राजस्थान में पंचायत चुनाव का रास्ता साफ, SC ने परिसीमन के खिलाफ याचिका खारिज कर तय कर दी तारीख

राजस्थान में पंचायती राज चुनावों का रास्ता साफ करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने टिप्पणी की कि राज्य की लोकतांत्रिक गतिविधि की न्यायालय द्वारा जांच से परहेज़ किया जाना चाहिए.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • राजस्थान में पंचायत चुनाव प्रक्रिया और परिसीमन को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है
  • कोर्ट ने टिप्पणी की कि राज्य की लोकतांत्रिक गतिविधि की जांच में अदालतों को दखल से परहेज करना चाहिए
  • कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में दखल का कोई आधार नहीं है, चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

राजस्थान में पंचायती राज चुनावों को लेकर चल रहे कानूनी गतिरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने राज्य में अंतिम परिसीमन की अधिसूचना और चुनावी प्रक्रिया को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है. इस दौरान कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य की लोकतांत्रिक गतिविधि की न्यायालय द्वारा जांच से परहेज़ किया जाना चाहिए. अदालत के इस फैसले से 15 अप्रैल तक चुनाव पूरा होने का रास्ता खुल गया है. 

हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस  विपुल एम. पंचोली की पीठ ने जय सिंह द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए ये फैसला सुनाया. याचिका में राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अंतर्गत राज्य द्वारा किए गए परिसीमन के संबंध में जारी परिसीमन अधिसूचनाओं एवं प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ता ने 21 जनवरी 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच द्वारा पारित फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें डी.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 792/2026 को खारिज करते हुए राज्य सरकार द्वारा जारी परिसीमन अधिसूचनाओं की वैधता को बरकरार रखा गया था.  

याचिकाकर्ता ने क्या दलीलें दीं?

  • याचिकाकर्ता का कहना था कि परिसीमन अधिसूचना जारी करते समय राज्य ने अनिवार्य वैधानिक प्रावधानों का पालन नहीं किया. 
  • आरोप लगाया कि मुख्यालय की दूरी और निवासियों को होने वाली असुविधा के संबंध में दायर आपत्तियों पर विधिवत विचार नहीं किया गया. 
  • याचिका में दावा किया गया कि ग्राम पंचायत मुख्यालय के स्थानांतरण का जो फैसला लिया गया, वो मनमाना था.

इस वजह से मामले में आया पेच

यह चुनौती खासतौर से ग्राम पंचायत सिल्लारपुरी के पुनर्गठन से पैदा हुई थी, जिसमें पहले सिल्लारपुरी (जनसंख्या: 1254), खानी डांगियां (जनसंख्या: 364) और रायपुर जाटान (जनसंख्या: 1700) राजस्व ग्राम शामिल थे. पुनर्गठन के लिए गठित मंत्रिस्तरीय उपसमिति ने आम लोगों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से मिली राय के आधार पर फैसला लिया और सर्वाधिक जनसंख्या वाले राजस्व ग्राम रायपुर जाटान में मुख्यालय स्थानांतरित करने को मंजूरी दी. इसके बाद पिछले साल 28 दिसंबर को संशोधित अधिसूचना संख्या 878 जारी कर दी गई, जिसके द्वारा ग्राम पंचायत रायपुर जाटान प्रकाशित की गई. 

ये भी देखें- मुख्यमंत्री आवास पर बनेगी पंचायत-निकाय चुनाव की रणनीति, सीएम भजनलाल शर्मा बीजेपी कार्यकर्ताओं से करेंगे संवाद

राज्य सरकार ने क्या तर्क दिए?

सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराजन और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा पेश हुए और कहा कि परिसीमन की पूरी प्रक्रिया राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के अनुरूप की गई. सार्वजनिक रूप से नियमानुसार आपत्तियां आमंत्रित की गईं और उन पर विचार किया गया. मंत्रिस्तरीय उपसमिति ने आपत्तियों और सुझावों पर विचार करके पुनर्गठन को मंजूरी प्रदान की. 

अंतिम मतदाता सूची 25 फरवरी तक

ये भी कहा गया कि हाईकोर्ट ने पुनर्गठन की प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी करने निर्देश दिया था. आदेश के अनुरूप 28 दिसंबर 2025 को अधिसूचना जारी की गई. जनवरी 2026 में सभी पंचायती राज संस्थाओं के वार्डों के गठन का काम पूरा कर लिया गया. राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों का प्रारूप जारी करके आपत्तियां आमंत्रित की चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दीं. बताया गया कि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 25 फरवरी को प्रस्तावित है. राज्य सरकार ने पूरी चुनाव प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 तक पूरी करने का आश्वासन दिया है. 

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट ने की अहम टिप्पणियां 

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस मामले को लेकर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं. कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने परिसीमन प्रक्रिया के हर पहलू की जांच कर ली है. सुप्रीम कोर्ट खुद पहले पंचायती राज संस्थाओं और वार्डों के परिसीमन से संबंधित मुख्य निर्णय के खिलाफ दायर इसी तरह की चुनौतियों पर विचार करके एसएलपी खारिज कर चुका है.  

हाईकोर्ट के आदेश में दखल नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका खारिज करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के निष्कर्षों में दखल देने का कोई आधार नहीं है. चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, ऐसे में इस चरण पर हाईकोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता. चीफ जस्टिस की बेंच ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित समयसीमा यानी 15 अप्रैल तक चुनाव पूरा कर लिया चाहिए. इसमें किसी भी तरह की देरी केवल अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण ही हो सकती है. 

Advertisement

ये भी देखें- Panchayat Election: राजस्थान में 14,600 से ज्यादा पंचायतों में चुनाव की तैयारी, वोटर लिस्ट फाइनल; मार्च में तारीखों का एलान संभव

Featured Video Of The Day
Rajasthan Chemical Factory: Bhiwadi की केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग, झुलसकर 7 मजदूरों की मौत