नागपुर हिंसा मामला: आरोपी फहीम खान को बड़ी राहत, अदालत ने दी जमानत

फहीम खान के वकील अश्विन इंगोले ने कहा कि हमने अदालत में यह स्पष्ट रूप से साबित किया कि फहीम खान का इस हिंसा को भड़काने में कोई भी हाथ नहीं था. पुलिस ने उनके खिलाफ देशद्रोह जैसा गंभीर आरोप लगाया था, लेकिन कोर्ट ने हमारे तर्कों को स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत दे दी.

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पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया, जिनमें फहीम खान भी शामिल थे.
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  • नागपुर में मार्च में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में आरोपी फहीम खान को अदालत ने जमानत दे दी है.
  • हिंसा की शुरुआत झंडे जलाने की घटना से हुई थी, जिसमें तीन अधिकारियों सहित 33 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए थे.
  • फहीम खान पर पुलिस ने देशद्रोह जैसे गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों को स्वीकार कर जमानत दी.
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नागपुर:

नागपुर हिंसा मामले में बड़ा मोड़ आ गया है. इस मामले में अदालत से आरोपी फहीम खान को बड़ी राहत मिली है. फहीम खान पर नागपुर में मार्च में भड़की सांप्रदायिक हिंसा को लेकर गंभीर आरोप लगे थे. हालांकि अब अदालत ने फहीम खान को जमानत दे दी है. औरंगजेब कब्र विवाद को लेकर नागपुर में हिंसा भड़क उठी थी और तीन अधिकारियों सहित 33 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए थे.

इस मामले में फहीम खान के वकील अश्विन इंगोले ने कहा, “हमने अदालत में यह स्पष्ट रूप से साबित किया कि फहीम खान का इस हिंसा को भड़काने में कोई भी हाथ नहीं था. पुलिस ने उनके खिलाफ देशद्रोह जैसा गंभीर आरोप लगाया था, लेकिन कोर्ट ने हमारे तर्कों को स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत दे दी."

क्या था नागपुर हिंसा मामला?

17 मार्च को नागपुर के एक इलाके में अचानक हिंसा भड़क उठी थी. शुरुआत कुछ लोगों द्वारा झंडे जलाने की घटना से हुई, लेकिन बाद में हालात बेकाबू हो गए. पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया, जिनमें फहीम खान भी शामिल थे.

अदालत में बचाव पक्ष ने साफ किया कि “यह दो धर्मों के बीच सीधी भिड़ंत नहीं थी और ना ही फहीम खान ने भीड़ को भड़काया. उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सबूतों के अभाव में टिक नहीं पाए."

सोमवार को जेल से बाहर आ सकते हैं फहीम 

सरकारी पक्ष और बचाव पक्ष दोनों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फहीम खान को जमानत देने का आदेश दिया. इससे पहले भी साइबर क्राइम और एक अन्य केस में फहीम खान को जमानत मिल चुकी है. अब सोमवार को उनकी जेल से रिहाई संभव है.

बता दें कि इसी साल 17 मार्च को नागपुर के कई हिस्सों में उस समय बड़े पैमाने पर पथराव और आगजनी की खबरें आईं, जब यह अफवाह फैली कि छत्रपति संभाजीनगर जिले में स्थित औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान एक पवित्र पुस्तक की पंक्तियां लिखी चादर कथित तौर पर जलाई गई है.

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हिंसा के बाद कोतवाली, गणेशपेठ, तहसील, लकड़गंज, पचपावली, शांति नगर, सक्करदरा, नंदनवन, इमामबाड़ा, यशोधरा नगर और कपिल नगर पुलिस थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया था.

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