दुनिया छोड़ गया अपनी ही कब्र खुदवाने वाला इंसान, रोज वहां लगाता था झाड़ू

इंद्रय्या ने अपनी पत्नी की कब्र के बगल में ही अपनी कब्र बनवाई थी और वहां जीवन और मृत्यु के सत्य को दर्शाने वाला संदेश लिखी एक पट्टिका भी लगवाई थी. निधन के बाद उन्‍हें उसी कब्र में दफना दिया गया है.

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  • नक्‍का इंद्रय्या ने अपने जीवनकाल में खुद की कब्र बनवा ली थी ताकि बच्चों को अंतिम संस्कार में बोझ न उठाना पड़े.
  • तेलंगाना के रहने वाले इंद्रय्या का 11 जनवरी को निधन हुआ. उन्हें उनकी खुदवाई कब्र में ही दफनाया गया
  • इंद्रय्या ने अपनी पत्नी की कब्र के पास जीवन और मृत्यु के सत्य को दर्शाने वाला संदेश लिखी पट्टिका भी लगवाई थी.
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हैदराबाद:

मृत्‍यु की चर्चा से ही लोग घबरा जाते हैं, लेकिन 80 साल के नक्‍का इंद्रय्या इस मामले में बेहद अनूठे थे. उन्‍होंने अपने जीते जी ही सालों पहले स्‍वयं की कब्र बनवा ली थी. इसके चलते वह देशभर में सुर्खियों में भी रहे थे. तेलंगाना के लक्ष्मीपुरम गांव के निवासी इंद्रय्या का 11 जनवरी को निधन हो गया. उन्‍हें उसी कब्र में दफना दिया गया, जिसे उन्‍होंने खुद के लिए खुदवाया था. उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया था कि उनकी मृत्यु के बाद उनके बच्चों को अंतिम संस्कार के दौरान किसी तरह का बोझ न उठाना पड़े.

इंद्रय्या ने अपनी पत्नी की कब्र के बगल में ही अपनी कब्र बनवाई थी और वहां जीवन और मृत्यु के सत्य को दर्शाने वाला संदेश लिखी एक पट्टिका भी लगवाई थी. वह नियमित रूप से उस स्थान पर जाते, आसपास की सफाई करते, पौधों को पानी देते और शांत बैठकर आत्मचिंतन करते थे. उनका जीवन निस्वार्थ सेवा और दानशीलता से परिपूर्ण रहा.

गांव के लिए कई अच्‍छे काम किए

उनके बड़े भाई नक्का भूमय्या ने कहा, “उन्होंने अपनी कब्र खुद खुदवाई और गांव में एक चर्च भी बनवाया. उन्होंने गांव के लिए कई अच्छे काम किए. अपने जीवनकाल में उन्होंने अपनी संपत्ति अपने चार बच्चों में बांट दी, उनके लिए घर बनवाए और परिवार में नौ शादियां कराईं.”

एक अन्य ग्रामीण श्रीनिवास ने इंद्रय्या के जीवन सिद्धांत को याद करते हुए कहा, “जो कुछ आप जमा करते हैं, वह छूट जाता है, लेकिन जो आप दूसरों को देते हैं, वह हमेशा आपके साथ रहता है.”

अंतिम इच्‍छा की पूरी, उसी कब्र में दफनाया

रविवार को उनके निधन के बाद इंद्रय्या की अंतिम इच्छा पूरी हुई और उन्हें उसी कब्र में दफनाया गया जिसे उन्होंने अपने हाथों से तैयार किया था. अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए.

इंद्रय्या ने पहले कहा था, “मैंने चार-पांच घर, एक स्कूल और एक चर्च बनवाया है और अब अपनी कब्र भी. मैं बहुत खुश हूं. कब्र बनवाने से कई लोगों को दुख होता है, लेकिन मुझे खुशी है.”

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दार्शनिक अंदाज में इंद्रय्या ने कहा कि मृत्यु अटल है और कोई भी व्यक्ति अपने साथ धन-दौलत लेकर नहीं जा सकता.

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