तमिलनाडु सरकार में बड़ा फेरबदल होने की खबरें आ रही हैं.ऐसी चर्चा है कि राज्य के युवा कल्याण और खेल विकास मंत्री उदयनिधि स्टालिन को अगस्त में उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है.46 साल के उदयनिधि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे हैं.अगर ऐसा होता है तो यह उदयनिधि की अपने पिता की ही तरह की पदोन्नति होगी.एमके स्टालिन 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद उपमुख्यमंत्री बनाए गए थे.
डीएमके में उदयनिधि स्टालिन का उदय
डीएमके सूत्रों के मुताबिक उदयनिधि की पदोन्नति एमके स्टालिन की अमेरिका यात्रा से पहले हो जाएगी.सूत्रों का कहना है कि इसका मकसद मुख्यमंत्री पर काम के बोझ को कम करना है.राज्य में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसे देखते हुए उदयनिधि को पदोन्नति महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इससे पहले इस साल जनवरी में भी इसी तरह की खबरें आईं थीं, लेकिन तब सीएम स्टालिन ने इन खबरों को अफवाह बताया था.
चेपक-तिरुवल्लिकेनी के विधायक उदयनिधि 'रेड जायंट्स मूवीज' नाम की फिल्म कंपनी के मालिक हैं. यह कंपनी तमिल और अन्य दक्षिण भारतीय भाषाओं में फिल्मों का निर्माण और वितरण का काम करती है. उदयनिधि ने अपनी राजनीतिक पारी का आगाज पांच साल पहले ही किया था. साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने डीएमके की युवा शाखा के प्रमुख के रूप में पूरे प्रदेश की यात्रा की थी.इस दौरान उन्हें देखने-सुनने के लिए हर जगह बड़ी भीड़ उमड़ती थी.
इसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में डीएमके ने उदयनिधि को सुरक्षित मानी जाने वाली चेन्नई की चेपक-तिरुवल्लिकेनी सीट से उम्मीदवार बनाया.चुनाव के दौरान उदयनिधि ने पूरे राज्य में प्रचार किया. इस दौरान वो अपने साथ एक ईंट रखते थे. उसे लोगों को दिखाते हुए कहते थे कि कैसे एआईडीएमके-बीजेपी की सरकार ने मदुरै में बनने वाले एम्स के काम को पूरा नहीं किया.
इस चुनाव के बाद प्रदेश में डीएमके की सरकार बनी. उदयनिधि के पिता एमके स्टालिन मुख्यमंत्री बने. कुछ महीने बाद ही उन्होंने उदयनिधि को अपनी कैबिनेट में शामिल किया. उन्होंने समाज कल्याण और खेल विकास विभाग का मंत्री बनाया गया.
उदयनिधि को मिली जिम्मेदारियां
इसके बाद उदयनिधि का कद डीएमके और सरकार में बढ़ता ही चला गया.डीएमके के सोशल मीडिया हैंडल पर उन्हें प्रमुखता से जगह दी जाती है.सरकार और पार्टी में बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने फिल्मी करियर की ओर ध्यान देना कम कर दिया. पिछले साल आई 'मैमन्नन'को एक अभिनेता के रूप में उनकी अंतिम फिल्म बताया गया था.उदयनिधि की 'रेड जायंट्स मूवीज'अभी भी दक्षिण भारत की प्रमुख फिल्म कंपनियों में से एक है.
द्रविड़ राजनीति करने वाले डीएमके में उदयनिधि का विरोध नहीं होता है.डीएमके में परिवारवाद को बढ़ावा देने वाले एमके स्टालिन पहले व्यक्ति नहीं हैं.परिवार को पार्टी में आगे बढ़ाने का काम उनके पिता एम करुणानिधि ने शुरू किया था.उन्होंने ने ही सबसे पहले अपने दोनों बेटों एम अलागिरी,एमके स्टालिन और बेटी कनिमोझी के लिए पार्टी के दरवाजे खोले थे.हालांकि उन्होंने यह तबतक नहीं होने दिया,जबतक वो शारीरिक रूप से सक्रिय रहे.इससे पहले उन्होंने परिवार को राजनीति से दूर रखा.
डीएमके में वंशवाद की राजनीति
डीएमके में एमके स्टालिन को अपने बड़े भाई एमके अलागिरी से मुकाबला करना पड़ा.लेकिन उनके पिता उनके साथ थे, इसलिए उन्हें बड़े भाई से निपटने में कोई परेशानी नहीं हुई.एक समय डीएमके में अलागिरी की अच्छी पोजिशन थी. लेकिन एमके स्टालिन ने उन्हें 2014 में गलतबयानी के आरोप में पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया.इसके बाद से अलागिरी के सितारे गर्दिश में हैं.अब वो राजनीति छोड़ खेती-बाड़ी में मन लगाते हैं. स्टालिन की पार्टी और सरकार पर पूरी पकड़ है,ऐसे में उदयनिधि को किसी विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा.हालांकि उदयनिधि के अपने ताऊ अलागिरी के बेटे दयानिधि अझागिरी से अच्छे संबंध हैं.
उदयनिधि की पत्नी किरुथिगा फैशन,पब्लिकेशन, फिल्म और डाक्यूमेंट्री बनाने में सक्रिय रहती हैं.वो 'इनबाक्स 1305' नाम की लाइफस्टाइल मैगजीन का संपादन करती हैं.उन्होंने 2018 में आई फिल्म 'काली' का निर्देशन किया था.उन्होंने जी 5 पर आई बेव सीरीज 'पेपर रॉकेट' का भी निर्देशन किया है.
एमके स्टालिन के परिवार पर आरोप
उदयनिधि और उनके परिवार पर कई तरह के आरोप लगते रहे हैं.इनमें से एक है फिल्म उद्योग पर आधिपत्य जमाने का. तमिलनाडु में 2006 से 2011 तक डीएमके की सरकार थी. उस दौरान स्टालिन परिवार पर फिल्म निर्माण, वितरण और प्रदर्शन पर एकाधिकार स्थापित करने की कोशिश करने के आरोप लगे थे.बाद के दिनों में ये आरोप सही भी साबित हुए हैं.उदयनिधि की 'रेड जायंट्स मूवीज'का तमिलनाडु फिल्म उद्योग में दबदबा है.
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