राजस्‍थान : कोटा में 3 छात्रों की आत्‍महत्‍या के बाद कोचिंग सेंटरों पर लगाम की तैयारी, कानून बना सकती है सरकार 

प्रस्तावित कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षण संस्थान अपने यहां काउंसलिंग केन्द्र खोलें, प्रतियोगी परीक्षा में अव्वल रहने वाले विद्यार्थियों का 'महिमामंडन' बंद करें और तनाव की समस्या से निपटने के लिए कदम उठाए.

विज्ञापन
Read Time: 27 mins
‘राजस्थान निजी शैक्षिक नियामक प्राधिकरण विधेयक-2022’ बजट सत्र में पेश करने की संभावना है.
जयपुर:

राजस्थान सरकार कोचिंग सेंटर सहित निजी शिक्षण संस्थानों पर लगाम रखने के लिए नियामक प्राधिकरण स्थापित करने हेतु एक कानून बनाने की प्रक्रिया में है. प्रस्तावित कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उक्त शिक्षण संस्थान अपने यहां काउंसलिंग केन्द्र खोलें, प्रतियोगी परीक्षा में अव्वल रहने वाले विद्यार्थियों (टॉपरों) का 'महिमामंडन' बंद करें और तनाव की उस समस्या से निपटने के लिए कदम उठाए कतिपय जिसके चलते हाल ही में तीन छात्रों ने आत्महत्या कर ली. कानून के मसौदे में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए किसी कोचिंग सेंटर में दाखिला लेने से पहले छात्रों के लिए एप्टीट्यूड टेस्ट कराने और उनके सामने किसी तरह का तनाव की स्थिति आने पर हेल्पलाइन का प्रस्ताव किया गया है. 

राजस्थान सरकार द्वारा बहुप्रतीक्षित ‘राजस्थान निजी शैक्षिक नियामक प्राधिकरण विधेयक-2022' विधानसभा के आगामी बजट सत्र में पेश किए जाने की संभावना है. इस विधेयक के तहत राज्य सरकार एक नियामक प्राधिकरण के माध्यम से छात्रों में तनाव सहित विभिन्न मुद्दों को हल करने का प्रयास करेगी. 

इसके दायरे में स्कूल, कॉलेजों के साथ-साथ वे कोचिंग सेंटर भी आएंगे जो छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करते हैं. हाल ही में कोटा के एक कोचिंग सेंटर में पढ़ने वाले तीन छात्रों ने आत्महत्या कर ली. कथित तौर पर उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि वे वहां पढ़ाई का दबाव नहीं झेल पा रहे थे. मसौदा विधेयक में ट्यूशन फीस, वार्षिक शुल्क वृद्धि, अध्ययन सामग्री की लागत और ट्यूशन केंद्रों सहित निजी संस्थानों द्वारा लगाए गए अन्य शुल्कों के नियमन का भी प्रस्ताव है. 

प्राधिकरण का अध्यक्ष कोई जाना माना शिक्षाविद होगा. यह प्राधिकरण छात्रों को तनाव से बचाने के लिए अध्ययन के घंटे, छुट्टी के दिन तय करने और परीक्षाओं के बीच के अंतर को ठीक करने के प्रावधान भी करेगा. विधेयक में भारी जुर्माने बार-बार अपराध करने वालों के लिए 5 करोड़ रुपये तक, का प्रस्ताव है. 

मसौदे में छात्रों को नौकरी के विकल्पों के बारे में जानकारी देने के लिए करियर काउंसलिंग सेल बनाने का जिक्र है. मसौदा कहता है कि अन्य छात्रों को किसी तरह की 'हीनता' की भावना से बचाने के लिए नियामक प्राधिकरण 'फर्जी विज्ञापन' और 'टॉपर्स की महिमा' को हतोत्साहित करने के उपाय भी करेगा. यह कोचिंग सेंटरों द्वारा अपने छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने के बारे में झूठे दावों से भी निपटेगा. 

इसके अनुसार, ‘‘शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की मानसिक और शारीरिक भलाई सुनिश्चित करने के लिए, प्राधिकरण छात्रों की नियमित परामर्श, मनोरंजन और सुरक्षा के लिए नियम बनाएगा. यह हर संस्थान में एक परामर्श और सलाह प्रकोष्ठ की स्थापना को अनिवार्य करेगा.'' इसी तरह छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष निर्देश जारी किए जाएंगे. निजी शिक्षण संस्थानों में विकलांग छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए भी प्रावधान होंगे. 

Advertisement

मसौदे में कहा गया है कि कोचिंग सेंटर में दाखिले से पहले छात्रों के लिए अनिवार्य योग्यता परीक्षा होगी - और इसके परिणाम उनके माता-पिता के साथ साझा किए जाएंगे. प्राधिकरण छात्रों और अभिभावकों के लिए 24x7 हेल्पलाइन स्थापित करना अनिवार्य करेगा. प्रस्तावित कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर निजी संस्थानों को अधिकतम एक करोड़ रुपये का जुर्माना देना होगा. बार-बार उल्लंघन करने पर जुर्माना 5 करोड़ रुपये तक हो सकता है. 

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने, राज्य सरकार ने कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को मानसिक सहायता और सुरक्षा प्रदान करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे. दिशा-निर्देशों के अनुसार अगर कोई छात्र आईआईटी और चिकित्सा संस्थानों की प्रवेश परीक्षाओं में विफल रहता है तो उन्हें करियर विकल्पों के बारे में बताया जाए. 

Advertisement

एक अधिकारी ने तब कहा था कि किसी छात्र के संस्थान छोड़ने की स्थिति में उनके पास रिफंड का भी प्रावधान होना चाहिए. 

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विधेयक को विधानसभा के अगले सत्र में पेश किए जाने की संभावना है. 

राज्य सरकार ने पिछले माह प्रदेश में संचालित कोचिंग संस्थानों में पढ़ने/रहने वाले विद्यार्थियों को मानसिक सहयोग एवं सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से दिशा-निर्देश जारी किये थे. दिशानिर्देशों का उद्देश्य छात्रों के लिए तनाव मुक्त और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना था. दिशानिर्देशों ने शिकायतों को दर्ज करने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल का भी सुझाव दिया. देश भर से दो लाख से अधिक छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए कोटा में ट्यूशन ले रहे हैं और लगभग 3,500 छात्रावासों में या कहीं और पेइंग गेस्ट के रूप में रह रहे हैं. 

Advertisement

उनमें से तीन ने लगभग एक सप्ताह पहले कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. नीट की तैयारी कर रहे अंकुश आनंद (18) और जेईई की तैयारी कर रहे उज्ज्वल कुमार (17) ने सोमवार सुबह अपने पीजी के कमरों में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली. दोनों बिहार के रहने वाले थे. पुलिस ने बताया कि तीसरा छात्र प्रणव वर्मा (17) मध्य प्रदेश का रहने वाला था और वह नीट की तैयारी कर रहा था. उसने रविवार देर रात अपने हॉस्टल में कथित तौर पर कुछ जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली. शुरुआती पूछताछ में पता चला कि आनंद और कुमार अपने कोचिंग सेंटर में पढ़ाई में पिछड़ रहे थे. 

ये भी पढ़ें :

* राजस्थान : न्यायाधीश के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज
* राजस्थान के कोटा में 3 कोचिंग स्‍टूडेंट्स ने कथित तौर पर खुदकुशी की
* राजस्थान की जनता ने BJP को नकारा, सरदारशहर सीट पर कांग्रेस की जीत पर बोले CM अशोक गहलोत

Advertisement

हेल्‍पलाइन : 
वंद्रेवाला फाउंडेशन फॉर मेंटल हेल्‍थ  9999666555 पर कॉल करें, या help@vandrevalafoundation.com पर लिखें
TISS iCall    022-25521111 (सोमवार से शनिवार तक उपलब्‍ध - सुबह 8:00 बजे से रात 10:00 बजे तक)

(अगर आपको सहारे की ज़रूरत है या आप किसी ऐसे शख्‍स को जानते हैं, जिसे मदद की दरकार है, तो कृपया अपने नज़दीकी मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ के पास जाएं)

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
Featured Video Of The Day
Sambhal Violence Report: संभल रिपोर्ट का राजनीतिक 'Demography' Connection! क्यों हर जगह यही शब्द?
Topics mentioned in this article