नहीं

सदन की कार्यवाही के अनुसार, नामांकन की अंतिम समय सीमा गुरुवार (16 अप्रैल) दोपहर 12:00 बजे समाप्त हो गई. इस निर्धारित समय तक विपक्षी दलों की ओर से किसी भी सदस्य का नाम प्रस्तावित नहीं किया गया है. इसके परिणामस्वरूप हरिवंश का निर्वाचन अब केवल एक औपचारिकता मात्र रह गया है और उनके निर्विरोध चुने जाने की पूरी संभावना है.

उपसभापति के प्रस्तावित किए गए 5 प्रस्ताव

निर्धारित समय तक कुल पांच सदस्यों ने हरिवंश के नाम का प्रस्ताव पेश किया है-

  1. जगत प्रकाश नड्डा (प्रस्तावक) एवं एस. फांगनोन कोन्याक (समर्थक)
  2. नितिन नबीन (प्रस्तावक) एवं बृज लाल (समर्थक)
  3. निर्मला सीतारमण (प्रस्तावक) एवं सुरेंद्र सिंह नागर (समर्थक)
  4. संजय कुमार झा (प्रस्तावक) एवं उपेंद्र कुशवाहा (समर्थक)
  5. जयंत चौधरी (प्रस्तावक) एवं मिलिंद मुरली देवरा (समर्थक)

इन सभी सूचनाओं में एक ही प्रस्ताव दिया गया है कि हरिवंश को राज्यसभा का उपसभापति चुना जाए.

उपसभापति के चयन की क्या होगी प्रक्रिया

संसदीय परंपरा के अनुसार, कल सदन में इन प्रस्तावों को एक-एक करके रखा जाएगा. संभावना है कि जे.पी. नड्डा द्वारा पेश किए गए पहले प्रस्ताव को ही सदन द्वारा ध्वनि मत (voice vote) से स्वीकार कर लिया जाएगा. एक बार प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद, सभापति औपचारिक रूप से हरिवंश के नाम की घोषणा करेंगे. इसके बाद परंपरा का पालन करते हुए सत्ता पक्ष के नेता और विपक्ष के नेता उन्हें सम्मानपूर्वक आसन तक लेकर जाएंगे.

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