- मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण भारत में एलपीजी की आपूर्ति को लेकर अफवाहें और अस्थायी दबाव बढ़े हैं.
- घरेलू एलपीजी खपत तेजी से बढ़ी है जबकि उत्पादन स्थिर रहने से आयात पर निर्भरता बढ़ी है.
- भारत के एलपीजी आयात का अधिकतर हिस्सा पश्चिमी एशियाई देशों से आता है जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है.
मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे तनाव का असर अब भारत में घरेलू ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताओं के रूप में दिखाई देने लगा है. देश के कई शहरों में एलपीजी (LPG) की उपलब्धता को लेकर अफवाहें तेजी से फैल रही हैं. कुछ स्थानों पर लोग गैस सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारों में देखे जा रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर भी कमी के दावे वायरल हो रहे हैं. इसी बीच, सरकार और संबंधित एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है.
प्रशासन का कहना है कि अनावश्यक panic buying ने अस्थायी दबाव जरूर बढ़ाया है, लेकिन देश में गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. कुछ राज्यों में वितरण में देरी के चलते होटल व छोटे भोजनालयों ने अस्थायी बंदी की आशंका जताई है, हालांकि, अधिकारियों ने ऐसे दावों को आधारहीन बताया है. अब हम आपको बताएंगे कि मौजूदा समय में एलपीजी और पीएनजी की वास्तविक स्थिति क्या है और इन दावों के पीछे सच क्या है.
खपत में तेज उछाल, उत्पादन अब भी ठहरा
पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि भारत में एलपीजी की खपत और घरेलू उत्पादन के बीच की दूरी लगातार बढ़ती जा रही है. बीते सालों में घर‑घर तक LPG कनेक्शन पहुंचने से मांग में तेज उछाल आया है. वहीं, घरेलू उत्पादन लगभग स्थिर रहा है. नतीजा यह है कि उपभोग तेजी से ऊपर जा रहा है, लेकिन उत्पादन उस रफ्तार से नहीं बढ़ पा रहा, जिससे दोनों के बीच का अंतर पहले से कहीं ज्यादा चौड़ा हो गया है.
खपत लगभग पांच गुना बढ़कर 31.3 मिलियन टन पहुंच गई
वित्त वर्ष 2000 में भारत में LPG की खपत 6.4 मिलियन टन थी, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 4.5 मिलियन टन ही था. लेकिन वित्त वर्ष 2025 तक खपत लगभग पांच गुना बढ़कर 31.3 मिलियन टन पहुंच गई. वहीं, उत्पादन बढ़कर सिर्फ 12.8 मिलियन टन के आसपास ही ठहर गया. बढ़ती मांग और सीमित उत्पादन के बीच इस अंतर को आयात के सहारे पूरा किया गया. यही कारण है कि LPG आयात, जो वर्ष 2000 में केवल 1.6 मिलियन टन था, 2025 में बढ़कर 20.6 मिलियन टन से अधिक हो गया और अब भारत की LPG आपूर्ति का मुख्य आधार बन चुका है.
भारत के कुल LPG आयात का 90% से अधिक हिस्सा पश्चिमी एशियाई देशों से आता है और यह पूरा रास्ता होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. पूर्ण रूप से नाकाबंदी न होने के बावजूद, युद्ध‑जोखिम, बीमा कवर वापस लिए जाने और जहाजों की आवाजाही में देरी जैसे कराणों का प्रभाव भारत की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को कमजोर करने के लिए काफी है. इसका असर एजेंसी स्तर पर अस्थायी कमी, वितरण में अव्यवस्था और बाजार में फैलती घबराहट के रूप में साफ दिखाई दे रहा है.
भारतीय रसोईघरों में LPG की पैठ और उसकी निर्भरता इस बात से स्पष्ट होती है कि देश की कुल गैस खपत का लगभग 87% हिस्सा अकेले घरेलू क्षेत्र से आता है. आज सिलेंडर केवल एक ईंधन नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय परिवारों की अनिवार्य जरूरत बन चुका है, जिससे यह खाना पकाने के लिए सबसे प्रमुख और भरोसेमंद स्रोत के रूप में उभरा है. घरों में इसकी इतनी गहरी पहुंच के कारण ही, आपूर्ति में आने वाला जरा सा भी व्यवधान या कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे आम आदमी के बजट और जीवनशैली पर भारी दबाव पैदा कर देता है.
आपूर्ति में जरा सी भी रुकावट, लाखों लोग प्रभावित
आंकड़ों से पता चलता है कि गोवा, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, केरल और दिल्ली में LPG पर निर्भरता विशेष रूप से अधिक है, यहां प्रति लाख आबादी पर 25,000 से अधिक सक्रिय LPG उपयोगकर्ता हैं. उत्तर प्रदेश (20,085), बिहार (17,775) और मध्य प्रदेश (19,742) जैसे अधिक आबादी वाले राज्यों ने भी उन सीमाओं को पार कर लिया है, जहां आपूर्ति में जरा सी भी रुकावट एक ही समय में लाखों लोगों को प्रभावित करती है. इससे यह बात समझ में आती है कि क्यों महानगरों और अर्ध-शहरी भारत, दोनों ही जगहों पर लंबी कतारों के दृश्य सामने आ रहे हैं.
भारत में LPG की कमी का प्रभाव हर राज्य में अलग-अलग है, जिसका मुख्य कारण पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) के नेटवर्क का विस्तार है. जिन राज्यों में सिटी गैस ग्रिड मजबूत है, वहां घरेलू सिलेंडरों पर निर्भरता काफी कम है, जिससे वे वर्तमान संकट से काफी हद तक सुरक्षित हैं. उदाहरण के तौर पर, दिल्ली और गुजरात इस मामले में सबसे आगे हैं. दिल्ली में प्रति लाख आबादी पर 8,300 से अधिक और गुजरात में 5,100 से अधिक PNG कनेक्शन हैं.
महाराष्ट्र और हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में भी PNG का व्यापक उपयोग देखा जा रहा है. इन राज्यों के जो परिवार पाइपलाइन नेटवर्क से जुड़े हैं, उन्हें सिलेंडर की बुकिंग या डिलीवरी में होने वाली देरी की चिंता नहीं सताती. इसके विपरीत, जिन राज्यों में यह बुनियादी ढांचा विकसित नहीं है, वहां लोग पूरी तरह सिलेंडरों पर निर्भर हैं, जिससे वहां ऊर्जा संकट का असर अधिक गहरा महसूस होता है.
- कुल LPG कनेक्शन = 329.7 मिलियन
- कुल PNG कनेक्शन = 15.8 मिलियन
- अनुपात = 21:1
- इसका मतलब है कि भारत में हर 21 LPG कनेक्शन पर सिर्फ़ एक PNG कनेक्शन है













