- पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर बीती रात छात्रों का भारी हंगामा हुआ. इस कारण कई घंटों तक अफरातफरी मची रही.
- ट्रेन लेट होने और समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्रों का गुस्सा भड़क उठा.
- हंगामा शांत करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी. इस हंगामे की पूरी कहानी 5 वीडियो में समझें.
Patliputra Station Student Protest: बिहार की राजधानी पटना में स्थित पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर बीती रात छात्रों का भारी हंगामा हुआ. मद्य निषेध विभाग की भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की भारी भीड़ ने स्टेशन पर जमकर बवाल काटा, पथराव किया. जिससे दो-तीन घंटे स्टेशन पर भारी अफरातफरी मची रही. ट्रेनों का परिचालन भी बाधित हुआ. पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े, हवा में फायरिंग करनी पड़ी. छात्रों के हंगामे के कारण पटना आईजी जितेंद्र राणा सहित कई पुलिस के जवान भी घायल हुए हैं. पटना आईजी ने बताया कि अब स्थिति सामान्य है. हालांकि पाटलिपुत्र स्टेशन पर अब भी भारी संख्या में पुलिस के जवान तैनात हैं.
4210 पदों की भर्ती के लिए आज बिहार में हो रही परीक्षा
आज रविवार 14 जून को बिहार में मद्य निषेध सिपाही के 1685, कक्षपाल के 2417 और चलंत दस्ता सिपाही के 108 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित हो रही है. कुल 4210 पदों के लिए होने वाली इस परीक्षा के लिए बिहार के अलग-अलग जिलों में सेंटर बनाए गए हैं. परीक्षा दो पाली में हो रही है. पाटलिपुत्र स्टेशन पर हंगामा इस परीक्षा की पहली पाली में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों द्वारा किया गया.
5 वीडियो से जानते हैं हंगामे की पूरी कहानी
रविवार को दो पालियों में आयोजित होने वाली इस भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों की भारी भीड़ आधी रात पाटलिपुत्र पर स्टेशन पर जुटी थी. लेकिन अभ्यर्थी जिस ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, वो कथित तौर पर लगातार लेट होती जा रही थी. जिससे छात्रों का गुस्सा भड़क उठा. जिसके बाद छात्रों का हंगामा शुरू हुआ.
पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे, फायरिंग भी की
पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया और ट्रेन में तोड़-फोड़ की खबरें आईं. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया, चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं और लाठीचार्ज किया. हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं.
असामाजिक तत्वों ने चेन पुलिंग की, स्पेशल ट्रेन के बाद भी हंगामाः डीएम
पटना डीएम डॉ. त्यागराजन ने हंगामे के बारे में बताया, "आधी रात के आस-पास हमें खबर मिली कि कुछ लोग हंगामा कर रहे हैं. हमने उनसे बार-बार गुज़ारिश की कि वे हंगामा न करें और परीक्षा देने वाले छात्रों का सहयोग करें. लेकिन, कुछ असामाजिक तत्वों ने बार-बार इमरजेंसी चेन खींची और कई तरह की मांगें रखीं, जैसे कि स्पेशल ट्रेनों की मांग, जबकि पहले से ही दो स्पेशल ट्रेनें मौजूद थीं... उन्होंने उन छात्रों को भी रोका जो जाना चाहते थे. इन वजहों से हमें हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. अब स्थिति पूरी तरह सामान्य है और ट्रेनें रवाना हो चुकी हैं; परीक्षा देने वालों के लिए तय ट्रेनें पहले ही निकल चुकी हैं। ट्रेनों का संचालन भी सामान्य रूप से चल रहा है."
हंगामे के बारे में आईजी ने क्या कहा?
हंगामे के बारे में आईजी जितेंद्र राणा ने कहा कि 200-300 छात्र थे, जो ट्रेन को खोलने नहीं दे रहे थे. उन्हें पहले समझाने की कोशिश की गई. लेकिन वो आक्रोशित होकर पथराव करने लगे. जिसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस को सुरक्षित दिशा में हवाई फायरिंग करनी पड़ी. आईजी ने बताया कि लगभग 2-3 घंटे हंगामा हुआ. पहली पाली के कुछ छात्र शायद समय पर सेंटर नहीं पहुंच पा रहे थे, इसलिए हंगामा किया. आपको चोट भी लगी है कि इस सवाल पर आईजी ने कहा कि वो प्रक्रिया का हिस्सा है. हमारे कुछ जवानों को भी चोट लगी है. आईजी जितेंद्र राणा ने आगे कहा कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई होगी. वीडियोग्राफी की गई है.
प्लेटफॉर्म पर दूर-दूर तक फैले दिखे पत्थर
छात्रों के इस हंगामे की कहानी सुबह पाटलिपुत्र स्टेशन से सामने आई एक वीडियो में नजर आई. इस वीडियो में पाटलिपुत्र स्टेशन के प्लेटफॉम पर दूर-दूर तक पत्थर फैले नजर आए. कांच के टुकड़े भी बिखड़े नजर आए.
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया- हजारों की भीड़ थी, मेरी दुकान तोड़ दी
हंगामे के प्रत्यक्षदर्शी और स्टेशन पर एक दुकान चलाने वाले वेंडर संजय कुमार शर्मा ने कहा, "शुरुआत में लोगों ने ट्रेनें रोक दी थीं और उन्हें आगे नहीं बढ़ने दे रहे थे. प्रशासन रुकावट हटाने के लिए पहुंचा, लेकिन भीड़ टस से मस नहीं हुई. इसी बीच, भारी हंगामा हुआ और हिंसा भड़क उठी. आप मेरी दुकान के ठीक सामने इसका नतीजा देख सकते हैं. पूरी दुकान तोड़-फोड़ दी गई है. अंदर बड़े-बड़े पत्थर फेंके गए. मैं बमुश्किल अपनी जान बचाकर भाग पाया. वरना, पता नहीं मेरे साथ क्या होता. छात्र बहुत ज़्यादा गुस्से में थे... वे हज़ारों की संख्या में थे... वे असल में परीक्षा देने आए थे... लेकिन उन्हें ट्रेन नहीं मिल पाई क्योंकि ट्रेनें बहुत कम थीं और छात्र बहुत ज़्यादा..."
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